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UP: बीयू में 200 करोड़ का घोटाला...विजिलेंस जांच, बर्खास्त जेई की इस हाल में मिली लाश; उठ रहे कई सवाल
Sun, 06 Jul 2025 11:05 AM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 06 Jul 2025 11:05 AM IST
सार
परिजनों का कहना है कि अंबरीश गाैतम ने विश्वविद्यालय में अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था।
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मृतक जेई का फाइल फोटो व आगरा में घर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अवर अभियंता (जेई) पद से बर्खास्त चल रहे अंबरीश गौतम की संदिग्ध हालात में मृत्यु के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी। 200 करोड़ के घोटाले के आरोप लगाए थे। इसकी शिकायत झांसी विजिलेंस में की थी। उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव था। 2 साल पहले शासन को रिपोर्ट भी भेज दी गई। मगर, रिपोर्ट में क्या सामने आया? कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह आज तक पता नहीं चल सका। शिकायत फाइलों में ही दबकर रह गई।
मूलरूप से आगरा के छत्ता स्थित कचहरी घाट की गंगा गली निवासी अंबरीश गौतम 25 साल से झांसी में रह रहे थे। वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में तैनात थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में 5 साल पहले विश्वविद्यालय में कर्मचारियों पर कई अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी। 200 करोड़ के घोटाले के आरोप लगाए थे। इस पर विजिलेंस ने खुली जांच शुरू कर दी थी।
पत्नी पूनम गाैतम का आरोप है कि खुली जांच में अधिकारी और कर्मचारी सहयोग नहीं कर रहे थे। वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं करा रहे थे। उनके पति पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। बाद में उन्हें बर्खास्त कर दिया था। इसके बावजूद वह पीछे हटने के लिए तैयार नहीं थे। यही वजह थी कि विजिलेंस ने भी अपनी खुली जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट बनाई थी। इस संबंध में एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि मामले में जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन के निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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मूलरूप से आगरा के छत्ता स्थित कचहरी घाट की गंगा गली निवासी अंबरीश गौतम 25 साल से झांसी में रह रहे थे। वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में तैनात थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में 5 साल पहले विश्वविद्यालय में कर्मचारियों पर कई अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी। 200 करोड़ के घोटाले के आरोप लगाए थे। इस पर विजिलेंस ने खुली जांच शुरू कर दी थी।
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पत्नी पूनम गाैतम का आरोप है कि खुली जांच में अधिकारी और कर्मचारी सहयोग नहीं कर रहे थे। वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं करा रहे थे। उनके पति पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। बाद में उन्हें बर्खास्त कर दिया था। इसके बावजूद वह पीछे हटने के लिए तैयार नहीं थे। यही वजह थी कि विजिलेंस ने भी अपनी खुली जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट बनाई थी। इस संबंध में एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि मामले में जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन के निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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भाई करता है हैंडीक्राफ्ट का व्यापार
कचहरी घाट में मृतक अवर अभियंता का परिवार रहता है। अमर उजाला टीम ने शनिवार को घर जाकर परिवार के लोगों से बात करने की कोशिश की। मगर, घर पर ताला लगा मिला। घटना की जानकारी के बाद परिजन झांसी चले गए थे। पैतृक घर में पिता डूंगर मल, मां राजकुमारी, भाई अंकुर गाैतम पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं। भाई हैंडीक्राफ्ट का व्यापार करते हैं। घटना की जानकारी पर पड़ोसी जुट गए। उनका कहना था कि अंबरीश शुरू से ही होनहार थे। वह जब भी घर आते थे, अपने मित्रों के साथ भी समय बिताते थे।
बेडरूम में मिला था शव
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में करीब 200 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाने वाले बर्खास्त अवर अभियंता (जेई) अम्बरीश गौतम का शव शुक्रवार रात बेडरूम में औंधे मुंह पड़ा मिला। नवाबाद थाना पुलिस ने मौका मुआयना कर उनकी लाइसेंसी रिवाल्वर, मोबाइल फोन आदि कब्जे में लिया। मृतक के भाई ने कुछ लोगों पर पुलिस के पहुंचने से पूर्व घर खंगालने और दस्तावेज ले जाने के आरोप लगाए हैं। छत्ता स्थित कचहरी घाट निवासी अंकुर गौतम ने बताया कि उनके बड़े भाई अम्बरीश गौतम की पत्नी पूनम गौतम अपने छोटे बेटे यशांक को लेकर कोटा गई थीं। घर में भाई अम्बरीश अकेले थे। शुक्रवार सुबह 9:30 बजे उन्होंने अपनी पत्नी से बातचीत की। इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। परिजनों ने रात तक उन्हें फोन लगाया मगर फोन स्विच ऑफ रहा था। इस पर पूनम ने कैंपस में रहने वाले एक कर्मी को फोन किया।
कचहरी घाट में मृतक अवर अभियंता का परिवार रहता है। अमर उजाला टीम ने शनिवार को घर जाकर परिवार के लोगों से बात करने की कोशिश की। मगर, घर पर ताला लगा मिला। घटना की जानकारी के बाद परिजन झांसी चले गए थे। पैतृक घर में पिता डूंगर मल, मां राजकुमारी, भाई अंकुर गाैतम पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं। भाई हैंडीक्राफ्ट का व्यापार करते हैं। घटना की जानकारी पर पड़ोसी जुट गए। उनका कहना था कि अंबरीश शुरू से ही होनहार थे। वह जब भी घर आते थे, अपने मित्रों के साथ भी समय बिताते थे।
बेडरूम में मिला था शव
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में करीब 200 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाने वाले बर्खास्त अवर अभियंता (जेई) अम्बरीश गौतम का शव शुक्रवार रात बेडरूम में औंधे मुंह पड़ा मिला। नवाबाद थाना पुलिस ने मौका मुआयना कर उनकी लाइसेंसी रिवाल्वर, मोबाइल फोन आदि कब्जे में लिया। मृतक के भाई ने कुछ लोगों पर पुलिस के पहुंचने से पूर्व घर खंगालने और दस्तावेज ले जाने के आरोप लगाए हैं। छत्ता स्थित कचहरी घाट निवासी अंकुर गौतम ने बताया कि उनके बड़े भाई अम्बरीश गौतम की पत्नी पूनम गौतम अपने छोटे बेटे यशांक को लेकर कोटा गई थीं। घर में भाई अम्बरीश अकेले थे। शुक्रवार सुबह 9:30 बजे उन्होंने अपनी पत्नी से बातचीत की। इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। परिजनों ने रात तक उन्हें फोन लगाया मगर फोन स्विच ऑफ रहा था। इस पर पूनम ने कैंपस में रहने वाले एक कर्मी को फोन किया।
पड़ोस में रहने वाले कर्मचारी ने अम्बरीश को आवाज दी, लेकिन कमरे के अंदर से कोई आवाज नहीं आई। पत्नी पूनम ने उन्हें पीछे के रास्ते से दरवाजा खोलने का उपाय सुझाया। तब तक कई लोग जुट गए। दरवाजा खोलने के बाद सभी लोग बेड रूम में पहुंचे तो दंग रह गए। बेड पर अम्बरीश औंधे मुंह पड़े थे और चेहरा हल्का नीला पड़ रहा था।
अंकुर ने भाई की हत्या की आशंका जताते हुए बीयू प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा कि अम्बरीश ने बीयू में हुए 200 करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायत शासन से की थी, जिसकी जांच हुई। उनके पास घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज थे, जिसे प्राप्त करने के लिए बीयू के कई अधिकारी लगातार दबाव बना रहे थे। यही नहीं, पुलिस के पहुंचने से पहले ही कुछ लोग घर में घुसे, जो जरूरी कागजात उठाकर ले गए हैं। सीधी भर्ती के तहत जूनियर इंजीनियर पद पर 11 दिसंबर 2000 में अम्बरीश की तैनाती विश्वविद्यालय में हुई थी।
ये भी पढ़ें-UP: बुढ़ापे में दूर किए गिले-शिकवे...16 साल बाद एक साथ रहने को राजी हुए पति-पत्नी, शादी को हो गए 38 वर्ष
अंकुर ने भाई की हत्या की आशंका जताते हुए बीयू प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा कि अम्बरीश ने बीयू में हुए 200 करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायत शासन से की थी, जिसकी जांच हुई। उनके पास घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज थे, जिसे प्राप्त करने के लिए बीयू के कई अधिकारी लगातार दबाव बना रहे थे। यही नहीं, पुलिस के पहुंचने से पहले ही कुछ लोग घर में घुसे, जो जरूरी कागजात उठाकर ले गए हैं। सीधी भर्ती के तहत जूनियर इंजीनियर पद पर 11 दिसंबर 2000 में अम्बरीश की तैनाती विश्वविद्यालय में हुई थी।
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