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आगरा में पटाखों पर प्रतिबंध, नहीं लगेगी आतिशबाजी की दुकानें, प्रदूषण बढ़ने पर लिया निर्णय
Tue, 10 Nov 2020 12:12 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 10 Nov 2020 12:12 AM IST
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पटाखों पर प्रतिबंध
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जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने ताजनगरी में 30 नवंबर तक पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। पटाखे बेचे जाएंगे न ही चलाए जाएंगे। आगरा में वायु प्रदूषण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने पर यह आदेश सोमवार से ही तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अगर कोई पटाखे बेचते या चलाते पाया गया तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना शासन से तय होगा। इसके लिए प्रशासन को गाइड लाइन का इंतजार है।
जिलाधिकारी ने बताया कि पटाखे बेचने के जो लाइसेंस जारी किए गए थे, वे स्थगित कर दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश में स्पष्ट है कि आगरा में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक होने पर 9 से 30 नवंबर तक आतिशबाजी बिक्री पर रोक लगाई जाए। शहर में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। कोविड महामारी के प्रभावी रोकथाम में भी वायु प्रदूषण का नियंत्रण जरूरी है। ऐसे में दिवाली पर कोई भी फुटकर व थोक विक्रेता अब पटाखे नहीं बेचेगा।
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जिलाधिकारी ने बताया कि पटाखे बेचने के जो लाइसेंस जारी किए गए थे, वे स्थगित कर दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश में स्पष्ट है कि आगरा में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक होने पर 9 से 30 नवंबर तक आतिशबाजी बिक्री पर रोक लगाई जाए। शहर में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। कोविड महामारी के प्रभावी रोकथाम में भी वायु प्रदूषण का नियंत्रण जरूरी है। ऐसे में दिवाली पर कोई भी फुटकर व थोक विक्रेता अब पटाखे नहीं बेचेगा।
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धौलपुर में 10 हजार जुर्माना व मुकदमा
एक माह पहले ही धौलपुर जिला कलक्टर आरके जेसवाल ने पटाखों के संपूर्ण प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया था। यहां पटाखा जलाते हुए पकड़े जाने पर मौके पर ही 10 हजार रुपये जुर्माना और पर्यावरण एवं महामारी एक्ट में मुकदमे का प्रावधान है। एनजीटी के आदेश के बाद राजस्थान के अलावा हरियाणा व दिल्ली में भी इस बार पूर्ण प्रतिबंध लागू हो चुका है।
पिछले साल पटाखों के धुएं से 15 हजार लोग पड़े थे बीमार
दिवाली के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में पिछले साल दस दिनों में लगभग 15 हजार मरीज पहुंचे। इन सबको पटाखों के धुएं के कारण बढ़े प्रदूषण से सांस लेने में तकलीफ हुई। दस से ज्यादा लोगों को अस्थमा का अटैक भी पड़ा था। यह हाल तब था जबकि वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के करीब था। अब तो दिवाली से पहले ही 500 के करीब पहुंच चुका है।
एक माह पहले ही धौलपुर जिला कलक्टर आरके जेसवाल ने पटाखों के संपूर्ण प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया था। यहां पटाखा जलाते हुए पकड़े जाने पर मौके पर ही 10 हजार रुपये जुर्माना और पर्यावरण एवं महामारी एक्ट में मुकदमे का प्रावधान है। एनजीटी के आदेश के बाद राजस्थान के अलावा हरियाणा व दिल्ली में भी इस बार पूर्ण प्रतिबंध लागू हो चुका है।
पिछले साल पटाखों के धुएं से 15 हजार लोग पड़े थे बीमार
दिवाली के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में पिछले साल दस दिनों में लगभग 15 हजार मरीज पहुंचे। इन सबको पटाखों के धुएं के कारण बढ़े प्रदूषण से सांस लेने में तकलीफ हुई। दस से ज्यादा लोगों को अस्थमा का अटैक भी पड़ा था। यह हाल तब था जबकि वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के करीब था। अब तो दिवाली से पहले ही 500 के करीब पहुंच चुका है।