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40 घंटे बाद एसएन में ‘डाक्टरी’ शुरू
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 20 Dec 2015 02:18 AM IST
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एसएन मेडिकल कालेज में 40 घंटे बाद चिकित्सकीय सेवाएं बहाल हो सकी हैं। दो जूनियर डाक्टरों से मारपीट का आरोपी शनिवार को पकड़े जाने के बाद डाक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली। इससे पहले उन्हाेंने प्राचार्य को आठ सूत्रीय मांगपत्र भी सौंपा। इसमें डा. आरबी लाल को इमरजेंसी कोआर्डिनेटर के पद से हटाने और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की बात कही। चेतावनी भी दी कि उनकी मांगों पर सात दिन में कार्रवाई न हुई तो वे फिर से हड़ताल पर चले जाएंगे।
बता दें कि गुरुवार की आधी रात को इमरजेंसी में कुछ लोगों ने दो जूनियर डाक्टरों की पिटाई कर दी थी। इससे गुस्साए जूनियर डाक्टर हड़ताल पर चले गए। शुक्रवार को इलाज के अभाव में मरीज तड़पते रहे। इस बीच कमाल खां निवासी महिला शमीम की मौत होने से कालेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। शनिवार की सुबह प्राचार्य ने मौके पर पहुंच ओपीडी खुलवाई। चंद पर्चे भी बने। जानकारी पर जूनियर डाक्टरों ने ओपीडी बंद करा दी और जमकर नारेबाजी की। हड़ताल खत्म न होते देख प्राचार्य ने डाक्टराें को समझाने का जिम्मा विभागाध्यक्षों को सौंपा। लेकिन डाक्टर नहीं माने। आरोपी की गिरफ्तारी और इमरजेंसी चौकी प्रभारी के निलंबन पर अड़े रहे। आरोपी के पकड़े जाने की पुलिस सूचना पर भी उन्होंने भरोसा नहीं किया। आरोपी की शिनाख्त के लिए पुलिस पांच डाक्टरों को थाना कोतवाली लेकर पहुंची। यहां आरोपी को पहचानने के बाद डाक्टरों ने शाम को चार बजे हड़ताल समाप्त कर दी।
40 फीसदी मरीज लौट गए
गुरुवार की रात से ठप चिकित्सकीय सेवाएं देर शाम शुरू हो सकीं। करीब 40 घंटे तक मरीजों को नहीं देखा गया। यहां तक कि गंभीर मरीजों को भी डाक्टर देखने नहीं आए। आरोप है कि कई मरीजों को डाक्टरों ने वार्ड से जबरन डिस्चार्ज कर भगा दिया तो कई इलाज न मिलने पर स्वत: ही चले गए। इस तरह करीब 40 फीसदी मरीज वार्ड छोड़कर चले गए।
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इमरजेंसी में सिर्फ एक मरीज
- हड़ताल के चलते इमरजेंसी के सभी वार्ड खाली हो गए। ट्रामा सेंटर तक खाली पड़ा था। सिर्फ सर्जरी यूनिट में सैफई की शारदा भर्ती थी, तीमारदारों ने बताया कि उसे भी कोई डाक्टर देखने नहीं आया।
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बता दें कि गुरुवार की आधी रात को इमरजेंसी में कुछ लोगों ने दो जूनियर डाक्टरों की पिटाई कर दी थी। इससे गुस्साए जूनियर डाक्टर हड़ताल पर चले गए। शुक्रवार को इलाज के अभाव में मरीज तड़पते रहे। इस बीच कमाल खां निवासी महिला शमीम की मौत होने से कालेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। शनिवार की सुबह प्राचार्य ने मौके पर पहुंच ओपीडी खुलवाई। चंद पर्चे भी बने। जानकारी पर जूनियर डाक्टरों ने ओपीडी बंद करा दी और जमकर नारेबाजी की। हड़ताल खत्म न होते देख प्राचार्य ने डाक्टराें को समझाने का जिम्मा विभागाध्यक्षों को सौंपा। लेकिन डाक्टर नहीं माने। आरोपी की गिरफ्तारी और इमरजेंसी चौकी प्रभारी के निलंबन पर अड़े रहे। आरोपी के पकड़े जाने की पुलिस सूचना पर भी उन्होंने भरोसा नहीं किया। आरोपी की शिनाख्त के लिए पुलिस पांच डाक्टरों को थाना कोतवाली लेकर पहुंची। यहां आरोपी को पहचानने के बाद डाक्टरों ने शाम को चार बजे हड़ताल समाप्त कर दी।
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40 फीसदी मरीज लौट गए
गुरुवार की रात से ठप चिकित्सकीय सेवाएं देर शाम शुरू हो सकीं। करीब 40 घंटे तक मरीजों को नहीं देखा गया। यहां तक कि गंभीर मरीजों को भी डाक्टर देखने नहीं आए। आरोप है कि कई मरीजों को डाक्टरों ने वार्ड से जबरन डिस्चार्ज कर भगा दिया तो कई इलाज न मिलने पर स्वत: ही चले गए। इस तरह करीब 40 फीसदी मरीज वार्ड छोड़कर चले गए।
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इमरजेंसी में सिर्फ एक मरीज
- हड़ताल के चलते इमरजेंसी के सभी वार्ड खाली हो गए। ट्रामा सेंटर तक खाली पड़ा था। सिर्फ सर्जरी यूनिट में सैफई की शारदा भर्ती थी, तीमारदारों ने बताया कि उसे भी कोई डाक्टर देखने नहीं आया।