दवा माफिया से 35 लाख की रिश्वत मांगने की जांच फिर से शुरू, दो अफसरों पर है आरोप
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आगरा के ड्रग विभाग के अधिकारियों द्वारा नकली दवा बनाने वाले माफिया से 35 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले की जांच एक बार फिर से शुरू हो गई है। इस मामले में ड्रग विभाग के बड़े अधिकारियों के भी नाम आए थे। डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट को जांच करते हुए इसकी रिपोर्ट मांगी है।
दवा विक्रेता हरीबाबू ने ड्रग इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा और बृजेश यादव पर 35 लाख रुपये घूस मांगने का आरोप लगाया था। इसमें ड्रग इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा की रुपये मांगने और रुपये देने के लिए स्थान की बातचीत का ऑडियो-वीडियो भी सामने आया था। इस मामले पर तत्कालीन डीएम एनजी रवि कुमार ने ड्रग इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा को प्रथम दृष्टयता दोषी मानते हुए सीडीओ रविंद्र मांदड को जांच सौंपी थी।
जांच सार्वजनिक न करने और आरोपी पर कार्रवाई न होने पर जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने के साथ डीएम कार्यालय से आरटीआई के तहत जांच में क्या हुआ, इसकी जानकारी मांगी थी। इस पर डीएम प्रभु नारायण सिंह ने इस मामले की पूरी रिपोर्ट सिटी मजिस्ट्रेट से तलब की है।
यह था मामला
श्री दीक्षा बांके बिहारी धाम, सिकंदरा निवासी हरीबाबू एसडीजी ड्रग्स फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर है। उसका आरोप है कि तीन फरवरी 2019 को ड्रग इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा और बृजेश यादव आए और धमकाते हुए घर की तलाशी ली, फर्म के कागजात रख लिए और कहा कि 35 लाख का इंतजाम कर लो नहीं तो पुलिस-मजिस्ट्रेट बुलाकर जेल में भिजवा देंगे।
बाद में रुपये मांगने और कहां पैसा लाना है, इसकी चार ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग वायरल हुईं। डीएम-एसएसपी से शिकायत करने पर जांच की गई। इसके अगले दिन ड्रग विभाग ने इसके गोदाम पर छापा मारा, यहां से सीरप फिलिंग मशीन और सीरप की खाली बोतल के अलावा दो लाख की दवाएं जब्त कीं थीं। हरीबाबू को जेल भेज दिया गया था।