बांकेबिहारी मंदिर हादसा: तीन बिंदुओं पर जांच कर रही समिति, पूर्व डीजीपी पहुंचे वृंदावन, जुटाई जानकारी
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में मंगला आरती के दौरान हुए हादसे की प्रदेश शासन स्तर से जांच शुरू हो गई। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह की अध्यक्षता में जांच समिति इसकी जांच कर रही है। इस संबंध में बुधवार को पूर्व डीजीपी वृंदावन पहुंचे।
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वृंदावन के ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में हुए हादसे की जांच के लिए पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह बुधवार को फिर वृंदावन पहुंचे। उन्होंने मुख्य तीन बिंदुओं पर जांच की। हादसे के कारण, घटना की जवाबदेही और घटना की पुनरावृत्ति रोकने पर जांच की। बता दें कि मुख्यमंत्री ने घटना की जांच के लिए रिटायर्ड डीजीपी सुलखान सिंह के नेतृत्व में जांच टीम गठित की है। टीम से 15 दिन में रिपोर्ट भी मांगी है।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए जांच समिति के अध्यक्ष ने कहा कि मंगलवार को वह एक आम श्रद्धालु की तरह वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर की गलियों में घूमकर चले गए। इससे देखना चाहते थे कि मंदिर आने वाले लोगों को क्या-क्या परेशानी का सामना करना पड़ता है और यहां के हालात कैसे हैं। आज कुछ औपचारिक जांच शुरू की गई है, जिसमें मंदिर के सेवायतों और आम लोगों से हादसे के कारणों की जानकारी एकत्रित की गई है।
उन्होंने कहा कि हादसा बेहद दर्दनाक था, सरकार ने गंभीरता से लिया है। बांकेबिहारी मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी व्यवस्थाएं होंगी। गुरुवार को जांच समिति के सदस्य अलीगढ़ के कमिश्नर सहयोगी होंगे। 25 और 26 अगस्त को सुबह 10 से शाम 4 बजे तक पर्यटक सुविधा केंद्र वृंदावन में मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए सुझाव मांगे हैं। इस मौके पर जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल, प्राधिकरण उपाध्यक्ष नगेंद्र प्रताप और एसएसपी अभिषेक यादव समेत अन्य अधिकारी रहे।
मंगलवार को गोपनीय तरीके से की जांच
इससे पूर्व जांच समिति के अध्यक्ष मंगलवार को गोपनीय तरीके से बांकेबिहारी मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने दुकानदारों व अन्य लोगों से भी घटना के बारे में जानकारी की। सनेह बिहारी मंदिर से लेकर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के गेट नंबर पांच और चार तक निरीक्षण किया। पूर्व डीजीपी का निरीक्षण इतना गोपनीय रहा कि न पुलिस के अधिकारियों को उनके आने की भनक लगी और न मंदिर प्रबंधन ही उन्हें पहचान सका। जांच करने के बाद गाड़ी में बैठे और चले गए।
जांच शुरू होते ही अफसरों की बढ़ीं धड़कनें
जांच के बाद रिपोर्ट शासन और मुख्यमंत्री को जाएगी, यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन शुरू हुई जांच से प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की धड़कने बढ़ा दीं हैं। अधिकारियों को आभास है कि जांच के दौरान सारी स्थितियां निकलकर सामने आ जाएंगी। मंगला आरती के दौरान कौन कहां था और अपनी ड्यूटी सही प्रकार निभा रहा था या नहीं इसकी भी जांच होगी। मोबाइल से वीडियो बनाए जाने की भी जांच होने पर अधिकारियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।