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चमरौली के आरपीएफ हवलदार की मध्य प्रदेश में हत्या
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 22 Dec 2015 01:50 AM IST
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शमसाबाद रोड स्थित गांव चमरौली निवासी आरपीएफ हवलदार गिरिराज उपाध्याय (58) की मध्य प्रदेश के झाउआ जनपद के मेदनगर में हत्या कर दी गई। वे गश्त पर जा रहे थे। रास्ते में बदमाशों ने घेर लिया और गला रेतकर जान ले ली। हत्यारों का अभी कुछ पता नहीं चल पाया है।
उनके पार्थिव शरीर को आगरा लाया गया। सोमवार को दाह संस्कार कर दिया गया। बरौली अहीर ब्लॉक से एडीओ पद के रिटायर्ड उनके भाई रामनाथ शर्मा ने बताया कि घटना 19 दिसंबर की शाम की है। उन्हें पुलिस ने बताया कि गिरिराज गश्त पर जा रहे थे। रास्ते में पहले से बदमाश मौजूद थे।
उन्होंने शायद उन्हें टोक दिया। इसी पर बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। उन पर धारदार हथियार से कई वार किए गए। गर्दन को रेत दिया गया। इसी से उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने अपनी ओर से केस दर्ज किया है। सूचना पर परिवार वहां पहुंचा। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर आगरा लाया गया।
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नक्सलियों में तो नहीं थे हत्यारे
उनकी हत्या की सूचना आने के बाद चमरौली में यह चर्चा होने लगी कि कहीं वारदात नक्सलियों ने अंजाम न दी हो। इस बारे में उनके भाई ने बताया कि जहां घटना हुई है, वह नक्सल प्रभावित क्षेत्र नहीं है। पुलिस ने उन्हें बताया है कि यह नक्सली वारदात नहीं है।
निडर थे गिरिराज
आगरा। गिरिराज 1979 में आरपीएफ में भर्ती हुए थे। उनका इकलौता बेटा नरेश उपाध्याय (30) एलएलबी कर रहा है। गांव के लोगों ने बताया कि वे एकदम निडर थे। बदमाशों से कई बार आमना सामना हुआ लेकिन कभी घबराए नहीं।
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उनके पार्थिव शरीर को आगरा लाया गया। सोमवार को दाह संस्कार कर दिया गया। बरौली अहीर ब्लॉक से एडीओ पद के रिटायर्ड उनके भाई रामनाथ शर्मा ने बताया कि घटना 19 दिसंबर की शाम की है। उन्हें पुलिस ने बताया कि गिरिराज गश्त पर जा रहे थे। रास्ते में पहले से बदमाश मौजूद थे।
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उन्होंने शायद उन्हें टोक दिया। इसी पर बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। उन पर धारदार हथियार से कई वार किए गए। गर्दन को रेत दिया गया। इसी से उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने अपनी ओर से केस दर्ज किया है। सूचना पर परिवार वहां पहुंचा। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर आगरा लाया गया।
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नक्सलियों में तो नहीं थे हत्यारे
उनकी हत्या की सूचना आने के बाद चमरौली में यह चर्चा होने लगी कि कहीं वारदात नक्सलियों ने अंजाम न दी हो। इस बारे में उनके भाई ने बताया कि जहां घटना हुई है, वह नक्सल प्रभावित क्षेत्र नहीं है। पुलिस ने उन्हें बताया है कि यह नक्सली वारदात नहीं है।
निडर थे गिरिराज
आगरा। गिरिराज 1979 में आरपीएफ में भर्ती हुए थे। उनका इकलौता बेटा नरेश उपाध्याय (30) एलएलबी कर रहा है। गांव के लोगों ने बताया कि वे एकदम निडर थे। बदमाशों से कई बार आमना सामना हुआ लेकिन कभी घबराए नहीं।