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बीटेक से महंगी नर्सरी की पढ़ाई
बीटेक से महंगी नर्सरी की पढ़ाई
Updated Mon, 03 Apr 2017 12:18 AM IST
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बीटेक से महंगी नर्सरी की पढ़ाई
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के पब्लिक और कान्वेंट स्कूलों में केजी-नर्सरी की पढ़ाई वर्तमान में बीटेक से भी महंगी है। केजी और नर्सरी में पढ़ाने पर अभिभावकों को सालाना 35 हजार से लेकर 1.10 लाख तक खर्च करने पड़ते हैं। इन कक्षाआें में सरकार की ओर से किसी तरह की छात्रवृत्ति नहीं दी जाती है।
वर्तमान में अधिकतर अभिभावक जोड़-तोड़कर बच्चाें को पब्लिक और कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। स्कूल इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। प्रति वर्ष फीस बढ़ाई जा रही है। अभिभावकों को चिह्नित प्रकाशकों की महंगी किताबें और तय दुकानाें से यूनिफार्म खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। यह भी नहीं, अभिभावक किसी स्कूल में बच्चे का एक बार दाखिला करा दें और आगे की कक्षाआें में कुछ सहूलियत मिल जाए। एक ही स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियाें से प्रत्येक कक्षा में प्रवेश लेने पर शुल्क लिया जा रहा है। जबकि प्रवेश शुल्क एक बार ही लिया जाना चाहिए।
तीन कैटेगरी के स्कूलाें की फीस
स्कूल पब्लिक कान्वेंट ब्रांडेड/इंटरनेशनल
एडमिशन फीस 15000-20000 25000-30000 50000-80000
किताबें-कापी 1800-2000 2800-3000 4000-4500
यूनिफार्म 4000-4200 4800-5000 7000-8000
वाहन भाड़ा 12000 12000 12000-15000
नोट: इसके अलावा भी बच्चाें की एक्टिविटी आदि के नाम पर रुपये खर्च होते हैं।
फीस के नाम पर स्कूलों की अलग राह
फीस के संबंध में शैक्षणिक सत्र 2016-17 के शुरुआत से पूर्व अप्सा के सदस्य स्कूलों की बैठक हुई थी। इसमें सुविधाओं के आधार पर पांच से सात फीसदी फीस बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। कई स्कूलों ने इसका पालन नहीं किया। कई स्कूलों ने 15 से 20 फीसदी तक फीस बढ़ा दी थी। इसको देखते हुए चालू सत्र में फीस के संबंध में अप्सा की बैठक ही नहीं हुई।
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फीस के मुद्दे पर सदस्य स्कूलाें में आम सहमति नहीं बन पा रही है। इसलिए चालू सत्र में फीस वृद्धि के संबंध में बैठक नहीं बुलाई गई। स्कूलों ने अपनी सुविधाआें के अनुसार फीस बढ़ाई है।
-संजय तोमर, अध्यक्ष, अप्सा
आज से खुल जाएंगे अधिकतर स्कूल
परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय एक अप्रैल से ही खुल गए। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल तीन अप्रैल (आज) से खुल रहे हैं। इसी के साथ फीस बुक उपलब्ध कराई जाएगी।
पहले 16000 फिर 26000 की स्लिप
वजीरपुरा स्थित एक कान्वेंट स्कूल ने एक छात्रा को पहले करीब 16000 रुपये की स्लिप दी। बाद में 26000 रुपये की स्लिप पकड़ा दी। 10 हजार रुपये एडमिशन फीस के नाम पर बढ़ा दिए। जबकि छात्रा पहले से उसी स्कूल में पढ़ रही है।
स्टेशनरी का पक्का बिल नहीं दिया तो होगी कार्रवाई
आगरा। वाणिज्य कर विभाग ने निर्देश दिए हैं कि बुक सेलर स्टेशनरी की बिक्री का पक्का बिल अवश्य दें। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ टैक्स चोरी की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह कदम अभिभावकों की शिकायत पर उठाया है।कई अभिभावकों ने विभाग को लिखित शिकायती पत्र दिए हैं। इनमें कहा गया है कि स्कूलों से लेकर बुक सेलर तक मनमानी कर रहे हैं। स्कूलों से किताबों की लिस्ट नहीं, बुक सेलर की दुकान की पर्ची थमाई जा रही है। बुक सेलर किताब और कापियों के बिल नहीं दे रहे।
एक कागज पर पूरा हिसाब लिखकर दे देते हैं। कई तो कच्ची पेसिंल से लिख रहे हैं। इसके अलावा कई ने कंप्यूटर से प्रिंट निकलवा रखे हैं। इनमें दुकान का नाम है और न ही दुकानदार का।
इस पर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर ग्रेड वन पीके सिंह का कहना है कि किताबों पर टैक्स नहीं है लेकिन कॉपियों, बैग और अन्य स्टेशनरी पर कर है। इनका पक्का बिल दिया जाना अनिवार्य है। अगर यह नहीं दिया जा रहा है तो टैक्स चोरी का मामला बन सकता है।
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वर्तमान में अधिकतर अभिभावक जोड़-तोड़कर बच्चाें को पब्लिक और कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। स्कूल इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। प्रति वर्ष फीस बढ़ाई जा रही है। अभिभावकों को चिह्नित प्रकाशकों की महंगी किताबें और तय दुकानाें से यूनिफार्म खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। यह भी नहीं, अभिभावक किसी स्कूल में बच्चे का एक बार दाखिला करा दें और आगे की कक्षाआें में कुछ सहूलियत मिल जाए। एक ही स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियाें से प्रत्येक कक्षा में प्रवेश लेने पर शुल्क लिया जा रहा है। जबकि प्रवेश शुल्क एक बार ही लिया जाना चाहिए।
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तीन कैटेगरी के स्कूलाें की फीस
स्कूल पब्लिक कान्वेंट ब्रांडेड/इंटरनेशनल
एडमिशन फीस 15000-20000 25000-30000 50000-80000
किताबें-कापी 1800-2000 2800-3000 4000-4500
यूनिफार्म 4000-4200 4800-5000 7000-8000
वाहन भाड़ा 12000 12000 12000-15000
नोट: इसके अलावा भी बच्चाें की एक्टिविटी आदि के नाम पर रुपये खर्च होते हैं।
फीस के नाम पर स्कूलों की अलग राह
फीस के संबंध में शैक्षणिक सत्र 2016-17 के शुरुआत से पूर्व अप्सा के सदस्य स्कूलों की बैठक हुई थी। इसमें सुविधाओं के आधार पर पांच से सात फीसदी फीस बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। कई स्कूलों ने इसका पालन नहीं किया। कई स्कूलों ने 15 से 20 फीसदी तक फीस बढ़ा दी थी। इसको देखते हुए चालू सत्र में फीस के संबंध में अप्सा की बैठक ही नहीं हुई।
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फीस के मुद्दे पर सदस्य स्कूलाें में आम सहमति नहीं बन पा रही है। इसलिए चालू सत्र में फीस वृद्धि के संबंध में बैठक नहीं बुलाई गई। स्कूलों ने अपनी सुविधाआें के अनुसार फीस बढ़ाई है।
-संजय तोमर, अध्यक्ष, अप्सा
आज से खुल जाएंगे अधिकतर स्कूल
परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय एक अप्रैल से ही खुल गए। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल तीन अप्रैल (आज) से खुल रहे हैं। इसी के साथ फीस बुक उपलब्ध कराई जाएगी।
पहले 16000 फिर 26000 की स्लिप
वजीरपुरा स्थित एक कान्वेंट स्कूल ने एक छात्रा को पहले करीब 16000 रुपये की स्लिप दी। बाद में 26000 रुपये की स्लिप पकड़ा दी। 10 हजार रुपये एडमिशन फीस के नाम पर बढ़ा दिए। जबकि छात्रा पहले से उसी स्कूल में पढ़ रही है।
स्टेशनरी का पक्का बिल नहीं दिया तो होगी कार्रवाई
आगरा। वाणिज्य कर विभाग ने निर्देश दिए हैं कि बुक सेलर स्टेशनरी की बिक्री का पक्का बिल अवश्य दें। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ टैक्स चोरी की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह कदम अभिभावकों की शिकायत पर उठाया है।कई अभिभावकों ने विभाग को लिखित शिकायती पत्र दिए हैं। इनमें कहा गया है कि स्कूलों से लेकर बुक सेलर तक मनमानी कर रहे हैं। स्कूलों से किताबों की लिस्ट नहीं, बुक सेलर की दुकान की पर्ची थमाई जा रही है। बुक सेलर किताब और कापियों के बिल नहीं दे रहे।
एक कागज पर पूरा हिसाब लिखकर दे देते हैं। कई तो कच्ची पेसिंल से लिख रहे हैं। इसके अलावा कई ने कंप्यूटर से प्रिंट निकलवा रखे हैं। इनमें दुकान का नाम है और न ही दुकानदार का।
इस पर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर ग्रेड वन पीके सिंह का कहना है कि किताबों पर टैक्स नहीं है लेकिन कॉपियों, बैग और अन्य स्टेशनरी पर कर है। इनका पक्का बिल दिया जाना अनिवार्य है। अगर यह नहीं दिया जा रहा है तो टैक्स चोरी का मामला बन सकता है।