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विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री लगाने पर 15 हजार रुपये जुर्माना, दलालों के जाल में फंसी सहायक अध्यापिका

Fri, 18 Dec 2020 08:16 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 18 Dec 2020 08:16 AM IST
सार

  • विश्वविद्यालय के दलालों के जाल में फंस गई
  • पहले तो उसे बीएड 2007 की फर्जी डिग्री बनाकर दे दी गई
  • उसका एक बार फर्जी सत्यापन भी भेज दिया गया था
  • दोबारा सत्यापन भेजे जाने पर मामला पकड़ में आया।

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Fake Bed Degree Fine Against Government Teacher
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री लगाने पर वादी पर हाईकोर्ट ने 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एक माह के अंदर धनराशि विश्वविद्यालय के कुलसचिव के खाते में जमा करने का आदेश दिया है।
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बस्ती मंडल के माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात रीना की बीएड 2007 की डिग्री बस्ती के मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक ने सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय को भेजी थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के बाद डिग्री को फर्जी बताया। उसका सत्यापन करने से मना कर दिया। इसके बाद रीना ने अपनी डिग्री को सही बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। प्रकरण में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार ने आठ दिसंबर को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से काउंटर दाखिल किया। इसमें डिग्री को फर्जी बताया गया।
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परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि वादी ने अपना रोलनंबर 7189189 दर्शाया है। विश्वविद्यालय में हाईकोर्ट में रिकॉर्ड प्रस्तुत किया, उसके अनुसार आखिरी रोलनंबर 7189187 तक ही है। जो कि एमडी कॉलेज, बाईपास रोड के छात्र का था। वादी खुद के विश्वविद्यालय की छात्रा होने के साक्ष्य नहीं दे पाई।
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दलालों के जाल में फंसी छात्रा
विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी करने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। रीना विश्वविद्यालय के दलालों के जाल में फंस गई। पहले तो उसे बीएड 2007 की फर्जी डिग्री बनाकर दे दी गई। इसके बाद उसका एक बार फर्जी सत्यापन भी भेज दिया गया था। दोबारा सत्यापन भेजे जाने पर मामला पकड़ में आया।

जेडी बरेली को भी शिक्षक की फर्जी सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई
मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) बरेली की ओर से 22 जून 2020 को एक शिक्षक के प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय को भेजे गए थे। 23 सितंबर को जेडी कार्यालय को सत्यापन रिपोर्ट मिली। उन्होंने विश्वविद्यालय में उसके बारे में पता किया तो अधिकारियों ने बताया कि सत्यापन रिपोर्ट फर्जी है। क्योंकि, जिस प्रारूप पर रिपोर्ट भेजी गई थी, वह विश्वविद्यालय का नहीं था। हालांकि जेडी की ओर से भेजे गए पत्र के पत्रांक का भी हवाला दिया गया था। प्रकरण में अभी सही सत्यापन रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नहीं भेजी जा सकी है।
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