फिरोजाबाद : मतदान के बाद पांच जिला पंचायत सदस्य गिरफ्तार, पुलिस ने भेजा जेल
गिरफ्तार जिला पंचायत सदस्यों में से चार के खिलाफ चार के खिलाफ थाना नारखी में अपहरण का दर्ज है। इनकी गिरफ्तारी के वारंट जारी हुए थे।
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फिरोजाबाद में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए शनिवार को हुए मतदान के बाद उन पांच जिला पंचायत सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया, जिनके खिलाफ थाना नारखी और एका में मुकदमे दर्ज थे। न्यायालय की ओर से इनकी गिरफ्तारी के वारंट जारी हो गए थे।
पुलिस इन जिला पंचायत सदस्यों की तलाश में जुटी थी, लेकिन शुक्रवार को हाईकोर्ट द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मतदान करने से नहीं रोकने के आदेश दिए थे। यही कारण रहा कि मतदान करने के बाद इनको गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है।
जिला पंचायत के वार्ड संख्या 14 से जिला पंचायत सदस्य प्रवेश कुमारी पुत्री सियाराम निवासी कोटला का अपहरण किए जाने का मामला बसपा के सेक्टर अध्यक्ष धर्मपाल सिंह ने थाना नारखी में दर्ज कराया था।
ये हुए गिरफ्तार
पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच की तो इसमें जिला पंचायत सदस्य थाना एका के फरीदा पैढ़त निवासी प्रशांत यादव (वार्ड संख्या नौ), जसराना के सलेमपुर निवासी मनोज कुमार (वार्ड नं. चार),थाना लाइनपार के गुदाऊं निवासी अशोक यादव (वार्ड संख्या 23) एवं थाना खैरगढ़ के बनवीरपुर कुढ़ी ककरारा निवासी अरुण कुमार उर्फ बॉबी (वार्ड संख्या 12) को शामिल पाया था। चारों के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट जारी हुए थे।
इधर, थाना एका पुलिस ने जिला पंचायत सदस्य के चुनाव से पूर्व थाना एका के नगला बनिया निवासी प्रदीप उर्फ झब्बू यादव के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा सहित 7 लॉ क्रमिनल अमिटमेंट एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। झब्बू के खिलाफ इस मामले में गिरफ्तारी को वारंट जारी हुए थे। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इनको जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में वोट डालने से नहीं रोकने का आदेश जारी किया था।
जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सभी आरोपी सदस्यों को मतदान कराया और बाद में गिरफ्तार कर लिया। पांचों का जिला अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद जेल भेजा गया है। भीमसेन कुशवाहा को जमानत मिल जाने के कारण उसको घर जाने दिया।
मतदान के दौरान रोके रखे जिला पंचायत सदस्य
सपा एमएलसी डॉ. दिलीप यादव ने कहा कि मतदान के लिए पार्टी की ओर से 19 जिला पंचायत सदस्यों को अंदर भेजा था, लेकिन जिना छह सदस्यों के खिलाफ फर्जी मुकदमों में वारंट जारी हुए थे, उनको पुलिस प्रशासन ने अंदर रोके रखा था।