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Agra: 'अपना भाई नहीं जाने दूंगा सात समंदर पार', इटली के दंपती को गोद देने की सूचना पर फफक पड़ा बड़ा भाई

Wed, 06 Jul 2022 04:50 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 06 Jul 2022 04:50 PM IST
सार

आगरा में भाई-भाई के प्रेम का अनोख मामला सामने आया है। यहां छोटे भाई को इटली के दंपती द्वारा गोद लेने की सूचना मिली तो बड़ा भाई फफक पड़ा।

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Elder brother cried on the information of Italian couple adopting his brother in Agra
विकास की लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रार्थी दत्तक ग्रहण देयता का प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाता है। उनके गोद दिए जाने की अनुमति दी जाती है। 31 अगस्त सन 2021 को आगरा के पारिवारिक न्यायालय का यह आदेश जब बेंगलुरु में एनजीओ में काम कर रहे भाई के कान तक पहुंचा, तो भाई के पैर के नीचे से जमीन खिसक गई। छोटे भाई सोम (काल्पनिक नाम) को सात समंदर पार जाने से रोकने के लिए बड़ा भाई विकास अपना पक्ष रखने के लिए सोमवार को पारिवारिक न्यायालय की शरण में आपत्ति दर्ज कराने पहुंचा। 

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विकास का कहना है कि पारिवारिक न्यायालय के उस आदेश से मुझे राहत मिलने की उम्मीद जगी, जिसमें आगे लिखा था कि धारा 38 की मंशा यह है कि यदि बालक का कोई परिजन, सगा संबंधी आपत्ति प्रस्तुत कराना चाहता है, तो वह कर सकता है। इसलिए मैंने कोर्ट में अपनी आपत्ति लगाई है।

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इटली की दंपती ले रहे गोद

सोम को इटली की दंपती गियम्बाटिटस्टा माफिनी पोनलियो और इलीवा गेरोल्डी गोद लेना चाहते हैं। बच्चे को गोद देने की प्रक्रिया को हरी झंड़ी दिखा दी गई। इसके बाद गोद देने की प्रक्रिया के तहत ही मामला अंतिम पड़ाव में पारिवारिक न्यायालय पहुंचा। यहां न्यायालय ने इटली की दंपती को सोम को गोद देने के आदेश कर दिए।  

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भाई को ढूंढने गया था, वहीं बैठा लिया

विकास का दावा है 24 फरवरी 2012 को उसके भाई सोम को चाइल्डलाइन ने बाल कल्याण में पेश किया था। उस समय सोम को ढूंढ़ते हुए मैं उसे लेने वहां पहुंचा तो, राजकीय बाल शिशु गृह में मुझे भी बैठा लिया गया। विकास बताता है कि चाइल्ड लाइन ने भिक्षा मांगते हुए पकड़ा था। जबकि उसकी उम्र इतनी छोटी थी कि वो भीख नहीं मांग सकता था। 

अपने भाई से मिलने आता रहा है विकास : नरेश पारस 

विकास की लड़ाई लड़ रहे समाजसेवी नरेश पारस बताते हैं कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी)की बैठक में सोम भी यह कह चुका है कि विकास उसका भाई है। इसके साथ ही समय-समय पर बंगलूरू से आकर राजकीय बाल शिशु गृह में भी विकास अपने भाई सोम से मिलता रहा है। पारस का कहना है कि कई बार विकास ने विभागों को भी पत्र लिखे। इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अदालत के फैसले के बाद उसे लगा कि अब उसका पक्ष भी अदालत सुनेगी।

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