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छह ग्राम पंचायतों में एक ही सचिव ने किया 62 लाख का घोटाला
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मैनपुरी। पंचायत राज विभाग में लगातार एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं। इस बार सामने आए घोटाले में सारे रिकॉर्ड टूट गए। एक सचिव ने छह ग्राम पंचायतों में 62 लाख रुपये का घोटाला कर डाला। जिला विकास अधिकारी ने सचिव से 31.01 लाख रुपये की रिकवरी के आदेश देकर उसे मूल वेतन पर कर दिया है।
मामला विकास खंड बरनाहल की छह ग्राम पंचायतों का है। इसमें कैलाशपुर, बीनेपुर, सजवारपुर, बलपुरा, हाजीपुर नेरा और कनिकपुर खिजरपुर ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें तैनात रहे पंचायत सचिव राजीव कुमार राणा ने इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया। एक शिकायत पर तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ने तीन सदस्यीय समिति बनाकर ग्राम पंचायतों की जांच के आदेश दिए थे। इसमें सहायक अभियंता डीआरडीए, खंड विकास अधिकारी घिरोर और अवर अभियंता आरईडी घिरोर को शामिल किया गया था। तीनों ने संयुक्त रूप से जांच की तो बड़ा घोटाला सामने आया। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी।
जांच रिपोर्ट में पता चला कि सचिव राजीव राणा ने अपनी तैनाती के दौरान वर्ष 2018-19 में विकास कार्यों के लिए आई धनराशि में से 62.02 लाख का घोटाला कर डाला। सभी छह ग्राम पंचायतों में सौ कार्यों के नाम पर ये धनराशि ग्राम निधि खाते से आहरित की गई, लेकिन कार्य नहीं कराए गए। इसमें गली निर्माण, नाली निर्माण, बाउंड्रीवाल, खड़ंजा, हैंडपंप रीबोर आदि कार्य शामिल हैं। जिला विकास अधिकारी ने सचिव से आधी 31.01 लाख की रिकवरी के आदेश किए हैं, साथ ही उसे मूल वेतन पर कर दिया है। वहीं प्रधानों से रिकवरी के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र भेजा है। इतना बड़ा घोटाला खुलने के बाद पंचायत राज विभाग में हड़कंप मच गया है।
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सांसद निधि के कार्यों को भी ग्राम पंचायत से दिखाया
घोटाले की जांच में एक और भी मामला सामने आया है। जांच में पता चला कि ग्राम पंचायतों में कुछ कार्य सांसद निधि की धनराशि से कराए गए थे। इन कार्यों को भी पंचायत निधि से दिखाकर उनके नाम पर धनराशि आहरित कर ली गई।
15 साल में होगी रिकवरी
सचिव राजीव राणा से 15 साल में 31.01 लाख रुपये की रिकवरी की जा सकेगी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या धनराशि जमा कर देना ही पर्याप्त है। इसके साथ ही धनराशि की रिकवरी 15 साल में हो पाएगी।
मामले की जानकारी की जाएगी। घोटाला कैसे हुआ और क्या कार्रवाई हुई है इस बारे में भी संबंधित विभागीय अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। जो भी दोषी होगा उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।
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मामला विकास खंड बरनाहल की छह ग्राम पंचायतों का है। इसमें कैलाशपुर, बीनेपुर, सजवारपुर, बलपुरा, हाजीपुर नेरा और कनिकपुर खिजरपुर ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें तैनात रहे पंचायत सचिव राजीव कुमार राणा ने इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया। एक शिकायत पर तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ने तीन सदस्यीय समिति बनाकर ग्राम पंचायतों की जांच के आदेश दिए थे। इसमें सहायक अभियंता डीआरडीए, खंड विकास अधिकारी घिरोर और अवर अभियंता आरईडी घिरोर को शामिल किया गया था। तीनों ने संयुक्त रूप से जांच की तो बड़ा घोटाला सामने आया। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी।
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जांच रिपोर्ट में पता चला कि सचिव राजीव राणा ने अपनी तैनाती के दौरान वर्ष 2018-19 में विकास कार्यों के लिए आई धनराशि में से 62.02 लाख का घोटाला कर डाला। सभी छह ग्राम पंचायतों में सौ कार्यों के नाम पर ये धनराशि ग्राम निधि खाते से आहरित की गई, लेकिन कार्य नहीं कराए गए। इसमें गली निर्माण, नाली निर्माण, बाउंड्रीवाल, खड़ंजा, हैंडपंप रीबोर आदि कार्य शामिल हैं। जिला विकास अधिकारी ने सचिव से आधी 31.01 लाख की रिकवरी के आदेश किए हैं, साथ ही उसे मूल वेतन पर कर दिया है। वहीं प्रधानों से रिकवरी के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र भेजा है। इतना बड़ा घोटाला खुलने के बाद पंचायत राज विभाग में हड़कंप मच गया है।
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सांसद निधि के कार्यों को भी ग्राम पंचायत से दिखाया
घोटाले की जांच में एक और भी मामला सामने आया है। जांच में पता चला कि ग्राम पंचायतों में कुछ कार्य सांसद निधि की धनराशि से कराए गए थे। इन कार्यों को भी पंचायत निधि से दिखाकर उनके नाम पर धनराशि आहरित कर ली गई।
15 साल में होगी रिकवरी
सचिव राजीव राणा से 15 साल में 31.01 लाख रुपये की रिकवरी की जा सकेगी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या धनराशि जमा कर देना ही पर्याप्त है। इसके साथ ही धनराशि की रिकवरी 15 साल में हो पाएगी।
मामले की जानकारी की जाएगी। घोटाला कैसे हुआ और क्या कार्रवाई हुई है इस बारे में भी संबंधित विभागीय अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। जो भी दोषी होगा उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।