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मैनपुरीः टेंडर मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष और सदर विधायक आमने-सामने

Thu, 11 Jun 2020 12:06 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 11 Jun 2020 12:06 AM IST
सार

ऑफलाइन टेंडरों में कमीशन मांगने का आरोप
 

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Dispute With Mla And Zila Panchayat Adhyaksh Over Tendar
सदर विधायक राजकुमार यादव और संध्या यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैनपुरी में जिला पंचायत के टेंडर में कमीशन का मामला अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। इसके चलते जिला पंचायत अध्यक्ष और सदर विधायक आमने-सामने आ गए हैं। जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष ने सदर विधायक पर आरोप लगाए हैं। वहीं दोनों ही पक्षों का सैफई परिवार से जुड़ाव भी एक बड़ा मुद्दा है। 
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बीते माह जिला पंचायत कार्यालय में 16 करोड़ रुपये के ऑफलाइन टेंडरों में कमीशन मांगने की शिकायत सदर विधायक राजकुमार यादव व अन्य ने की थी। मामले की जांच जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट समिति द्वारा जिला प्रशासन को भेजी जा चुकी है।
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इसी बीच जिला पंचायत अध्यक्ष संध्या यादव ने जिलाधिकारी को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने सदर विधायक राजकुमार यादव को पूरे मामले में षड्यंत्र करने का आरोप लगाया है।
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Dispute With Mla And Zila Panchayat Adhyaksh Over Tendar
कार्यालय जिला पंचायत मैनपुरी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने लिखा है कि सदर विधायक का उद्देश्य जिला पंचायत को बदनाम करना है। वे किसी तरह अपनी पत्नी को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। इसके लिए वे पूर्व में अविश्वास प्रस्ताव भी ला चुके हैं, जिसमें वे कामयाब नहीं हुए थे।

इस पत्र के बाद भले ही प्रशासन मौन है, लेकिन कहीं न कहीं जिला पंचायत अध्यक्ष और सदर विधायक खुलकर एक दूसरे के विरोध में उतर आए हैं। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है। 

तीन साल पहले आया था अविश्वास प्रस्ताव 
संध्या यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी सपा के समर्थन के चलते मिली थी। लेकिन सूबे की सरकार बदलने के बाद उनके पति अनुजेश प्रताप ने भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद राजनीतिक विरोध शुरू हो गया था। तीन साल पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया था। हालांकि बाद में भाजपा के समर्थन के बाद उनकी कुर्सी जाने से बच गई थी।
 

मई में खुलने थे टेंडर
जिला पंचायत मैनपुरी द्वारा 22 मार्च को 172 कार्य कराने का टेंडर प्रकाशित कराया गया था। करीब 16 करोड़ रुपये के टेंडर को जारी करने की प्रक्रिया पर लॉकडाउन के चलते रोक लग गई। 20 मई को टेंडर खुलने थे, लेकिन ठेकेदारों ने धांधली का आरोप लगाते हुए डीएम और सदर विधायक से शिकायत की। इसके बाद प्रक्रिया पर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी और जांच तीन सदस्यीय समिति को सौंप दी गई। 

मेरा किसी से व्यक्तिगत कोई विरोध नहीं है। कुछ लोगों ने टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत की थी। उनकी शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी से निष्पक्ष टेंडर प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए कहा गया था।  -राजकुमार यादव, सदर विधायक
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