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एनएसयूआई-सछास के 13 छात्र नेताओं के प्रवेश पर पाबंदी, विश्वविद्यालय ने छात्र होने का मांगा सुबूत
Mon, 13 Jan 2020 10:04 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 13 Jan 2020 10:04 AM IST
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विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन (11 जनवरी की तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर में 13 छात्र नेताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के आठ और समाजवादी छात्र सभा (सछास) के पांच छात्र नेता हैं।
इनमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कोई छात्र नेता शामिल न होने पर इन दोनों छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्र नेताओं को छात्र मानने से ही इंकार कर दिया है। अफसरों का कहना है कि अगर ये छात्र हैं तो दफ्तर में इसके साक्ष्य दें।
शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में एबीवीपी और एनएसयूआई-सछास के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए थे। मामला बढ़ने पर पुलिस ने लाठियां भांजते हुए भगाया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने रविवार को छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष समेत 13 छात्र नेताओं की सूची जारी करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है।
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इनमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कोई छात्र नेता शामिल न होने पर इन दोनों छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्र नेताओं को छात्र मानने से ही इंकार कर दिया है। अफसरों का कहना है कि अगर ये छात्र हैं तो दफ्तर में इसके साक्ष्य दें।
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शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में एबीवीपी और एनएसयूआई-सछास के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए थे। मामला बढ़ने पर पुलिस ने लाठियां भांजते हुए भगाया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने रविवार को छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष समेत 13 छात्र नेताओं की सूची जारी करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है।
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इन पर लगाया है प्रतिबंध
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्र संघ के एनएसयूआई प्रदेश महासचिव एवं पूर्व अध्यक्ष गौरव शर्मा, एनएसयूआई प्रदेश सचिव सतीश सिकरवार, प्रदेश संयोजक एनएसयूआई अंकुश गौतम, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष बिलाल अहमद, एनएसयूआई अपूर्व शर्मा, ललित त्यागी, कार्यकर्ता हर्ष उपाध्याय, आशीष कुमार प्रिंस और समाजवादी छात्र सभा के जिला महासचिव रवि यादव, कार्यकर्ता प्रभाकर जादौन, राजन ठाकुर, अमित प्रताप यादव और जयंत यादव हैं।
विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर डॉ मनोज श्रीवास्त ने कहा कि छात्र संगठन देखकर पाबंदी नहीं लगाई है। यह कई सालों से पूरे दिन विश्वविद्यालय में रहकर अराजकता फैलाते हैं। इनमें से अगर कोई छात्र है तो वो सात दिन में प्रोक्टोरियल बोर्ड में प्रमाण पत्र उपलब्ध करासकते हैं।
विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर डॉ मनोज श्रीवास्त ने कहा कि छात्र संगठन देखकर पाबंदी नहीं लगाई है। यह कई सालों से पूरे दिन विश्वविद्यालय में रहकर अराजकता फैलाते हैं। इनमें से अगर कोई छात्र है तो वो सात दिन में प्रोक्टोरियल बोर्ड में प्रमाण पत्र उपलब्ध करासकते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन पक्षपात का आरोप
एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव गौरव शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन एकतरफा कार्रवाई की जा रही है, अगर हंगामे के बाद यह सूची बनाई गई तो इसमें एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के नाम क्यों शामिल नहीं किए, यह सरकार के निर्णय के तहत हो रहा है।
सपा छात्रसभा के जिला महासचिव रवि यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार के अधीन कार्य कर रहा है। अगर कार्रवाई करनी थी तीनों संगठनों पर करते। एबीवीपी को भाजपा सरकार के दबाव में बचाया गया है। राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर शिकायत करेंगे।
एबीवीपी के महानगर मंत्री अनंत चौधरी ने कहा कि जेएनयू प्रकरण पर ज्ञापन देकर लौटते वक्त सछास और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने साजिश के तहत विरोध किया। हमारे झंडे छीने, हमला किया। एबीवीपी दूषित छात्र राजनीति नहीं करती है।
सपा छात्रसभा के जिला महासचिव रवि यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार के अधीन कार्य कर रहा है। अगर कार्रवाई करनी थी तीनों संगठनों पर करते। एबीवीपी को भाजपा सरकार के दबाव में बचाया गया है। राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर शिकायत करेंगे।
एबीवीपी के महानगर मंत्री अनंत चौधरी ने कहा कि जेएनयू प्रकरण पर ज्ञापन देकर लौटते वक्त सछास और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने साजिश के तहत विरोध किया। हमारे झंडे छीने, हमला किया। एबीवीपी दूषित छात्र राजनीति नहीं करती है।