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एनिमेटेड फिल्मों में दिखाई देंगी 'सुगंध रानी' और 'भीमा बाई', ताज के साये में रिकॉर्ड हुईं कहानियां
Fri, 19 Jul 2019 02:30 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 19 Jul 2019 02:30 PM IST
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महताब बाग में रिकॉर्ड की गईं कहानियां
- फोटो : अमर उजाला
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दादी-नानी द्वारा सुनाई जाने वाली लोक कथाएं अब एनिमेटेड फिल्मों में भी देखने को मिलेंगी। इन फिल्मों में ताजनगरी के साहित्यकार भी बच्चों को अपनी कहानियां सुनाते दिखाई देंगे। गुरुवार को ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया की पहल पर प्रोडक्शन हाउस आइडिया वर्क्स की टीम यहां के साहित्यकारों की कहानियों को रिकॉर्ड करने के लिए पहुंची।
मेहताब बाग में पूरे दिन चली रिकॉर्डिंग में साहित्यकार डॉ. अरुण उपाध्याय, ऐलेश अवस्थी, डॉ. राजेंद्र मिलन, डॉ. पुनीता पचौरी, सुशील सरित, अर्चना, अलका अग्रवाल की स्वरचित और पारंपरिक लोक कथाओं की टीम ने रिकॉर्डिंग की। ‘दुर्गादास ज्योतिष शास्त्री’, ‘सुगंध रानी’, ‘श्रीकृष्ण और यक्ष’ ‘मगरमच्छ’, ‘खाचड़ी’, ‘भीमा बाई’ समेत कुल बीस कहानियों की रिकॉर्ड किया गया।
पूरे देश से साहित्यकारों द्वारा लिखी गईं 100 कहानियों को रिकॉर्ड किया जाएगा। दिल्ली से रिकॉर्डिंग के लिए आईं अरूपा लहरी और प्रिया का कहना था कि दादी-नानी की कहानियों का जो दौर समाप्त होता जा रहा है, उस दौर को फिर से जिंदा करने की दिशा में यह एक कदम है। इसके साथ ही कहानियों के माध्यम से बच्चों को शिक्षित करना भी एनिमेटेड फिल्म बनाने का मकसद है। उन्होंने बताया कि कहानियों को संपादित करके एनिमेटेड फिल्मों का निर्माण भी किया जाएगा।
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मेहताब बाग में पूरे दिन चली रिकॉर्डिंग में साहित्यकार डॉ. अरुण उपाध्याय, ऐलेश अवस्थी, डॉ. राजेंद्र मिलन, डॉ. पुनीता पचौरी, सुशील सरित, अर्चना, अलका अग्रवाल की स्वरचित और पारंपरिक लोक कथाओं की टीम ने रिकॉर्डिंग की। ‘दुर्गादास ज्योतिष शास्त्री’, ‘सुगंध रानी’, ‘श्रीकृष्ण और यक्ष’ ‘मगरमच्छ’, ‘खाचड़ी’, ‘भीमा बाई’ समेत कुल बीस कहानियों की रिकॉर्ड किया गया।
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पूरे देश से साहित्यकारों द्वारा लिखी गईं 100 कहानियों को रिकॉर्ड किया जाएगा। दिल्ली से रिकॉर्डिंग के लिए आईं अरूपा लहरी और प्रिया का कहना था कि दादी-नानी की कहानियों का जो दौर समाप्त होता जा रहा है, उस दौर को फिर से जिंदा करने की दिशा में यह एक कदम है। इसके साथ ही कहानियों के माध्यम से बच्चों को शिक्षित करना भी एनिमेटेड फिल्म बनाने का मकसद है। उन्होंने बताया कि कहानियों को संपादित करके एनिमेटेड फिल्मों का निर्माण भी किया जाएगा।
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यह काम करती है संस्था
इंग्लैंड की ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया, इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर कल्चरल रिलेशंस एंड एजूकेशनल अपॉरच्यूनिटीज पर काम करती है। इसका मुख्यालय ब्रिटेन में है। स्कॉटलैंड, वेल्स के अलावा दुनियाभर में इसकी कई शाखाएं हैं। इसे शाही चार्टर की उपाधि मिली हुई है। भारत में इसकी शाखा दिल्ली में है। यह संस्था विश्व में देश की संस्कृतियों के आधार पर एजूकेशनल प्रोग्राम तैयार करती है।
यहां देख सकेंगे फिल्म
ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट खोलने पर फॉल्कलोरे ऑप्शन दिखाई देगा। इस ऑप्शन को क्लिक करने पर कहानियां दिखाई देंगी, जो भी कहानी किसी को सुननी होगी, वह उस कहानी पर क्लिक करके उसे सुन सकेगा। एनिमेटेड फिल्म बनने में छह महीने का समय लगेगा।
यहां देख सकेंगे फिल्म
ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट खोलने पर फॉल्कलोरे ऑप्शन दिखाई देगा। इस ऑप्शन को क्लिक करने पर कहानियां दिखाई देंगी, जो भी कहानी किसी को सुननी होगी, वह उस कहानी पर क्लिक करके उसे सुन सकेगा। एनिमेटेड फिल्म बनने में छह महीने का समय लगेगा।