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अवैध शस्त्र कारखाने की रखवाली कर रही पुलिस

Fri, 31 Mar 2017 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
अमर उजाला ब्यूरो आगरा Updated Fri, 31 Mar 2017 12:23 AM IST
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Police guarding the illegal weapon factory
24 दिन में न थाने भेजी गई मशीन, न किसी की सुपुर्दगी में दी गई - फोटो : अमर उजाला
शास्त्रीपुरम में पकड़ी गई डुप्लिकेट विदेशी पिस्टल बनाने की फैक्ट्री की पुलिस को अब रखवाली करनी पड़ रही है। एक दो नहीं, पूरे पांच पुलिस वाले सुरक्षा में लगाए गए हैं। रात दिन पहरा दिया जा रहा है क्योंकि डर है मशीनों के चोरी हो जाने का। मजबूरी इसलिए बनी है क्योंकि न तो भारी भरकम मशीनों को उठवाकर अभी तक थाना ले जाया जा सका है और न ही किसी की सुपुर्दगी में दिया गया है। सुपुर्द किए जाने के लिए कई लोगों से बात हुई, पर कोई राजी नहीं।
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यह  फैक्ट्री छह मार्च को शास्त्रीपुरम की निखिल पैराडाइज कालोनी में पकड़ी गई थी। यहां भारी भरकम मशीनों से पिस्टल के पार्ट्स बनाए जा रहे थे। इसे आवास विकास सेक्टर नौ का निवासी लोकेश शर्मा चला रहा था। उसका एक्सक्लूसिव क्लासेस के नाम से कोचिंग सेंटर भी था। निखिल पैराडाइज में पिस्टल के पार्टस बनाए जाते थे। पश्चिमी पुरी में एक और फैक्ट्री थी। यहां पार्ट्स जोड़े जाते थे।
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इसके बाद खटीकपाड़ा में मुहर लगवाई जाती थी। खटीकपाड़ा की फैक्ट्री से तो मशीन पुलिस ने क्रेन से उठकावर थाना पहुंचवा दी। लेकिन निखिल पैराडाइज की फैक्ट्री की मशीनें अभी तक वहीं पर हैं। ये केस का साक्ष्य हैं। इन्हें या तो थाने पर रखा जा सकता है या किसी की सुपुर्दगी में दी जा सकती हैं लेकिन दोनों काम नहीं हो पा रहे। इसके चलते इनकी रखवाली की जा रही है। रात दिन की ड्यूटी में कुल मिलाकर पांच पुलिस वाले लगे हुए हैं।
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अवैध शस्त्र फैक्ट्री की मशीनें केस प्रापर्टी हैं। इन्हें या तो थाने पर ले जाया जाएगा या किसी की सुपुर्दगी में दिया जाएगा। फिलहाल इन्हें वहीं पर पुलिस सुरक्षा में रखा गया है।

बीएस त्यागी ( सीओ छत्ता)

जांच में पुलिस ने कर दिया खेल
आगरा। इस बड़े मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच को दी गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इसमें भी खेल किया जा रहा है। खुलासे के समय यह बात सामने आई थी कि लाइसेंसी असलाह की कम से कम दस दुकानों पर डुप्लिकेट पिस्टल बेची जा रही थी। पुलिस ने इन पर कार्रवाई नहीं की। पहले दिन ही लखनऊ का हरजीत पकड़ा गया था। उसके सिवाय किसी और का नाम भी नहीं खोला गया। यह बात भी सामने आई कि पिस्टलों की डीलिंग एक प्रापर्टी डीलर के ऑफिस में होती थी। उस पर भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। लग रहा है कि खुलासे के बाद आगे की जांच पर आला अफसरों ने भी ध्यान नहीं दिया।
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