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एनएच-2 पर यातायात को मिलेगी रफ्तार, होंगे ये निर्माण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 14 Jan 2018 04:57 PM IST
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एनएच-2
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा-दिल्ली एनएच-2 पर यातायात को रफ्तार देने के लिए व्यस्ततम मोड़ और तिराहों पर आधा दर्जन फुट ओवरब्रिज बनाए जाना लगभग तय हो चुका है।
तिराहों पर यातायात का खासा दबाव रहता है और आए दिन सड़क हादसे भी होते हैं। इसके दृष्टिगत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) में कीठम से लंगड़े की चौकी तक छह फुट ओवरब्रिज बनाए जाने पर सहमति बन चुकी है।
इनका प्रस्ताव भी मंत्रालय को भेजा जा चुका है। इस साल फुट ओवर ब्रिज बनाने का काम भी शुरू हो जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर रुनकता से वाटर वर्क्स चौराहे तक 23 किलोमीटर लंबे हाईवे पर कई ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना बहुल क्षेत्र) हैं।
पिछले चार साल से 23 किमी क्षेत्र में तीन फ्लाईओवर, दो अंडरपास और इसे सिक्सलेन करने का काम किया जा रहा है। रुनकता में निर्माणाधीन अंडरपास पूरा होने के कगार पर है।
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तिराहों पर यातायात का खासा दबाव रहता है और आए दिन सड़क हादसे भी होते हैं। इसके दृष्टिगत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) में कीठम से लंगड़े की चौकी तक छह फुट ओवरब्रिज बनाए जाने पर सहमति बन चुकी है।
इनका प्रस्ताव भी मंत्रालय को भेजा जा चुका है। इस साल फुट ओवर ब्रिज बनाने का काम भी शुरू हो जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर रुनकता से वाटर वर्क्स चौराहे तक 23 किलोमीटर लंबे हाईवे पर कई ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना बहुल क्षेत्र) हैं।
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पिछले चार साल से 23 किमी क्षेत्र में तीन फ्लाईओवर, दो अंडरपास और इसे सिक्सलेन करने का काम किया जा रहा है। रुनकता में निर्माणाधीन अंडरपास पूरा होने के कगार पर है।
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पूरे दिन यातायात का दबाव
खंदारी, सुल्तानगंज की पुलिया और वाटर वर्क्स चौराहों पर फ्लाईओवर बनकर तैयार हो चुके हैं। छह लेन होने के बाद हाईवे पर दिल्ली की ओर से आने वाले यातायात की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।
क्योंकि हाईवे का चौड़ीकरण होने के बाद रुनकता से वाटर वर्क्स चौराहे तक कोई बाधा वाहन चालक के सामने नहीं आएगी। सबसे ज्यादा सड़क हादसों में लोगों की मौत हाईवे के इसी हिस्से में होती हैं।
हाईवे पर कई व्यस्ततम तिराहे और मोड़ ऐसे हैं, जहां पूरे दिन यातायात का दबाव रहता है। पैदल राहगीर भी हाईवे को क्रास करते हैं।
एनएच-2 पर बढ़ते हादसों के मद्देनजर आगरा के आईजी जोन ने व्यस्ततम मोड़ और तिराहों पर अंडरपास और फुट ओवर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव दिया था।
क्योंकि हाईवे का चौड़ीकरण होने के बाद रुनकता से वाटर वर्क्स चौराहे तक कोई बाधा वाहन चालक के सामने नहीं आएगी। सबसे ज्यादा सड़क हादसों में लोगों की मौत हाईवे के इसी हिस्से में होती हैं।
हाईवे पर कई व्यस्ततम तिराहे और मोड़ ऐसे हैं, जहां पूरे दिन यातायात का दबाव रहता है। पैदल राहगीर भी हाईवे को क्रास करते हैं।
एनएच-2 पर बढ़ते हादसों के मद्देनजर आगरा के आईजी जोन ने व्यस्ततम मोड़ और तिराहों पर अंडरपास और फुट ओवर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव दिया था।
घनी आबादी वाला है ये क्षेत्र
इनमें कीठम मोड़, शास्त्रीपुरम, कैलाश मोड़, गुरुद्वारा गुरु का ताल, अबुल उलाह की दरगाह का मोड़ और लंगड़े की चौकी पर फुट ओवर ब्रिज बनाने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। एनएचएआई ने प्रस्ताव सड़क परिवहन मंत्रालय को भेज दिया है, जहां से इनकी जल्द ही स्वीकृति मिलने की संभावना है।
कैलाश मंदिर में प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। इस मोड़ पर भी खासा ट्रैफिक रहता है। इसी तरह गुरुद्वारा गुरु के ताल पर वर्षभर कार्यक्रम होते हैं। इस कारण यह तिराहा भी बेहद व्यस्त रहता है। अकसर ही यहां हादसे भी होते हैं।
शास्त्रीपुरम, लंगड़े की चौकी भी घनी आबादी वाले इलाके हैं। अबुल उलाह की दरगाह के मोड़ पर भी अकीदतमंदों की भीड़ रहती है। हर गुरुवार को यहां मेला लगता है।
कैलाश मंदिर में प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। इस मोड़ पर भी खासा ट्रैफिक रहता है। इसी तरह गुरुद्वारा गुरु के ताल पर वर्षभर कार्यक्रम होते हैं। इस कारण यह तिराहा भी बेहद व्यस्त रहता है। अकसर ही यहां हादसे भी होते हैं।
शास्त्रीपुरम, लंगड़े की चौकी भी घनी आबादी वाले इलाके हैं। अबुल उलाह की दरगाह के मोड़ पर भी अकीदतमंदों की भीड़ रहती है। हर गुरुवार को यहां मेला लगता है।
बड़ी तादाद में हादसा
इन्हीं सबके कारण छह फुट ओवर ब्रिज बनाने की बात तय हुई है। पूरे साल होने वाले हादसों में बड़ी तादाद एनएच-2 पर होने वाले हादसों की होती है।
अगस्त में आईएसबीटी मोड़ पर छह लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह अन्य सुल्तानगंज की पुलिया पर भी हादसों में सबसे ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।
वर्ष जिले में सड़क हादसे मृृतक घायल
2016 1062 522 630
2017 1025 530 900
इन्हीं सबके कारण छह फुट ओवर ब्रिज बनाने की बात तय हुई है। पूरे साल होने वाले हादसों में बड़ी तादाद एनएच-2 पर होने वाले हादसों की होती है।
अगस्त में आईएसबीटी मोड़ पर छह लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह अन्य सुल्तानगंज की पुलिया पर भी हादसों में सबसे ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।
वर्ष जिले में सड़क हादसे मृृतक घायल
2016 1062 522 630
2017 1025 530 900