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ताजनगरी में फूलों की खेती से महकी जिंदगी, किसान बोले- लागत कम, मुनाफा ज्यादा

Mon, 19 Oct 2020 02:34 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 19 Oct 2020 02:34 PM IST
सार

  • 70 दिन तक में आने लगती है फूलों की फसल, 
  • 30 हजार रुपये तक लागत एक हेक्टेयर में
  • 20 हजार हेक्टेयर में हो रही आगरा में खेती

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Flowers Farming In Agra By Farmers
ताजनगरी में फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ताजनगरी में फूलों की खेती से किसानों की जिंदगी महक रही है। फूलों की खेती का रकबा 20 हजार हेक्टेयर हो गया है। बीते दो साल में ही यह पांच हजार हेक्टेयर बढ़ा है। किसानों का कहना है कि फूलों की खेती में दो से ढाई महीने में उपज आने लगती है। अन्य फसलों के मुकाबले लागत कम है।
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आगरा के फतेहाबाद, शमसाबाद, किरावली, खेरागढ़ ब्लाक में मुख्य रूप से फूलों की खेती की जा रही है। कृपालपुरा के प्रगतिशील किसान महेश कुशवाहा ने बताया कि किसानों की पसंद गेंदा, गुलाब, मोरपंख, चंपा, चमेली है।
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अन्य फूलों की खेती भी होती है लेकिन कम। अमूमन फूलों की खेती में एक हेक्टेयर में 25-30 हजार रुपये तक लागत आती है। हालांकि मोरपंख, चंपा, चमेली में 60 हजार रुपये तक लागत आ जाती है। फसल 60 से 70 दिन में तैयार हो जाती है। लागत के दस गुना तक मुनाफा हो जाता है।
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Flowers Farming In Agra By Farmers
फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी आपूर्ति
आगरा से प्रदेश में ही नहीं दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश में आपूर्ति की जाती है। किसानों ने बताया कि शादी, मंदिर और त्योहार पर पूरी फसल बिक जाती है। इसके बाद अन्य फसल उगाते हैं। 

नवरात्र-दिवाली तक बिक जाती पूरी फसल
गेंदा की पांच बीघा से अधिक की खेती करता हूं। नवरात्र और दिवाली तक गेंदा बिक जाता है। दो-ढाई महीने तक फसल रखते हैं, फूल बेचने के बाद दूसरी फसल की बुवाई कर देते हैं। -डालचंद कुशवाहा, फतेहाबाद

आलू में लागत ज्यादा, बागवानी सदाबहार
आलू में लागत बहुत आती है, नुकसान ज्यादा रहता है। बागवानी और फूलों की खेती सदाबहार है। मोरपंख, चंपा, गुलाब और चमेली के फूलों की खूब मांग रहती है, मांग अधिक होने पर अच्छी कमाई हो जाती है। -सतीश सिकरवार, किरावली

कम लागत और मुनाफा अच्छा
फूलों की खेती में बस देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है। त्योहार पर गेंदा एकमुश्त बिक जाता है। हर साल 20 से 50 रुपये किलो तक के भाव आसानी से मिल जाते हैं। कम खर्च में मुनाफा हो जाता है। -गोपाली कुशवाहा, कृपालपुरा 
 
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