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बाढ़ से बचाने के लिए बने नाले पर दबंगों का कब्जा
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sat, 18 Jul 2015 01:59 AM IST
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बाढ़ से बचाने के लिए गांव संवाई-मितावली के पास बनाए गए नाले पर कब्जा होता जा रहा है और अफसर चुपचाप देख रहे हैं। कहीं नाले को समतल कर खेत बना लिया गया है तो कहीं बिल्डिंग खड़ी कर ली गई है। जो थोड़ा बहुत बचा है, अब उसे भी जेसीबी मशीन से समतल किया जा रहा है। इसकी जानकारी पर पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर तो गई लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया। बताया जा रहा है कि इस बार कब्जा करने वाले सत्ताधारी दल से जुड़े नेता हैं।
नायब तहसीलदार डाक्टर गजेंद्र पाल सिंह को गुरुवार रात सूचना मिली थी कि नाले में जेसीबी मशीन से मिट्टी डालकर इसे समतल किया जा रहा है। वे इंस्पेक्टर के साथ मौके पर पहुंचे। वहां नाले में मिट्टी पड़ी मिली। साफ लग रहा था कि यह नाले की जमीन हड़पने की तैयारी चल रही है। लेकिन पुलिस प्रशासन ने कोई केस दर्ज नहीं कराया। पुलिस ने अपनी जीडी में तस्करा तक दर्ज नहीं किया। नायब तहसीलदार का कहना है कि जो नाला है उसकी जमीन राजस्व अभिलेख में है या नहीं और अगर है तो कितना और कहां से कहां तक है, इसकी जानकारी संबंधित लेखपाल से मांगी गई है। आख्या आने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा। यदि जमीन नाले की हुई तो समतल करने वाले लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उधर, तहसील के सूत्रों ने बताया कि 1983 में बाढ़ आने से क्षेत्र में पानी भर गया था। प्रशासन ने क्षेत्र की जनता को दोबारा जलभराव से परेशानी न हो, इसलिए गांव मितावली के पास से गांव संवाई, बुढ़िया का ताल के पास होते हुए यमुना नदी तक नाले का निर्माण करवाया गया था। बताते हैं कि इसी नाले से जरूरत पड़ने पर बुढ़िया का ताल भी पानी से भरा जाता था। हालांकि अब इस नाले का अधिकांश भाग समतल कर लिया गया है। किसी ने बिल्डिंग बना ली है तो किसी ने खेत।
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कुछ स्थानों पर नाले की पुलिया बनी हुई हैं। गांव संवाई-मितावली के बीच नाले को समतल करने का कार्य शुक्रवार को भी जारी रहा। मौके पर मिले व्यक्ति ने अपना नाम पप्पू यादव बताया। उनका कहना था जिस जमीन को समतल किया जा रहा है, वो नाले की नहीं है। नक्शा में भी कोई नाला दर्ज नहीं है। यदि नाले की जमीन है तो कोई अधिकारी बताए कहां है नाला।
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नायब तहसीलदार डाक्टर गजेंद्र पाल सिंह को गुरुवार रात सूचना मिली थी कि नाले में जेसीबी मशीन से मिट्टी डालकर इसे समतल किया जा रहा है। वे इंस्पेक्टर के साथ मौके पर पहुंचे। वहां नाले में मिट्टी पड़ी मिली। साफ लग रहा था कि यह नाले की जमीन हड़पने की तैयारी चल रही है। लेकिन पुलिस प्रशासन ने कोई केस दर्ज नहीं कराया। पुलिस ने अपनी जीडी में तस्करा तक दर्ज नहीं किया। नायब तहसीलदार का कहना है कि जो नाला है उसकी जमीन राजस्व अभिलेख में है या नहीं और अगर है तो कितना और कहां से कहां तक है, इसकी जानकारी संबंधित लेखपाल से मांगी गई है। आख्या आने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा। यदि जमीन नाले की हुई तो समतल करने वाले लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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उधर, तहसील के सूत्रों ने बताया कि 1983 में बाढ़ आने से क्षेत्र में पानी भर गया था। प्रशासन ने क्षेत्र की जनता को दोबारा जलभराव से परेशानी न हो, इसलिए गांव मितावली के पास से गांव संवाई, बुढ़िया का ताल के पास होते हुए यमुना नदी तक नाले का निर्माण करवाया गया था। बताते हैं कि इसी नाले से जरूरत पड़ने पर बुढ़िया का ताल भी पानी से भरा जाता था। हालांकि अब इस नाले का अधिकांश भाग समतल कर लिया गया है। किसी ने बिल्डिंग बना ली है तो किसी ने खेत।
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कुछ स्थानों पर नाले की पुलिया बनी हुई हैं। गांव संवाई-मितावली के बीच नाले को समतल करने का कार्य शुक्रवार को भी जारी रहा। मौके पर मिले व्यक्ति ने अपना नाम पप्पू यादव बताया। उनका कहना था जिस जमीन को समतल किया जा रहा है, वो नाले की नहीं है। नक्शा में भी कोई नाला दर्ज नहीं है। यदि नाले की जमीन है तो कोई अधिकारी बताए कहां है नाला।