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फिर से शुरू न हो जाए ‘अपहरण उद्योग’
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 12 Jan 2016 01:42 AM IST
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पहले शमसाबाद से पांच साल के प्रिंस का अपहरण हुआ। फिर आगरा के कमलानगर से बिट्टू का। एक के बाद एक दो वारदात से आशंका पैदा हो गई है कि कहीं अपहरण का ‘उद्योग’ फिर से शुरू तो नहीं होने जा रहा। जानकारी डरावनी ही आ रही है। बीहड़ में लंबे समय से शांत चल रहे दस्यु गिरोह कुछ दिनों से सक्रिय होने लगे हैं। मुखबिर तंत्र का सहारा छोड़कर इलेक्ट्रानिक सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की मोहताज बनी पुलिस इन्हें ट्रेस भी नहीं कर पा रही हैं। जाहिर है अगर तुरंत ही कदम न उठाए गए तो फिरौती की घटनाएं ‘उद्योग’ का रूप ले सकती हैं।
पिछले एक साल को छोड़ दें, तो यहां अपहरण का अपराध उद्योग की तरह ही चलता था। बीहड़ में एक नहीं, कई गैंग थे, जो फिरौती के लिए अपहरण करते थे। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से इन पर लगाम कसी थी। कई बदमाश एनकाउंटर में मारे गए, तो कई आज भी जेल में बंद हैं। लेकिन इस साल के शुरू होते ही अपहरण की दो बड़ी घटनाएं हुई हैं।
शमसाबाद से छात्र प्रिंस का अपहरण किया। फिरौती मांगी गई 50 लाख। इसके बाद आगरा से छात्र बिट्टू का अपहरण किया गया। फिरौती के लिए फोन अभी तक नहीं आया है लेकिन माना यही जा रहा है कि उसे बदमाशों ने उठाया है। प्रिंस बरामद हो चुकी है लेकिन अपहर्ता खुले घूम रहे हैं। बिट्टू का कोई सुराग ही नहीं लगा पा रही है पुलिस।
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2013 में हुई थी दो घटनाएं
आगरा। 2014 में अपहरण की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई। 2013 में आईएसबीटी से हाथरस के शेयर कारोबारी का अपहरण किया गया था। उसे पुलिस ने बड़ी मुश्किल से छुड़ाया था। इसके बाद झांसी के इंजीनियरिंग छात्र का सिकदंरा से अपहरण हुआ था। वह फिरौती देकर छूटा था।
पुलिस रिकार्ड में नहीं नए गिरोह
आगरा। पुलिस के रिकार्ड में फिरौती के अपहरण करने वाले नए गिरोह के नाम नहीं है। इससे पहले यहां सबसे चर्चित गैंग धारा का रहा। उसने पुलिस की नाक में दम कर दिया था। वह लंबे समय से जेल में बंद हैं। भूरा गैंग सिर्फ डाक्टरों का अपहरण करता था। भूरा की आवास विकास कालोनी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
गुर्गो की तलाश में लगी पुलिस
एनकाउंटर के मारे गए शिवदत्त्त के भाई रविदत्त को पुलिस ने हाल ही में पकड़ा गया। अपहरण के लिए बदनाम रहा गुड्डन काछी आठ साल से जेल में है। माना जा रहा है कि इन सरगनाओं के गुर्गे सक्रिय हो गए हैं। इनकी तलाश की जा रही है, लेकिन अभी कोई पकड़ में नहीं आया है।
13 को समीक्षा करेंगी डीआईजी
डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने 13 जनवरी को अपराध समीक्षा मीटिंग बुलाई है। इसमें अपहरण की दोनों वारदात पर भी चर्चा की जाए। पुलिस से पूछा जाएगा कि अभी तक क्या प्रगति हुई है? कौन कौन से गिरोह ट्रेस हुए हैं? कितने बदमाश पकड़े गए हैं?
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पिछले एक साल को छोड़ दें, तो यहां अपहरण का अपराध उद्योग की तरह ही चलता था। बीहड़ में एक नहीं, कई गैंग थे, जो फिरौती के लिए अपहरण करते थे। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से इन पर लगाम कसी थी। कई बदमाश एनकाउंटर में मारे गए, तो कई आज भी जेल में बंद हैं। लेकिन इस साल के शुरू होते ही अपहरण की दो बड़ी घटनाएं हुई हैं।
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शमसाबाद से छात्र प्रिंस का अपहरण किया। फिरौती मांगी गई 50 लाख। इसके बाद आगरा से छात्र बिट्टू का अपहरण किया गया। फिरौती के लिए फोन अभी तक नहीं आया है लेकिन माना यही जा रहा है कि उसे बदमाशों ने उठाया है। प्रिंस बरामद हो चुकी है लेकिन अपहर्ता खुले घूम रहे हैं। बिट्टू का कोई सुराग ही नहीं लगा पा रही है पुलिस।
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2013 में हुई थी दो घटनाएं
आगरा। 2014 में अपहरण की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई। 2013 में आईएसबीटी से हाथरस के शेयर कारोबारी का अपहरण किया गया था। उसे पुलिस ने बड़ी मुश्किल से छुड़ाया था। इसके बाद झांसी के इंजीनियरिंग छात्र का सिकदंरा से अपहरण हुआ था। वह फिरौती देकर छूटा था।
पुलिस रिकार्ड में नहीं नए गिरोह
आगरा। पुलिस के रिकार्ड में फिरौती के अपहरण करने वाले नए गिरोह के नाम नहीं है। इससे पहले यहां सबसे चर्चित गैंग धारा का रहा। उसने पुलिस की नाक में दम कर दिया था। वह लंबे समय से जेल में बंद हैं। भूरा गैंग सिर्फ डाक्टरों का अपहरण करता था। भूरा की आवास विकास कालोनी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
गुर्गो की तलाश में लगी पुलिस
एनकाउंटर के मारे गए शिवदत्त्त के भाई रविदत्त को पुलिस ने हाल ही में पकड़ा गया। अपहरण के लिए बदनाम रहा गुड्डन काछी आठ साल से जेल में है। माना जा रहा है कि इन सरगनाओं के गुर्गे सक्रिय हो गए हैं। इनकी तलाश की जा रही है, लेकिन अभी कोई पकड़ में नहीं आया है।
13 को समीक्षा करेंगी डीआईजी
डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने 13 जनवरी को अपराध समीक्षा मीटिंग बुलाई है। इसमें अपहरण की दोनों वारदात पर भी चर्चा की जाए। पुलिस से पूछा जाएगा कि अभी तक क्या प्रगति हुई है? कौन कौन से गिरोह ट्रेस हुए हैं? कितने बदमाश पकड़े गए हैं?