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अलबेला सजन आयो री....
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Wed, 06 Jan 2016 02:18 AM IST
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यूपी प्रवासी दिवस के दूसरे दिन की शाम में सुर, लय और ताल का संगम देखने को मिला। प्रख्यात कथक गुरु बिरजू महाराज की शिष्या शाश्वती सेन और उनकी टीम ने अपनी कला का प्रदर्शन किया तो ब्रज की अनूठी परंपरा लठामार होली से मेहमानों को रूबरू कराया मथुरा से आए मुरारी लाल शर्मा और उनके साथी कलाकारों ने। नृत्य और संगीत की ऐसी सरिता बही कि हर शख्स अपनी सुध खोकर संगीत के सागर में डूब गया।
होटल आईटीसी मुगल में आयोजित संगीत संध्या में शाश्वती सेन की टीम ने कार्यक्रम का आगाज रामधारी सिंह दिनकर की रचना उर्वशी पर भावपूर्ण कथक नृत्य से किया। उन्होंने कुछ लयकारी के माध्यम से खेल और नृत्य के बीच के सामंजस्य को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कथक के माध्यम से कैसे हॉकी, क्रिकेट जैसे खेलों के रोमांच का अनुभव किया जा सकता है।
इसके बाद उन्होंने विरह वेदना से पीड़ित नायिका को जब प्रियतम के आने की खबर मिलती है तो उसके हृदय के उद्गार कैसे होते हैं, वह कैसे शृंगार कर अपने साजन का इंतजार करती है, इस भाव को अलबेला सजन आयो री... बोलों पर नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। अंत में उन्होंने जसोदा के लाल खेलें होरी, धूम मचौ री... माध्यम से होली की सतरंगी झलक भी प्रस्तुत की। विश्वजीत, मुंजषा, रुपेश आदि ने संगत की।
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इसके बाद मुरारी लाल शर्मा और उनके साथी कलाकारों ने फाग खेलन बरसाने आयो री, नटवर नंद किशोर... जैसे गीतों पर लठामार और फिर फूलों की होली की झलक प्रस्तुत की। राधा-माधव के इस स्वरूप को देखकर दर्शक आनंदित हो गए और पंडाल काफी देर तक तालियों से गूंजता रहा।
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होटल आईटीसी मुगल में आयोजित संगीत संध्या में शाश्वती सेन की टीम ने कार्यक्रम का आगाज रामधारी सिंह दिनकर की रचना उर्वशी पर भावपूर्ण कथक नृत्य से किया। उन्होंने कुछ लयकारी के माध्यम से खेल और नृत्य के बीच के सामंजस्य को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कथक के माध्यम से कैसे हॉकी, क्रिकेट जैसे खेलों के रोमांच का अनुभव किया जा सकता है।
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इसके बाद उन्होंने विरह वेदना से पीड़ित नायिका को जब प्रियतम के आने की खबर मिलती है तो उसके हृदय के उद्गार कैसे होते हैं, वह कैसे शृंगार कर अपने साजन का इंतजार करती है, इस भाव को अलबेला सजन आयो री... बोलों पर नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। अंत में उन्होंने जसोदा के लाल खेलें होरी, धूम मचौ री... माध्यम से होली की सतरंगी झलक भी प्रस्तुत की। विश्वजीत, मुंजषा, रुपेश आदि ने संगत की।
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इसके बाद मुरारी लाल शर्मा और उनके साथी कलाकारों ने फाग खेलन बरसाने आयो री, नटवर नंद किशोर... जैसे गीतों पर लठामार और फिर फूलों की होली की झलक प्रस्तुत की। राधा-माधव के इस स्वरूप को देखकर दर्शक आनंदित हो गए और पंडाल काफी देर तक तालियों से गूंजता रहा।