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मठ-मंदिरों से भी निराश लौटी पुलिस की टीमें
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Thu, 24 Mar 2016 12:53 AM IST
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अपहृत मासूम का अभी तक कोई भी सुराग नहीं मिल पाया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पांच जनवरी से अपहृत बिट्टू की नए सिरे से तलाश में जुटी पुलिस मठ और मंदिरों से भी निराश लौट आई है। पुलिस की तीन टीमें मथुरा, वृंदावन, हरिद्वार, ऋषिकेश, कैला देवी और मेहंदीपुर बालाजी में 20 जगह उसके फोटो लेकर पहुंची थीं। इन सभी जगहों पर अपील के साथ उसकी तस्वीर चस्पा की गई है।
इससे साफ लग रहा है कि पुलिस अभी भी कहीं न कहीं यह मानकर चल रही है कि वह किसी बात से परेशान होकर खुद ही गया है। केस अपहरण में दर्ज है। एक बच्चा खुद को चश्मदीद बताते हुए दावा कर चुका है कि उसके सामने ही सफेद रंग की वैन में बदमाश बिट्टू को अगवा कर ले गए थे लेकिन पुलिस शुरू से यही मान रही है कि वह खुद ही गया है। दो महीने तक इस केस की फाइल बंद रही। उसके परिवार के साथ शहरवासियों ने प्रदर्शन किया तो अब उसकी तलाश नए सिरे से शुरू की गई है।
इसी क्रम में पुलिस की टीमें कई जगह भेजी गई थीं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह पूजा-पाठ काफी देर तक करता है। इसकी जानकारी पर उसकी तलाश मठ और मंदिरों में की गई लेकिन वह नहीं मिला।
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‘पुलिस ने हमें बेवजह परेशान किया’
आगरा। पुलिस को बिट्टू तो नहीं मिला, लेकिन राजस्थान के करौली जिले के बेरुंडा गांव में एक आश्रम में 11 साल का एक बच्चा मिल गया। पुलिस टीम उसे अपने साथ आगरा ले आई। उसे करौली पुलिस के सुपुर्द भी किया जा सकता था लेकिन आगरा लाया गया।
बुधवार सुबह उसे ऐसे पेश किया जा रहा था जैसे कि गुमशुदा बच्चा ढूंढ लिया गया है। वह वहां आश्रम में साधु के पास था। लेकिन उसके माता-पिता के आते ही इस गुडवर्क की हवा निकल गई। यह बच्चा बदायूं के मूसा झाग के प्रहलादपुर के मुनेंद्र पाठक का बेटा अंकित है।
उन्होंने आगरा पहुंचकर पुलिस को बताया कि अंकित लापता नहीं हुआ था। उन्होंने ही उसे अपनी मर्जी से साधु के पास भेजा था। इसके बाद उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि आगरा पुलिस ने उन्हें बेवजह परेशान किया।
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इससे साफ लग रहा है कि पुलिस अभी भी कहीं न कहीं यह मानकर चल रही है कि वह किसी बात से परेशान होकर खुद ही गया है। केस अपहरण में दर्ज है। एक बच्चा खुद को चश्मदीद बताते हुए दावा कर चुका है कि उसके सामने ही सफेद रंग की वैन में बदमाश बिट्टू को अगवा कर ले गए थे लेकिन पुलिस शुरू से यही मान रही है कि वह खुद ही गया है। दो महीने तक इस केस की फाइल बंद रही। उसके परिवार के साथ शहरवासियों ने प्रदर्शन किया तो अब उसकी तलाश नए सिरे से शुरू की गई है।
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इसी क्रम में पुलिस की टीमें कई जगह भेजी गई थीं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह पूजा-पाठ काफी देर तक करता है। इसकी जानकारी पर उसकी तलाश मठ और मंदिरों में की गई लेकिन वह नहीं मिला।
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‘पुलिस ने हमें बेवजह परेशान किया’
आगरा। पुलिस को बिट्टू तो नहीं मिला, लेकिन राजस्थान के करौली जिले के बेरुंडा गांव में एक आश्रम में 11 साल का एक बच्चा मिल गया। पुलिस टीम उसे अपने साथ आगरा ले आई। उसे करौली पुलिस के सुपुर्द भी किया जा सकता था लेकिन आगरा लाया गया।
बुधवार सुबह उसे ऐसे पेश किया जा रहा था जैसे कि गुमशुदा बच्चा ढूंढ लिया गया है। वह वहां आश्रम में साधु के पास था। लेकिन उसके माता-पिता के आते ही इस गुडवर्क की हवा निकल गई। यह बच्चा बदायूं के मूसा झाग के प्रहलादपुर के मुनेंद्र पाठक का बेटा अंकित है।
उन्होंने आगरा पहुंचकर पुलिस को बताया कि अंकित लापता नहीं हुआ था। उन्होंने ही उसे अपनी मर्जी से साधु के पास भेजा था। इसके बाद उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि आगरा पुलिस ने उन्हें बेवजह परेशान किया।