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औंछा में प्रधान और सचिव ने किया फर्जीवाड़ा, पूरी नहीं हो सकी जांच
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27एमएनपी-10-विकास भवन
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। विकास घिरोर के गांव औंछा में प्रधान और सचिव पर निर्माण कार्यों में हजारों का फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। शिकायत पर हुई जांच में कुछ मामले तो सामने आ गए, लेकिन अभिलेख न मिलने के कारण जांच पूरी नहीं हो सकी। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने प्रधान को अधिकार सीज करने का नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
एक शिकायत के बाद मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा ने ग्राम पंचायत औंछा में जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। इसमें आचार्य प्रशिक्षण संस्थान धीरेंद्र कुमार, खंड विकास अधिकारी घिरोर धीरेंद्र सिंह और अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग मानवेंद्र कुमार को शामिल किया गया था। टीम ने जांच में पाया कि ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्र व विद्यालय के निर्माण में 18 हजार रुपये का अधिक भुगतान किया गया। वहीं स्कूल के शौचालय निर्माण में भी 29 हजार का अधिक भुगतान हुआ। टीम ने जब अन्य कार्यों की जांच के लिए अभिलेख मांगे तो प्रधान भावना देवी व ग्राम पंचायत अधिकारी मनोज कुमार गुप्ता ने अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। इससे अन्य विकास कार्यों व हैंडपंप रीबोर में फर्जीवाड़े की शिकायत की जांच नहीं हो सकी। समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी। यहां से कार्रवाई के लिए फाइल जिलाधिकारी को भेजी गई थी।
जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने 47 हजार रुपये का फर्जीवाड़ा करने और अभिलेख न देने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रधान भावना देवी को अधिकार सीज करने का नोटिस जारी कर दिया है। सात दिन में साक्ष्य सहित जवाब और अभिलेख उपलब्ध न कराने पर अधिकार सीज किए जाएंगे।
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ये था मामला
ग्राम पंचायत औंछा निवासी संजीव मिश्रा और सुधीर बघेल ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत में प्रधान और सचिव ने मिलकर सरकारी धनराशि का बंदरबांट किया है। उन्होंने विकास कार्यों व अन्य मदों से गलत भुगतान की भी शिकायत की थी। मुख्य विकास अधिकारी ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच के आदेश दिए थे।
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एक शिकायत के बाद मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा ने ग्राम पंचायत औंछा में जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। इसमें आचार्य प्रशिक्षण संस्थान धीरेंद्र कुमार, खंड विकास अधिकारी घिरोर धीरेंद्र सिंह और अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग मानवेंद्र कुमार को शामिल किया गया था। टीम ने जांच में पाया कि ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्र व विद्यालय के निर्माण में 18 हजार रुपये का अधिक भुगतान किया गया। वहीं स्कूल के शौचालय निर्माण में भी 29 हजार का अधिक भुगतान हुआ। टीम ने जब अन्य कार्यों की जांच के लिए अभिलेख मांगे तो प्रधान भावना देवी व ग्राम पंचायत अधिकारी मनोज कुमार गुप्ता ने अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। इससे अन्य विकास कार्यों व हैंडपंप रीबोर में फर्जीवाड़े की शिकायत की जांच नहीं हो सकी। समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी। यहां से कार्रवाई के लिए फाइल जिलाधिकारी को भेजी गई थी।
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जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने 47 हजार रुपये का फर्जीवाड़ा करने और अभिलेख न देने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रधान भावना देवी को अधिकार सीज करने का नोटिस जारी कर दिया है। सात दिन में साक्ष्य सहित जवाब और अभिलेख उपलब्ध न कराने पर अधिकार सीज किए जाएंगे।
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ये था मामला
ग्राम पंचायत औंछा निवासी संजीव मिश्रा और सुधीर बघेल ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत में प्रधान और सचिव ने मिलकर सरकारी धनराशि का बंदरबांट किया है। उन्होंने विकास कार्यों व अन्य मदों से गलत भुगतान की भी शिकायत की थी। मुख्य विकास अधिकारी ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच के आदेश दिए थे।