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जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था पर फिर उठा विवाद, पंकज यादव को बड़ा झटका

Thu, 12 Oct 2017 07:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 12 Oct 2017 07:39 AM IST
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dispute over property of jai gurudev in mathura begins again
Jai Gurudev
मथुरा की जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उपनिबंधक फर्म्स सोसाइटी एवं चिट्स लखनऊ ने बाबा जयगुरुदेव के जीवित अवस्था वाली सूची को ही वैध माना है। इससे वर्तमान समिति के पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
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शासन को सौंपी गई उपनिबंधक लखनऊ की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बाबा जयगुरुदेव के जीवित रहते हुए वह स्वयं संस्था के अध्यक्ष और रामप्रताप निवासी भरतपुर उपाध्यक्ष थे। उनकी मौत के बाद 06 जुलाई 2012 को उपनिबंधक आगरा ने पंकज यादव की सूची को स्वीकार कर लिया।
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इस आदेश के विरुद्ध इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। उक्त याचिका पर 24 जुलाई 2012 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आदेश पारित कर उपनिबंधक आगरा के 6 जुलाई 12 के आदेश को क्षेत्राधिकार रहित माना। हाईकोर्ट ने इस संबंध में निर्देश दिए थे कि उभय पक्ष सिविल कोर्ट में जाकर उत्तराधिकार संबंधी विवाद निस्तारित कराए।
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जय गुरुदेव के अनुयायी पंकज बाबा - फोटो : अमर उजाला
इस संबंध में रामप्रताप ने मुख्यमंत्री, उपमुख्य मंत्री और रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटी एवं चिट्स लखनऊ से शिकायत की। इसकी जांच उपनिबंधक फर्म्स सोसाइटी एवं चिट्स लखनऊ द्वारा की गई। जांच में जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था की पंकज यादव की अध्यक्षता वाली प्रबंध समिति सूची वर्ष 2015-16 को अवैध माना है। 

बाबा जयगुरुदेव के जीवित अवस्था वाली प्रबंध समिति की सूची वर्ष 2010-11 को जांच में विधिमान्य माना है। साथ ही वर्तमान अध्यक्ष पंकज यादव की ओर से दाखिल दस्तावेजों पर कार्रवाई करने वाले उपनिबंधक आगरा उदयवीर सिंह यादव को दोषी माना। 

उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी जांच रिपोर्ट में की गई है। जांच अधिकारी ने प्रकरण को अत्यंत गंभीर मानते हुए सीबीआई से जांच कराए जाने की संस्तुति भी शासन से की है।

जयगुरुदेव आश्रम मथुरा के प्रबंधक संतराम चौधरी का कहना है कि डिप्टी रजिस्ट्रार ने हमारा पक्ष ठीक से नहीं सुना है। अभी उन्होंने अपनी रिपोर्ट रजिस्ट्रार को दी है। रजिस्ट्रार द्वारा अधिकृत रूप से कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुरूप अध्यक्ष पद का मामला मथुरा की सिविल अदालत में चल रहा है। 

वहीं रामप्रताप के अधिवक्ता प्रदीप राजपूत का कहना है कि जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के अमल के लिए शासन को लिखा जाएगा। उपनिबंधक आगरा के यहां भी कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
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