{"_id":"5e2424d88ebc3e4b3e3e85a8","slug":"doctor-advice-take-special-care-of-children-in-winter","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ठंड कर रही है बेहाल, नौनिहालों का रखें खास ख्याल, बरतें ये सावधानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंड कर रही है बेहाल, नौनिहालों का रखें खास ख्याल, बरतें ये सावधानी
Sun, 19 Jan 2020 03:13 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 19 Jan 2020 03:13 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्दी से बच्चों का बुरा हाल है, पारा कम होने से कोल्ड इंजरी और निमोनिया के मरीज बढ़ गए हैं। हाथ-पैरों की अंगुलियों में सूजन के साथ दर्द भी हो रहा है। ऐसे में इलाज के साथ चिकित्सक अभिभावकों को बच्चों को सर्दी से बचाव पर जोर दे रहे हैं।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग और निजी बाल रोग विशेषज्ञों के पास कुल ओपीडी में से आठ से दस फीसदी को कोल्ड इंजरी की शिकायत है।
इंडियन पीडियाट्रिक एसोसिएशन के सचिव डॉ. अरुण जैन ने बताया कि शरीर का तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस होता है, लेकिन लगातार सर्दी में रहने से यह तापमान 35 डिग्री सेल्सियस हो जाता है।इससे कोल्ड इंजरी होती है, इसमें शिशु के हाथ-पैर सफेद हो जाते हैं, रक्त का संचार भी प्रभावित होता है। धड़कन कम हो जाती है, इलाज में देरी होने पर मौत भी संभव है।
विज्ञापन
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग और निजी बाल रोग विशेषज्ञों के पास कुल ओपीडी में से आठ से दस फीसदी को कोल्ड इंजरी की शिकायत है।
इंडियन पीडियाट्रिक एसोसिएशन के सचिव डॉ. अरुण जैन ने बताया कि शरीर का तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस होता है, लेकिन लगातार सर्दी में रहने से यह तापमान 35 डिग्री सेल्सियस हो जाता है।इससे कोल्ड इंजरी होती है, इसमें शिशु के हाथ-पैर सफेद हो जाते हैं, रक्त का संचार भी प्रभावित होता है। धड़कन कम हो जाती है, इलाज में देरी होने पर मौत भी संभव है।
विज्ञापन
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल चतुर्वेदी ने बताया कि निमोनिया के मरीज सबसे ज्यादा हैं, 15-20 नए मरीज रहते हैं। पसली चलने के साथ इनको सांस लेने में भी परेशानी मिली है।
अभिभावक बरतें ये सावधानी
- बच्चों के गला और कान जरूर ढककर रखें।
- बाहर जाते वक्त जूते और हाथों के जुराब पहनाएं।
- सुबह और शाम को बच्चों को बाहर खेलने से बचाएं।
- अंगुलियां सूजने पर थोड़े समय के लिए हीटर पर हाथ सेंके।
अभिभावक बरतें ये सावधानी
- बच्चों के गला और कान जरूर ढककर रखें।
- बाहर जाते वक्त जूते और हाथों के जुराब पहनाएं।
- सुबह और शाम को बच्चों को बाहर खेलने से बचाएं।
- अंगुलियां सूजने पर थोड़े समय के लिए हीटर पर हाथ सेंके।