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UP: अमेरिकी टैरिफ कम होने से कितना हुआ फायदा? हैंडीक्राफ्ट और कांच उद्यमियों की हो गई चांदी-चांदी
Thu, 05 Feb 2026 12:38 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 05 Feb 2026 12:38 PM IST
सार
अमेरिका द्वारा टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किए जाने से आगरा के हैंडीक्राफ्ट और फिरोजाबाद के कांच उद्योग के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। टैरिफ कटौती से निर्यात बढ़ने, कारोबार में तेजी और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
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हैंडीक्राफ्ट
- फोटो : संवाद
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विस्तार
अमेरिका की टैरिफ में कमी की घोषणा से हैंडीक्राफ्ट और कांच उद्योग को फिर से पंख लगेंगे। 50 फीसदी टैरिफ से निर्यात आधे से भी कम रह गया था। ऐसे में उद्यमियों को दोगुना निर्यात होने की उम्मीद बंध गई है। इससे कारोबार और रोजगार भी बढ़ेगा।
हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव विप्नेश त्यागी ने बताया कि मार्बल हैंडीक्राफ्ट का करीब 80 फीसदी अमेरिका में ही निर्यात होता है। 50 फीसदी टैरिफ से पहले आगरा से करीब 1500 करोड़ रुपये का निर्यात होता था। बढ़े टैरिफ के कारण ये निर्यात 40-50 फीसदी रह गया था। अब 18 फीसदी टैरिफ होने से उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी। उत्पाद बढ़ने के साथ कारीगरों के लिए भी कार्य बढ़ जाएगा। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने बताया कि मार्बल हैंडीक्राफ्ट का सीजन शुरू होने वाला है। नोएडा में इंटरनेशनल मेला लगेगा। ऐसे में टैरिफ 18 फीसदी होने से पहले की तरह निर्यात की उम्मीद है। 50 फीसदी टैरिफ से निर्यात घटने से उत्पादों का निर्माण भी कम हो गया था। इससे कारीगर भी प्रभावित थे।
टैरिफ घटने से तेजी से बढ़ेगा कांच के उत्पादों का निर्यात
ग्लास मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि फिरोजाबाद से कांच के उत्पादों का साल भर पहले तक 500-800 करोड़ रुपये तक निर्यात होता था। 70-80 फीसदी अमेरिका में ही निर्यात होता था। टैरिफ से उत्पाद महंगे होने से कारोबार तेजी से घटा। 18 फीसदी टैरिफ होने से वर्तमान निर्यात दोगुना होने की उम्मीद है।
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छोटी निर्माता इकाइयां फिर से होंगी संचालित
कांच उत्पाद निर्यातक बिन्नी मित्तल ने बताया कि टैरिफ 50 फीसदी होने से छोटे निर्यातकों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी थी। कई इकाइयां बंदी की कगार पर पहुंच गईं। कारीगरों की छंटनी तक करनी पड़ी थी। टैरिफ 18 फीसदी होने से छोटे निर्यातकों को राहत मिलेगी। निर्यात बढ़ने से इकाइयां फिर से संचालित होने लगेंगी।
ये उत्पाद होते हैं निर्यात:
मार्बल हैंडीक्राफ्ट में सजावटी सामान, फर्नीचर, क्रॉकरी, कैंडल स्टैंड, शतरंज समेत अन्य सामग्री हैं। कांच के उत्पादों की बात करें तो इसमें भी सजावटी सामान प्रमुख है। कैंडल स्टैंड, क्रॉकरी, फ्लॉवर पॉट निर्यात होते हैं।
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हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव विप्नेश त्यागी ने बताया कि मार्बल हैंडीक्राफ्ट का करीब 80 फीसदी अमेरिका में ही निर्यात होता है। 50 फीसदी टैरिफ से पहले आगरा से करीब 1500 करोड़ रुपये का निर्यात होता था। बढ़े टैरिफ के कारण ये निर्यात 40-50 फीसदी रह गया था। अब 18 फीसदी टैरिफ होने से उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी। उत्पाद बढ़ने के साथ कारीगरों के लिए भी कार्य बढ़ जाएगा। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने बताया कि मार्बल हैंडीक्राफ्ट का सीजन शुरू होने वाला है। नोएडा में इंटरनेशनल मेला लगेगा। ऐसे में टैरिफ 18 फीसदी होने से पहले की तरह निर्यात की उम्मीद है। 50 फीसदी टैरिफ से निर्यात घटने से उत्पादों का निर्माण भी कम हो गया था। इससे कारीगर भी प्रभावित थे।
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टैरिफ घटने से तेजी से बढ़ेगा कांच के उत्पादों का निर्यात
ग्लास मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि फिरोजाबाद से कांच के उत्पादों का साल भर पहले तक 500-800 करोड़ रुपये तक निर्यात होता था। 70-80 फीसदी अमेरिका में ही निर्यात होता था। टैरिफ से उत्पाद महंगे होने से कारोबार तेजी से घटा। 18 फीसदी टैरिफ होने से वर्तमान निर्यात दोगुना होने की उम्मीद है।
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छोटी निर्माता इकाइयां फिर से होंगी संचालित
कांच उत्पाद निर्यातक बिन्नी मित्तल ने बताया कि टैरिफ 50 फीसदी होने से छोटे निर्यातकों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी थी। कई इकाइयां बंदी की कगार पर पहुंच गईं। कारीगरों की छंटनी तक करनी पड़ी थी। टैरिफ 18 फीसदी होने से छोटे निर्यातकों को राहत मिलेगी। निर्यात बढ़ने से इकाइयां फिर से संचालित होने लगेंगी।
ये उत्पाद होते हैं निर्यात:
मार्बल हैंडीक्राफ्ट में सजावटी सामान, फर्नीचर, क्रॉकरी, कैंडल स्टैंड, शतरंज समेत अन्य सामग्री हैं। कांच के उत्पादों की बात करें तो इसमें भी सजावटी सामान प्रमुख है। कैंडल स्टैंड, क्रॉकरी, फ्लॉवर पॉट निर्यात होते हैं।