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फर्जीवाड़े के आरोप में निलंबित तत्कालीन डीपीआरओ शासन से दोषमुक्त
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मैनपुरी। दो साल पहले जिले में तैनात तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र यादव को शासन ने जांच के बाद दोषमुक्त कर दिया है। उन्हें तत्कालीन डीएम की संस्तुति पर फर्जीवाड़ा समेत अन्य कई आरोपों के चलते निलंबित किया गया था।
एक मार्च 2019 को जिले में तैनात तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र यादव को शासन ने तत्कालीन जिलाधिकारी पीके उपाध्याय की संस्तुति पर निलंबित किया था। उन पर बेसलाइन सूची से बाहर शौचालय निर्माण के लिए धनराशि देने, गलत खातों में धनराशि देने, आदेशों की अवहेलना, शिकायतों का मनमाने तरीके से निस्तारण और कूड़ेदान खरीद में फर्जीवाड़ा करने समेत अन्य आरोप लगाए गए थे। साथ ही मामले की जांच उप निदेशक पंचायत राज अलीगढ़ मंडल एसके सिंह को सौंपी गई थी।
उप निदेशक ने मई 2020 में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। इसमें उन्होंने पर्यवेक्षण में शिथिलता की बात कही थी। हालांकि कहीं भी कोई वित्तीय अनियमितता जांच में साबित नहीं हो सकी थी। इसके चलते शासन ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसकी एक प्रति जिलाधिकारी मैनपुरी और मुख्य विकास अधिकारी मैनपुरी को भी भेजी गई है। मामले में तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र यादव ने कहा कि उन्होंने किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं की थी। जांच रिपोर्ट में सब सामने आ गया है। शासन ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया है।
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कूड़ेदान खरीद के लिए नहीं दिया कोई आदेश
तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह के खिलाफ मुख्य आरोप ग्राम पंचायतों में लगे कूड़ेदानों की खरीद में फर्जीवाड़े का था। आरोप था कि कीमत से कई गुना अधिक रुपये खर्च कर इनकी खरीद की गई। मामले की जांच में पाया गया के डीपीआरओ की ओर से खरीद के लिए कोई केंद्रीकृत आदेश जारी नहीं किया गया था। सभी ग्राम पंचायतों ने खुद ही इनकी खरीद की थी।
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एक मार्च 2019 को जिले में तैनात तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र यादव को शासन ने तत्कालीन जिलाधिकारी पीके उपाध्याय की संस्तुति पर निलंबित किया था। उन पर बेसलाइन सूची से बाहर शौचालय निर्माण के लिए धनराशि देने, गलत खातों में धनराशि देने, आदेशों की अवहेलना, शिकायतों का मनमाने तरीके से निस्तारण और कूड़ेदान खरीद में फर्जीवाड़ा करने समेत अन्य आरोप लगाए गए थे। साथ ही मामले की जांच उप निदेशक पंचायत राज अलीगढ़ मंडल एसके सिंह को सौंपी गई थी।
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उप निदेशक ने मई 2020 में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। इसमें उन्होंने पर्यवेक्षण में शिथिलता की बात कही थी। हालांकि कहीं भी कोई वित्तीय अनियमितता जांच में साबित नहीं हो सकी थी। इसके चलते शासन ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसकी एक प्रति जिलाधिकारी मैनपुरी और मुख्य विकास अधिकारी मैनपुरी को भी भेजी गई है। मामले में तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र यादव ने कहा कि उन्होंने किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं की थी। जांच रिपोर्ट में सब सामने आ गया है। शासन ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया है।
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कूड़ेदान खरीद के लिए नहीं दिया कोई आदेश
तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह के खिलाफ मुख्य आरोप ग्राम पंचायतों में लगे कूड़ेदानों की खरीद में फर्जीवाड़े का था। आरोप था कि कीमत से कई गुना अधिक रुपये खर्च कर इनकी खरीद की गई। मामले की जांच में पाया गया के डीपीआरओ की ओर से खरीद के लिए कोई केंद्रीकृत आदेश जारी नहीं किया गया था। सभी ग्राम पंचायतों ने खुद ही इनकी खरीद की थी।