{"_id":"47aba5e731d277d5286b16c8222173b0","slug":"ssp-rajesh-d-modak-in-trouble-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बड़ी मुश्किल में फंसे मोड़क ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बड़ी मुश्किल में फंसे मोड़क
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 22 Sep 2015 01:58 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा एसएसपी पद से 38वीं वाहिनी पीएसी, अलीगढ़ स्थानांतरित किए गए आईपीएस राजेश डी. मोड़क बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं। उनके ट्रांसफर के अगले ही दिन डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने उन तमाम मामलों की फाइलें खुलवा दी हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा था कि उनके एसएसपी रहते जांच में दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों को दंडित करने के बजाए सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ा जाता रहा। उनके दस महीने के कार्यकाल में ऐसे 653 प्रकरण आए, जबकि दंड सिर्फ 88 में ही दिया गया। उनकी इस ‘मेहरबानी’ पर उनसे भी जवाब तलब किया जा सकता है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि डीआईजी ऑफिस में सोमवार को ऐसे तमाम मामलों की सूची बनाई गई। जिन केस में तत्कालीन एसएसपी की गलती साफ तौर पर नजर आ रही है, उनकी जांच के लिए अधिकारी नामित किए जा रहे हैं। डीआईजी ऑफिस के सूत्रों का कहना है कि इसी सप्ताह जांच शुरू करा दी जाएगी।
एक मामला सिपाही की गैर हाजिरी का है। तीन साल गैर हाजिर रहे इस सिपाही की फाइल एसएसपी ऑफिस में पहुंच जाने के बाद जांच रिपोर्ट में बदलाव किया गया। इस पर मोड़क ने एक्शन नहीं लिया। इसके अलावा गैर इरादतन हत्या के एक मामले में चार साल तक पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इस दौरान छह जांच अधिकारी बदले। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो दो बार मोड़क की पेशी हुई। उन्होंने छह के छह जांच अधिकारी सस्पेंड तो किए लेकिन बाद में बगैर दंड दिए बहाल कर दिए।
विज्ञापन
इससे संगीन मामला यह बताया जा रहा है कि एक मामले में निलंबित किए गए कई सिपाही मजे से ड्यूटी करते रहे। जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल केस में पेशी के दौरान लापरवाही बरतने वाले सिपाही डीआईजी के निर्देश पर सस्पेंड नहीं किए गए। उन्होंने रिमाइंडर भेजा तब एक्शन लिया गया। सूत्रों ने बताया कि ऐसे भी प्रकरण है जिनमें जांच अधिकारी ने दंड की संस्तुति की, कप्तान ने सहमति जताई, लेकिन बाद में दरियादिली दिखा दी। ऐसे तमाम मामलों की फाइलें खुलवाई जा रही हैं।
भारी पड़ी इंस्पेक्टरों पर मेहरबानी
राजेश डी. मोड़क सत्ता के करीबी बताए जाते हैं। इसके बावजूद उन्हें पीएसी में भेज दिए जाने को लेकर सोमवार को पुलिस में खूब चर्चा हुई। माना जा रहा है कि उन्हें शमसाबाद प्रकरण ले डूबा। इसमें डीआईजी के निर्देश के बावजूद उन्होंने दो इंस्पेक्टरों पर कार्रवाई नहीं की थी। बाद में दोनों को डीआईजी ने सस्पेंड किया। इसकी जानकारी सीएम तक गई थी। इसके अलावा शनिवार को जब मुख्यमंत्री आगरा आए, तो उनके सामने भी कई लोगों ने मोड़क की शिकायत की।
विज्ञापन
पुलिस सूत्रों ने बताया कि डीआईजी ऑफिस में सोमवार को ऐसे तमाम मामलों की सूची बनाई गई। जिन केस में तत्कालीन एसएसपी की गलती साफ तौर पर नजर आ रही है, उनकी जांच के लिए अधिकारी नामित किए जा रहे हैं। डीआईजी ऑफिस के सूत्रों का कहना है कि इसी सप्ताह जांच शुरू करा दी जाएगी।
विज्ञापन
एक मामला सिपाही की गैर हाजिरी का है। तीन साल गैर हाजिर रहे इस सिपाही की फाइल एसएसपी ऑफिस में पहुंच जाने के बाद जांच रिपोर्ट में बदलाव किया गया। इस पर मोड़क ने एक्शन नहीं लिया। इसके अलावा गैर इरादतन हत्या के एक मामले में चार साल तक पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इस दौरान छह जांच अधिकारी बदले। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो दो बार मोड़क की पेशी हुई। उन्होंने छह के छह जांच अधिकारी सस्पेंड तो किए लेकिन बाद में बगैर दंड दिए बहाल कर दिए।
विज्ञापन
इससे संगीन मामला यह बताया जा रहा है कि एक मामले में निलंबित किए गए कई सिपाही मजे से ड्यूटी करते रहे। जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल केस में पेशी के दौरान लापरवाही बरतने वाले सिपाही डीआईजी के निर्देश पर सस्पेंड नहीं किए गए। उन्होंने रिमाइंडर भेजा तब एक्शन लिया गया। सूत्रों ने बताया कि ऐसे भी प्रकरण है जिनमें जांच अधिकारी ने दंड की संस्तुति की, कप्तान ने सहमति जताई, लेकिन बाद में दरियादिली दिखा दी। ऐसे तमाम मामलों की फाइलें खुलवाई जा रही हैं।
भारी पड़ी इंस्पेक्टरों पर मेहरबानी
राजेश डी. मोड़क सत्ता के करीबी बताए जाते हैं। इसके बावजूद उन्हें पीएसी में भेज दिए जाने को लेकर सोमवार को पुलिस में खूब चर्चा हुई। माना जा रहा है कि उन्हें शमसाबाद प्रकरण ले डूबा। इसमें डीआईजी के निर्देश के बावजूद उन्होंने दो इंस्पेक्टरों पर कार्रवाई नहीं की थी। बाद में दोनों को डीआईजी ने सस्पेंड किया। इसकी जानकारी सीएम तक गई थी। इसके अलावा शनिवार को जब मुख्यमंत्री आगरा आए, तो उनके सामने भी कई लोगों ने मोड़क की शिकायत की।