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UP: बाबा बर्फानी के अंतर्धान होने के बाद भी नहीं डिगी आस्था, शिवभक्त बोले-गुफा की मिट्टी में बसते हैं महादेव
Fri, 10 Jul 2026 11:12 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 10 Jul 2026 11:12 AM IST
सार
बाबा बर्फानी के हिम शिवलिंग के पिघलने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई है। आगरा के शिवभक्त तय कार्यक्रम के अनुसार अमरनाथ यात्रा पर जाने और पवित्र गुफा के दर्शन करने के लिए उत्साहित हैं।
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अमरनाथ यात्रा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पवित्र अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज सातवें दिन ही बाबा बर्फानी के अंतर्धान होने की खबर से जहां शुरुआती दौर में श्रद्धालुओं में थोड़ी निराशा देखी गई थी, वहीं अब शिवभक्तों की आस्था इस विपरीत परिस्थिति पर भारी पड़ती नजर आ रही है। हिम शिवलिंग के पिघल जाने के बाद भी आगरा से गए और पंजीकरण करा रहे श्रद्धालुओं ने कदम पीछे नहीं खींचे हैं।
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तीर्थयात्रियों का कहना है कि बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा का दर्शन ही अपने आप में मोक्षदायक है। शिवलिंग का पिघलना एक प्राकृतिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिससे उनकी अटूट आस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वे बाबा के साक्षात स्वरूप के दर्शन न हो पाने के मलाल को भूलकर, पवित्र गुफा की पावन मिट्टी और वहां प्रवाहित होने वाली अमरगंगा के जल को माथे से लगाकर आत्मिक संतोष प्राप्त करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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गुफा की पावन मिट्टी में ही बसते हैं शिव
आवास विकास के रहने वाले दीपक का कहना है कि बाबा बर्फानी के अंतर्धान होने की खबर जरूर मिली है, लेकिन इससे हमारा उत्साह कम नहीं हुआ। अमरनाथ गुफा की पावन मिट्टी और वहां की अलौकिक ऊर्जा में साक्षात शिव का वास है। हम तय कार्यक्रम के अनुसार ही जाएंगे और अमरगंगा के जल से अपनी यात्रा को सफल बनाएंगे।
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यह तो भाव की भक्ति है
मधुनगर निवासी मनीष ने बताया कि भोलेनाथ की खोज किसी निश्चित आकार में नहीं बल्कि भाव में है। यह भाव की भक्ति है। बाबा बर्फानी के लुप्त होने के बाद भी उस स्थान की दिव्यता कम नहीं होती। क्षेत्र के सभी शिवभक्त पूरे उत्साह के साथ अपनी यात्रा के लिए तैयार हैं।
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गुफा की पावन मिट्टी में ही बसते हैं शिव
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यह तो भाव की भक्ति है
मधुनगर निवासी मनीष ने बताया कि भोलेनाथ की खोज किसी निश्चित आकार में नहीं बल्कि भाव में है। यह भाव की भक्ति है। बाबा बर्फानी के लुप्त होने के बाद भी उस स्थान की दिव्यता कम नहीं होती। क्षेत्र के सभी शिवभक्त पूरे उत्साह के साथ अपनी यात्रा के लिए तैयार हैं।
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