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Agra News: टेंडर में गड़बड़ी के मामले में जिलाधिकारी ने तलब की रिपोर्ट
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आगरा। खाद्यान्न परिवहन और हैंडलिंग के टेंडर आवंटन में विभागीय अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत और भ्रष्टाचार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) विजय कुमार के लखनऊ दौरे पर होने से विभागीय अफसरों ने जांच पूरी होने से पहले ही इन संदिग्ध फर्मों से काम शुरू करा दिया है। मामले में अब जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पूरे प्रकरण में रिपोर्ट तलब की है।
बता दें, मैनपुरी के रहने वाले मुख्य आरोपी और ब्लैकलिस्टेड फर्म के संचालक जितेंद्र कुमार गुप्ता की फर्म को पूर्व में खाद्यान्न की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी और आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) के तहत थाना करहल में दर्ज आपराधिक मुकदमे के बाद काली सूची (ब्लैक लिस्ट) में डाला गया था। इसके बावजूद, विभागीय नियमों और शासनादेशों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए जितेंद्र के करीबी रिश्तेदारों के नाम पर कई डमी फर्मों का सिंडिकेट खड़ा कर दिया गया और इनके नाम पर करोड़ों रुपये के टेंडर स्वीकृत करा लिए गए।
अमर उजाला के इस बड़े टेंडर घोटाले का भंडाफोड़ करने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया था। जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ था कि जिन तमाम फर्मों को टेंडर बांटे गए हैं, उन सबका पत्राचार और स्थायी पता विभागीय अभिलेखों में एक ही दर्ज है। मिलीभगत करने वाले सरकारी कर्मियों ने एक ही पते और मोबाइल नंबरों की इस समानता को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था और समन्वय बैठकों के दौरान भी ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार को शामिल होने की छूट दी थी। जब संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) आगरा विजय कुमार ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए और विभागीय कर्मियों की संलिप्तता के तार आपस में जुड़ने लगे तो अपनी गर्दन बचाने के लिए अफसरों ने नया पैंतरा रच दिया।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी (डिप्टी आरएमओ) कार्यालय की ओर से एक संशोधित पत्र जारी कर पूर्व में दर्ज गड़बड़ी को महज लिपिकीय त्रुटि करार दिया गया, ताकि टेंडर प्रक्रिया में ब्लैकलिस्ट फर्म के मालिक के नंबर हटाए जा सकें और दागी फर्मों को काम सौंपने की राह पूरी तरह आसान की जा सके। संशोधित सूची जारी कर गुप्ता से जुड़ी फर्मों को कार्य आवंटन की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया। आरएफसी ने प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने और संबंधित फर्मों के स्पष्टीकरण के आधार पर ही अंतिम एवं सख्त कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि, आरएफसी के दौरे पर होने का लाभ उठाकर अफसरों ने जांच के बीच ही काम शुरू करा दिया। अब जिलाधिकारी द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद जांच में घिरे अधिकारियों और ठेकेदारों की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।
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बता दें, मैनपुरी के रहने वाले मुख्य आरोपी और ब्लैकलिस्टेड फर्म के संचालक जितेंद्र कुमार गुप्ता की फर्म को पूर्व में खाद्यान्न की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी और आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) के तहत थाना करहल में दर्ज आपराधिक मुकदमे के बाद काली सूची (ब्लैक लिस्ट) में डाला गया था। इसके बावजूद, विभागीय नियमों और शासनादेशों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए जितेंद्र के करीबी रिश्तेदारों के नाम पर कई डमी फर्मों का सिंडिकेट खड़ा कर दिया गया और इनके नाम पर करोड़ों रुपये के टेंडर स्वीकृत करा लिए गए।
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अमर उजाला के इस बड़े टेंडर घोटाले का भंडाफोड़ करने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया था। जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ था कि जिन तमाम फर्मों को टेंडर बांटे गए हैं, उन सबका पत्राचार और स्थायी पता विभागीय अभिलेखों में एक ही दर्ज है। मिलीभगत करने वाले सरकारी कर्मियों ने एक ही पते और मोबाइल नंबरों की इस समानता को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था और समन्वय बैठकों के दौरान भी ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार को शामिल होने की छूट दी थी। जब संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) आगरा विजय कुमार ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए और विभागीय कर्मियों की संलिप्तता के तार आपस में जुड़ने लगे तो अपनी गर्दन बचाने के लिए अफसरों ने नया पैंतरा रच दिया।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी (डिप्टी आरएमओ) कार्यालय की ओर से एक संशोधित पत्र जारी कर पूर्व में दर्ज गड़बड़ी को महज लिपिकीय त्रुटि करार दिया गया, ताकि टेंडर प्रक्रिया में ब्लैकलिस्ट फर्म के मालिक के नंबर हटाए जा सकें और दागी फर्मों को काम सौंपने की राह पूरी तरह आसान की जा सके। संशोधित सूची जारी कर गुप्ता से जुड़ी फर्मों को कार्य आवंटन की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया। आरएफसी ने प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने और संबंधित फर्मों के स्पष्टीकरण के आधार पर ही अंतिम एवं सख्त कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि, आरएफसी के दौरे पर होने का लाभ उठाकर अफसरों ने जांच के बीच ही काम शुरू करा दिया। अब जिलाधिकारी द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद जांच में घिरे अधिकारियों और ठेकेदारों की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।