फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Gandhi Jayanti 2020: Khadi ashram closed in Mainpuri

Gandhi Jayanti 2020: मैनपुरी में पांच साल से बंद खादी आश्रम, स्वदेशी के प्रतीक चरखे हुए कबाड़

Fri, 02 Oct 2020 11:18 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 02 Oct 2020 11:18 AM IST
विज्ञापन
Gandhi Jayanti 2020: Khadi ashram closed in Mainpuri
चरखा - फोटो : अमर उजाला

मैनपुरी जिले में पांच साल से खादी आश्रम बंद पड़ा है। गोदामों में चरखे भी कबाड़ हो गए हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वदेशी अपनाने के लिए खादी को बढ़ावा देने की शुरुआत की थी। इससे न केवल देश में रोजगार बढ़ा, बल्कि विश्व पटल पर भारत को खादी के लिए सम्मान भी मिला। बापू के यही चरखे आज धूल फांक रहे हैं। 

विज्ञापन


जिले में लगभग आधा दर्जन खादी आश्रम संचालित थे। यहां चरखे से सूत कातकर उसे खादी भंडारों और कंपनियों को भेजा जाता था। जहां सूत से कपड़ा बुना जाता था। लेकिन शासन की अनदेखी के चलते धीरे-धीरे ये खादी आश्रम बंद होते चले गए। साल 2000 तक आते-आते महज एक ही आश्रम संचालित रह गया। 
विज्ञापन



यह आश्रम था आलीपुर खेड़ा स्थित लोक कल्याण आश्रम। यहां सूत कातने का काम किया जाता था। वर्ष 2015 से यह आश्रम भी बंद हो गया। विभागीय अधिकारी इसके पीछे मशीनों से सूत कातना सस्ता होने और सफाई होने को जिम्मेदार बताते हैं। तब से ये चरखे धूल फांक रहे हैं। शासन और प्रशासन ने भी दोबारा इन खादी आश्रमों को शुरू कराने के लिए कोई पहल नहीं की। 

विज्ञापन
विज्ञापन

आगरा रोड स्थित खादी की दुकान पर एक शर्ट की कीमत एक हजार रुपये से शुरू होकर चार हजार रुपये तक है। जबकि बाजार में अन्य कपड़े इससे सस्ते हैं। इसके चलते अब खादी केवल राजनेताओं तक ही सिमटकर रह गई है। इससे बिक्री भी काफी कम हो गई है। 

रोजगार को भी लगा झटका 

खादी ग्रामोद्योग विभाग के अनुसार जिले में सूत कातने से लगभग पांच सौ लोगों को रोजगार मिलता था। इतना ही नहीं इस काम में बुजुर्ग अधिक संख्या में शामिल थे। इससे उनकी आजीविका चलती थी। जिले में सूत कातने का काम बंद होने के बाद इन लोगों से ये रोजगार भी छिन गया।  

जिला खादी ग्रामद्योग अधिकारी आरजी गौतम ने बताया कि जिले में सूत कातने का काम पूरी तरह बंद हो चुका है। आलीपुर खेड़ा में संचालित आखिरी खादी आश्रम में भी पांच साल पहले काम बंद हो चुका है। अब जिले में कहीं भी चरखे से सूत कातने का काम नहीं हो रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed