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बाह्य संपन्नता पैदा करती है दुख और अशांति : अमर साहेब
Sun, 27 Aug 2023 11:16 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 27 Aug 2023 11:16 PM IST
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मैनपुरी। शहर के कचहरी रोड स्थित कबीर आश्रम में रविवार को सत्संग का आयोजन हुआ। महंत अमर साहेब ने कहा कि बाह्य संपन्नता दुख और अशांति पैदा करती है। महंत ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में यदि मानव विकास चाहता है तो उसे अंदर की पात्रता पर ध्यान देना होगा।
महंत ने कहा कि मानव किसी भी क्षेत्र में विकास चाहता है तो उसके अंदर उस विकास के लिए पात्रता जरूरी है। जिस प्रकार से खेत में बीज डालने से पहले हमें खेत की उर्बरा शक्ति पर ध्यान देना होता है। उसी प्रकार से मानव जीवन के कल्याण के लिए मानव को अपने हृदय की पात्रता पर ध्यान देना होगा। मनुष्य शरीर मिल जाने के बाद मानव को ये देखना होगा कि क्या वह अपने पिता के लिए सुपुत्र है, पत्नी के लिए अच्छा पति और पति के लिए अच्छी पत्नी की पात्रता रखता है। मानव को अपनी पात्रता के लिए अपने कर्तव्य का पालन करना होगा।
महंत ने कहा कि पात्रता के साथ योग्यता हो तो अधिकार अपने आप प्राप्त हो जाता है। इसलिए सद्गुरु कबीर जगाते हुए कहते हैं कि झूठे सुख को सुख कहे मानत है मन मोद। वाह्य सुख झूठा सुख है यह बहुत दिन तक चलने वाला नहीं है। इसलिए आंतरिक सुख पर ध्यान देना होगा और वह आंतरिक सुख तब ही मिल सकता है जब हम अंदर से किसी भी क्षेत्र के लिए पात्र होंगे।
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महंत ने कहा कि मानव किसी भी क्षेत्र में विकास चाहता है तो उसके अंदर उस विकास के लिए पात्रता जरूरी है। जिस प्रकार से खेत में बीज डालने से पहले हमें खेत की उर्बरा शक्ति पर ध्यान देना होता है। उसी प्रकार से मानव जीवन के कल्याण के लिए मानव को अपने हृदय की पात्रता पर ध्यान देना होगा। मनुष्य शरीर मिल जाने के बाद मानव को ये देखना होगा कि क्या वह अपने पिता के लिए सुपुत्र है, पत्नी के लिए अच्छा पति और पति के लिए अच्छी पत्नी की पात्रता रखता है। मानव को अपनी पात्रता के लिए अपने कर्तव्य का पालन करना होगा।
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महंत ने कहा कि पात्रता के साथ योग्यता हो तो अधिकार अपने आप प्राप्त हो जाता है। इसलिए सद्गुरु कबीर जगाते हुए कहते हैं कि झूठे सुख को सुख कहे मानत है मन मोद। वाह्य सुख झूठा सुख है यह बहुत दिन तक चलने वाला नहीं है। इसलिए आंतरिक सुख पर ध्यान देना होगा और वह आंतरिक सुख तब ही मिल सकता है जब हम अंदर से किसी भी क्षेत्र के लिए पात्र होंगे।
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