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रासायनिक खाद बिगाड़ रही मिट्टी की सेहत: 'सावधान नहीं हुए तो कृषि भूमि हो जाएगी बंजर', जानें बचाव के गुर

Sat, 06 May 2023 12:52 PM IST
भूपेन्द्र सिंह देवेश शर्मा, आगरा
देवेश शर्मा, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sat, 06 May 2023 12:52 PM IST
सार

रासायनिक खाद का अधिक उपयोग आपके खेत की मिट्टी की सेहत बिगाड़ रही है। वैज्ञानिक ने कहा कि यदि लोग अभी सावधान नहीं हुए तो कृषि भूमि हो बंजर जाएगी। उन्होंने इससे बचाव के गुर भी बताए हैं। 

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Due to excessive use of chemical fertilizers in Agra land is moving towards becoming barren
Agra News: रासायनिक खाद बिगाड़ रही मिट्टी की सेहत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर आप किसान हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश के आगरा में रासायनिक खादों के अंधाधुध प्रयोग से धरती की कोख बंजर होने की तरफ बढ़ रही है। हाल ही में कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में हुए मृदा परीक्षण में इसकी पुष्टी हुई है। अगर सुधार के प्रयास नहीं किए गए तो स्थिति भयावह हो सकती है।

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आरबीएस कॉलेज कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा विशेषज्ञ डॉ संदीप सिंह ने बताया कि केवीके पर 6 अक्टूबर 2012 को मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला खुली थी। उस समय आगरा की मृदा का पीएच मान 7.6 से 8.0 था जबकि अच्छी मृदा का पीएच 7 से 7.5 होना चाहिए। केंद्र पर गत वर्ष 1200 मृदा परीक्षण किए गए थे। इसमें मृदा का पीएच 8.2 से 8.6 था। अप्रैल माह में केंद्र पर लगभग 500 नमूनों की जांच की गई है। जिनमें मृदा का पीएच मान 8.2 से लेकर 8.7 आया है।

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असंतुलित खाद का उपयोग मिटृी की दशा खराब कर रही

डॉ संदीप ने कहा है कि कार्बनिक खादों का प्रयोग नहीं करने से पीएच बढ़ रही है। वहीं अत्याधिक रसायनिक एवं असंतुलित खाद के उपयोग से मिटृी की दशा खराब हो रही है। मृदा में पीएच मान एवं विद्युत चालकता बढ़ रही है। कार्बनिक पर्दाथों की मात्रा कम हो रही है। जिंक और बोरोन की भी कमी आई है। मिटृी में नमक की मात्रा बढ़ती है और पोषक तत्वों की कमी होती है उसे पीएच मान कहते हैं। 

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बताया कि इसे मिट्टी का बुखार भी कह सकते हैं। पीएच मान बढ़ने से मिटृी अधिक चिकनी और कठोर हो जाती है तथा पानी सोखने की क्षमता कम हो जाती है। पौधों की पोषक तत्व लेने की शक्ति कम हो जाती है एवं उनकी ग्रोथ रुक जाती है। इससे उपज लगातार कम हो रही है।

ये क्षेत्र हैं प्रभावित

इन क्षेत्रों की मृदा की हुई जांच ब्लांक बिचपुरी, बरौली अहीर, अकोला, बाह, फतेहाबाद, पिनाहट, सैंया, शमशाबाद, खेरागढ़, जगनेर, रूनकता, खंदौली, एत्मादपुर, फतेहपुर सीकरी, अछनेरा की मृदा की जांच में पाया गया है कि मिट्टी में दिन व दिन जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो रही है।

संपूर्ण भूमि दस वर्षों में हो जाएगी ऊसर

उन्होंने कहा कि ब्लॉक फतेहपुर सीकरी के गांव जाजऊ, सरसा, अरहैरा के क्षेत्र में कुछ जमीन ऊसर हो गई है। वहां पर फसल नहीं हो रही है। वहीं ब्लाॅक अछनेरा के कुछ गांवों में भी स्थिति बेहद खराब है। डॉ संदीप ने बताया कि अगर यही स्थिति रही तो आगामी 10 से 15 वर्षों में आगरा की 3,50,000 हेक्टेयर संपूर्ण कृषि भूमि ऊसर (बंजर) हो जाएगी। इसलिए किसानों को इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

हरी खाद व कार्बनिक खाद से होगा लाभ

बताया कि ऐसी स्थिति में किसानों को खेत में हरी व कार्बनिक खाद का प्रयोग करना चाहिए। किसान हरी खाद में खेत में ढेचा व सनई उगाकर उसे पलट सकते हैं। वहीं कार्बनिक खाद में सड़ा गोबर एवं वर्मी कंपोस्ट भी खेत में डाल सकते हैं। ऐसा करने से मिट्टी की सेहत में सुधार होगा और मृदा का पीएच नहीं बढ़ेगा। मिट्टी की जांच कराना जरूरी है। 

मिट्टी जांच के लगते हैं केवल 10 रुपये 

बताया कि मिट्टी की सेहत में सुधार के लिए मृदा परीक्षण कराना बेहद जरूरी है। मृदा की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्बनिक एवं रसायनिक खादों का प्रयोग करना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र पर एक सैंपल मिट्टी जांच के 10 रुपये लगते हैं। 15 दिन बाद जांच रिपोर्ट आती है। वहीं वैज्ञानिकों ने बताया है कि केंद्र पर महिलाओं के लिए मृदा की जांच निशुल्क की जाती है।

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