फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   It's not beginning of the murder of staff

कहीं यह कर्मचारियों की हत्या की शुरुआत तो नहीं

Sat, 13 Feb 2016 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा।
अमर उजाला ब्यूरो आगरा। Updated Sat, 13 Feb 2016 01:31 AM IST
विज्ञापन
It's not beginning of the murder of staff
फर्जीवाड़ों के लिए बदनाम यूनिवर्सिटी के कर्मचारी सतेंद्र सिंह की हत्या ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ी चिंता तो यह है कि कहीं यह कर्मचारियों की हत्या की शुरूआत तो नहीं है। दरअसल, यहां बड़े शिक्षा माफिया सक्रिय हैं, जो यूनिवर्सिटी को कई सालों से अपने इशारों पर नचा रहे हैं। माना यही जा रहा है कि सतेंद्र ऐसे दबंगों के सामने नहीं झुके, इसलिए उसकी हत्या की गई। यही वजह रही कि उसकी हत्या के बाद गुस्से में आए कर्मचारियों ने खुलकर कहा कि अब यहां खतरा है।
विज्ञापन

उनका कहना था कि मलाई बड़े खा रहे हैं और फंस रहे हैं कर्मचारी। उनकी हर तरह से मुसीबत है। फर्जीवाड़ा पकड़ा जाए तो केस कर्मचारी पर होता है। उन्हें ही जेल जाना पड़ता है। अब हत्या भी कर्मचारी की गई है। कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष अखिलेश चौधरी और उपाध्यक्ष श्याम सुंदर ने कहा कि यूनिवर्सिटी कैंपस में शिक्षा माफिया दबंगों के साथ असलाह लेकर आते हैं। उन्हें रोका क्यों नहीं जाता। अगर यही हाल रहा तो और भी कर्मचारियों की जान जाएगी। छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्ण मुरारी त्रिपाठी और छात्र नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि यह घटना चिंताजनक और हत्यारों का जल्द से जल्द पकडा़ जाना जरूरी है।
विज्ञापन

सुराग-1
कमरा नंबर 32 से खुलेगा राज
सतेंद्र सिंह के रिश्तेदारों ने पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा कर पुलिस से कहा कि सबसे पहले कमरा नंबर 32 सील किया जाए। इसकी दो वजह बताई। एक तो इसी कमरे में हत्या से कुछ देर पहले उनका कुछ लोगों से विवाद हुआ था। दूसरा, इसी में रखी फाइलों पता चलेगा कि वह किन-किन पर सख्ती कर रहे थे। इसी सख्ती के चलते एक साल में तीन करोड़ फीस जमा हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुराग-2
सख्ती से तिलमिला गए थे कॉलेज संचालक
पुलिस की दूसरी लाइन उन कालेज संचालकों की ओर जाती है, जो सतेंद्र सिंह के सख्त रवैय्ये के चलते उनसे परेशान थे। सतेंद्र के परिवार के लोगों की मानें तो उन्होंने कई गोपनीय फाइलें तैयार की थीं। एक में यहां तक  लिखा कि जो कालेज फीस जमा न करें, उनमें परीक्षा न कराई जाए। हालांकि सवाल यह भी है कि सतेंद्र सिंह के हाथ में सब कुछ नहीं था। फैसला बड़े अफसर लेते हैं। फिर उन्हें निशाना क्यों बनाया गया?

सुराग-3
कैमरे में मिल सकते हैं कातिलों के चेहरे
हत्या के बाद पुलिस ने पालीवाल पार्क के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि हत्यारे किसी में जरूर कैद हुए होंगे। यूनिवसिर्टी में कैमरे नहीं लगे हैं, वरना आसानी से पहचाने जाते। सतेंद्र के मोबाइल की कॉल डिटेल भी निकलवाई जा रही है। अगर कातिल या साजिशकर्ता ने उनसे फोन पर संपर्क किया होगा तो पुलिस को बड़ा सुराग मिल सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed