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आगरा: वायु प्रदूषण तय करेगा दिवाली पर ताजनगरी में आतिशबाजी, लाइसेंस नहीं होंगे जारी

Wed, 27 Oct 2021 11:55 AM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 27 Oct 2021 11:55 AM IST
सार

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी आरबी लाल के मुताबिक इन्हें पारंपरिक  पटाखों के विकल्प के रूप में खोजा गया है। उन्होंने बताया कि आगरा व आसपास क्षेत्रों में ग्रीन पटाखों का निर्माण नहीं होता है। 

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Firecrackers depends of air quality index
पटाखे - फोटो : self

विस्तार

दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी शहर के वायु प्रदूषण (वायु गुणवत्ता सूचकांक) पर निर्भर है। जिन शहरों में एक्यूआई स्तर 300 से अधिक है एनजीटी ने वहां पटाखों की बिक्री व इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। एक्यूआई 200 से कम होने पर दो घंटे के लिए ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है। जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह का कहना है कि अभी एक्यूआई पर नजर रखी जा रही है। चार-पांच दिन स्थिति का आकलन करने के बाद निर्णय किया जाएगा।

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जिला प्रशासन के मुताबिक पटाखा बाजार लगाने की अनुमति फिलहाल नहीं है। अगर कोई उल्लंघन करता है तो 25 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। पिछले साल एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने वायु प्रदूषण की खराब स्थिति और पटाखों के प्रदूषण से मरीजों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को देखते हुए खराब एक्यूआई वाले शहरों में पटाखों के इस्तेमाल व बिक्री को प्रतिबंधित कर रखा है। ताजनगरी टीटीजेड (ताज ट्रिपिजयम जोन) में शामिल है। ऐसे में यहां पर्यावरण की स्थिति संवेदनशील है। 
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इस बार जारी नहीं होगा लाइसेंस
आयुध प्रभारी व एडीएम सिटी डॉ. प्रभाकांत अवस्थी का कहना है कि पटाखों की बिक्री के लिए दिया जाने वाला एक दिन का लाइसेंस इस बार जारी नहीं होगा। शहर में 22 से अधिक स्थानों पर पटाखा बाजार भी नहीं लगेंगे। उन्होंने कहा, पटाखों के निर्माण पर रोक नहीं है, परंतु इस्तेमाल व बिक्री प्रतिबंधित है। अवैध रूप से बिक्री करने वाले पटाखा गोदामों को सील किया जाएगा। उनके विरुद्ध मुकदमा व जुर्माना होगा। उन्हें आयुध निर्माण के लिए मिले लाइसेंस भी निरस्त किए जा सकते हैं।
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50 प्रतिशत कम प्रदूषण होता है ग्रीन पटाखों से
ग्रीन पटाखे देखने में सामान्य पटाखों की तरह होते हैं, परंतु इन्हें जलाने पर 50 प्रतिशत वायु प्रदूषण कम होता है। नाइट्रोजन व सल्फर जैसी हानिकारक गैसें कम निकलती हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी आरबी लाल के मुताबिक इन्हें पारंपरिक पटाखों के विकल्प के रूप में खोजा गया है। उन्होंने बताया कि आगरा व आसपास क्षेत्रों में ग्रीन पटाखों का निर्माण नहीं होता है। 

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