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गंगा की कटरी के हिरण के कुनबों को संरक्षण की जरूरत.
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कासगंज के कटरी क्षेत्र में विचरण करते हिरण।
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। वन्य जीव संरक्षण के लिए जिले में कोई प्रभावशाली योजना लागू नहीं है। जबकि गंगा की कटरी के इलाके में हिरनों के कुनबों की अच्छी तादात है। लुप्त हो रही प्रजाति के काले हिरन भी मौजूद हैं। वन विभाग के मुताबिक 386 हिरण कटरी के जंगलों में हैं। खासकर यह इखौना, श्रीनगला, दरियावगंज व म्यूनी इलाकों में बहुतायत पाए जाते हैं। पर्यटन के अवसर बढ़ाने के लिए इनके संरक्षण की जरूरत है।
हजारा नहर में मगरमच्छों की संख्या 50 के आसपास है। अजगर-सांप भी कटरी के जंगल में पाए जाते हैं, लेकिन इनकी गणना का कोई आंकड़ा नहीं है। गंगा की कटरी का शांत और सुरम्य वातावरण हिरनों के लिए काफी मुफीद है। क्योंकि गंगा की कटरी में न चारे की कमी है और न ही पानी की। भीषण गर्मी के समय में जब कटरी के गड्ढों का पानी सूख जाता है, तब हिरन पानी की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर विचरण करने लगते हैं। दरियावगंज झील आर्द्र भूमि की श्रेणी मे है।
यहां हर समय पानी की उपलब्धता रहती है। ऐसे में हिरन झील की ओर भी पहुंचते हैं। इखौना के इलाके में रहने वाले हिरण नहर के पानी से प्यास बुझाते हैं। हिरनों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। 2018 में हिरनों की संख्या 350 थी। 2019 की गणना के मुताबिक यह संख्या बढ़कर 386 हो चुकी है। इस वर्ष भी यह गणना की जानी है। इनमें काले हिरणों संख्या 70 है। यदि जिले में हिरण के संरक्षण की दिशा में किसी विशेष योजना का क्रियान्वयन किया जाए तो न केवल हिरनों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन के अवसर भी बढ़ेंगे।
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हजारा नहर में मगरमच्छों की संख्या 50 के आसपास है। अजगर-सांप भी कटरी के जंगल में पाए जाते हैं, लेकिन इनकी गणना का कोई आंकड़ा नहीं है। गंगा की कटरी का शांत और सुरम्य वातावरण हिरनों के लिए काफी मुफीद है। क्योंकि गंगा की कटरी में न चारे की कमी है और न ही पानी की। भीषण गर्मी के समय में जब कटरी के गड्ढों का पानी सूख जाता है, तब हिरन पानी की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर विचरण करने लगते हैं। दरियावगंज झील आर्द्र भूमि की श्रेणी मे है।
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यहां हर समय पानी की उपलब्धता रहती है। ऐसे में हिरन झील की ओर भी पहुंचते हैं। इखौना के इलाके में रहने वाले हिरण नहर के पानी से प्यास बुझाते हैं। हिरनों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। 2018 में हिरनों की संख्या 350 थी। 2019 की गणना के मुताबिक यह संख्या बढ़कर 386 हो चुकी है। इस वर्ष भी यह गणना की जानी है। इनमें काले हिरणों संख्या 70 है। यदि जिले में हिरण के संरक्षण की दिशा में किसी विशेष योजना का क्रियान्वयन किया जाए तो न केवल हिरनों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन के अवसर भी बढ़ेंगे।
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