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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Declared Dead on Paper, Found Alive After 12 Years: Fake Death Certificate Scam in Agra

UP: जिसे कोर्ट में बताया मुर्दा, वो 12 साल बाद स्कूटर चलाते हुए दिखा...उसे जीवत देख छूट गए वादी के पसीने

Fri, 06 Feb 2026 06:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 06 Feb 2026 06:01 AM IST
सार

आगरा में एक आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर खुद को मृत घोषित कर कोर्ट से मुकदमा बंद करा लिया। 12 साल बाद वही आरोपी स्कूटर चलाता मिला, पुलिस जांच में उसके जिंदा होने की पुष्टि हुई।

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Declared Dead on Paper, Found Alive After 12 Years: Fake Death Certificate Scam in Agra
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के थाना न्यू आगरा क्षेत्र के एक आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के सहारे खुद को कागज पर मुर्दा साबित करा दिया। कोर्ट से अपने खिलाफ चल रहे वाद को बंद (उपशमित) करवा लिया। थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी 2013 में आरोपी के पड़ोसियों से हस्ताक्षर कराकर मृत होने की आख्या दे दी। आरोपी 12 साल बाद वादी को अपनी उसी स्कूटर (स्कूटी) को सड़क पर दौड़ाते दिख गया, जिसे उसने मौत के बाद अपने नाम पंजीकृत कराया था।
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तत्कालीन विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मूल परिवाद (संख्या-242/1999) राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी आदि के बीच कूटरचित दस्तावेज के आरोप में मुकदमा लंबित चल रहा था। सुनवाई के दौरान आरोपी विद्या देवी, चुन्नी लाल गोयल और रोशन लाल वर्मा की मौत हो गई। कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी।
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मुकदमे में आरोपी तारा चंद्र शर्मा निवासी गांधी नगर के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने वर्ष 2013 में कोर्ट में नगर निगम से बना एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उसे 1998 में मृत दर्शाया गया था। थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी 13 अगस्त 2013 को इस पर आख्या दी। कोर्ट ने फर्जी मृत्यु प्रमाण व अन्य दस्तावेज और पुलिस आख्या को सही मानते हुए 20 सितंबर 2013 को आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई बंद कर दी।



 

वादी को नवंबर में दिखा आरोपी
मामले में नया मोड़ तब आया जब थाना हरीपर्वत क्षेत्र के घटिया आजम खां निवासी वादी राजकुमार वर्मा ने आरोपी तारा चंद्र शर्मा को 5 नवंबर 2025 को गांधी नगर क्षेत्र में स्कूटर चलाकर जाते हुए देखा। उन्होंने फोटो खींच ली। स्कूटर के नंबर से आरटीओ कार्यालय जाकर दस्तावेज निकलवाए। पता चला कि जिस आरोपी को कोर्ट ने 1998 में मृत मान लिया था। उसी आरोपी ने जुलाई 2016 में अपने नाम से नई स्कूटी पंजीकृत करवाई थी और वह बाकायदा बैंक खातों में मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल भी कर रहा है। उन्होंने विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-6 की कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर साक्ष्य पेश किए। कोर्ट ने थाना न्यू आगरा से आख्या मांगी।

 
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पुलिस ने की जिंदा होने की पुष्टि
कोर्ट के आदेश पर थाना न्यू आगरा पुलिस ने जांच की। एसआई मधुर कुशवाह ने कोर्ट में आख्या प्रस्तुत की। रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी तारा चंद्र शर्मा अपने घर पर जीवित पाया गया। जांच में आरोपी के पुत्र आशुतोष शर्मा ने भी स्वीकार किया कि उसके पिता जीवित हैं और वृद्ध होने के कारण घर पर ही रहते हैं। कभी-कभी स्कूटर चला लेते हैं। पुलिस ने मौके पर आरोपी और उसके पुत्र की फोटो भी ली, जिसे साक्ष्य के रूप में कोर्ट में पेश किया गया है।
 
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