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कुर्सी को लेकर छिड़ी सियासी जंग में ठप हुए विकास कार्य, ग्रामीण क्षेत्रों में बुरा हाल
Mon, 15 Jul 2019 12:47 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 15 Jul 2019 12:47 AM IST
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जिला पंचायत कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा जिला पंचायत के विकास कार्य सियासी संघर्ष के चलते पिछले सवा महीने से ठप हैं। बरसात में ग्रामीण क्षेत्रों में बुरा हाल है। कच्ची गलियां, टूटे खड़ंजे, कूड़े के ढेर आदि समस्याएं मुंह फाड़े खड़ी हैं लेकिन न तो अध्यक्ष और न ही सदस्यों को इनकी चिंता है। कुछ सदस्य तख्ता पलट करने और कुछ इसे बचाने में जुटे हैं। विकास कार्यों की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
21 जून को 28 सदस्यों ने जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया था। मगर, इससे पहले ही वो अपने क्षेत्र की समस्याओं को दरकिनार करते हुए प्रायोजित सैर पर निकल गए। एक जून के आसपास कुर्सी हिलाने की कवायद में सदस्यों ने घेराबंदी शुरू कर दी थी।
इधर, जिला पंचायत अध्यक्ष भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए जोड़तोड़ में जुटे रहे। इसके चलते पिछले साल विकास कार्यों के जो टेंडर हुए थे, उनमें से कई कार्य तो शुरू ही नहीं हो पाए। कुछ कार्य शुरू हुए लेकिन उनकी गुणवत्ता कैसी रही, ये भी कोई परखने वाला नहीं था।
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21 जून को 28 सदस्यों ने जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया था। मगर, इससे पहले ही वो अपने क्षेत्र की समस्याओं को दरकिनार करते हुए प्रायोजित सैर पर निकल गए। एक जून के आसपास कुर्सी हिलाने की कवायद में सदस्यों ने घेराबंदी शुरू कर दी थी।
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इधर, जिला पंचायत अध्यक्ष भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए जोड़तोड़ में जुटे रहे। इसके चलते पिछले साल विकास कार्यों के जो टेंडर हुए थे, उनमें से कई कार्य तो शुरू ही नहीं हो पाए। कुछ कार्य शुरू हुए लेकिन उनकी गुणवत्ता कैसी रही, ये भी कोई परखने वाला नहीं था।
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फॉगिंग के तीन करोड़ से अधिक के टेंडर रुके
ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छर मारने के लिए फॉगिंग कराने की आड़ में बड़े खेल की तैयारी थी। जिला पंचायत ने पिछले साल ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छर मारने के लिए फॉगिंग कराने को तीन करोड़ से अधिक के 31 टेंडर निकाले थे। इस पर विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए थे।
तत्कालीन सीडीओ रविंद्र कुमार मांदड़ ने इस पर रोक लगा दी। इस बीच एक भी जिला पंचायत सदस्य ने न तो टेंडरों की पड़ताल जल्द पूरी कराने और न ही फॉगिंग के लिए अन्य व्यवस्था के लिए कोई सवाल उठाया। बारिश में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
प्रमुख प्रस्ताव अधर में
- 9.50 लाख का बिचपुरी में इंटरलॉकिंग
- 9.72 लाख का खंदौली में इंटरलॉकिंग
- 9.82 लाख का एत्मादपुर में गली खड़ंजा
- 9.72 लाख का गली निर्माण कार्य
- 9.77 लाख का अछनेरा में इंटरलॉकिंग
- 9.72 लाख का अकोला में गली निर्माण
- 9.80 लाख का जगनेर में मरम्मत कार्य
- 9.79 लाख का सैंया में इंटरलॉकिंग
- 9.80 लाख का शमसाबाद में इंटरलॉकिंग
तत्कालीन सीडीओ रविंद्र कुमार मांदड़ ने इस पर रोक लगा दी। इस बीच एक भी जिला पंचायत सदस्य ने न तो टेंडरों की पड़ताल जल्द पूरी कराने और न ही फॉगिंग के लिए अन्य व्यवस्था के लिए कोई सवाल उठाया। बारिश में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
प्रमुख प्रस्ताव अधर में
- 9.50 लाख का बिचपुरी में इंटरलॉकिंग
- 9.72 लाख का खंदौली में इंटरलॉकिंग
- 9.82 लाख का एत्मादपुर में गली खड़ंजा
- 9.72 लाख का गली निर्माण कार्य
- 9.77 लाख का अछनेरा में इंटरलॉकिंग
- 9.72 लाख का अकोला में गली निर्माण
- 9.80 लाख का जगनेर में मरम्मत कार्य
- 9.79 लाख का सैंया में इंटरलॉकिंग
- 9.80 लाख का शमसाबाद में इंटरलॉकिंग
जिम्मेदार की दलील
जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि विकास कार्यों के टेंडर समय से करा लिए गए थे। अधिकांश कार्य शुरू हो चुके हैं। कुछ कार्य अभी शुरू नहीं हो पाए हैं। ठेकेदारों पर इन्हें जल्द शुरू कराने के लिए दबाव डाला जा रहा है। सदस्यों को भी चाहिए कि वह सियासत छोड़कर क्षेत्र में विकास कार्यों पर नजर रखें।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि राजपाल यादव का कहना है कि जिला पंचायत द्वारा कार्यों में घोर लापरवाही बरती जा रही है। कई काम ऐसे हैं, जिनका टेंडर हो चुका है लेकिन अब तक शुरू नहीं हुए हैं। मानसून में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी मुश्किल उठानी पड़ रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि राजपाल यादव का कहना है कि जिला पंचायत द्वारा कार्यों में घोर लापरवाही बरती जा रही है। कई काम ऐसे हैं, जिनका टेंडर हो चुका है लेकिन अब तक शुरू नहीं हुए हैं। मानसून में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी मुश्किल उठानी पड़ रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।