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आगरा: पांच साल में भी अनसुलझी रही ग्रोवर दंपती की गुत्थी, पढ़ें सनसनीखेज हत्याकांड

Wed, 18 Nov 2020 11:56 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 18 Nov 2020 11:56 AM IST
सार

          इन सवालों के नहीं मिले जवाब 
  • . हत्या के पीछे आखिर वजह क्या थी? 
  • . हत्या किसने की? बदमाश या जानकार? 
  • . फिंगर प्रिंट का मिलान क्यों नहीं हो सका? 
  • . खानाबदोशों पर शक जताया था? उनके बारे में कोई जानकारी नहीं हो सकी? 

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Grover Couple Murder Case: Agra Police Investigation Not Arrests Criminal
ग्रोवर दंपति की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के थाना हरीपर्वत के खंदारी के हनुमान चौराहा के पास रहने वाले चमड़ा कारोबारी अवनीश ग्रोवर (69) और उनकी पत्नी ऊषा रानी ग्रोवर (65) की 14 नवंबर 2015 की रात को घर में ही हत्या कर दी गई थी। इस घटना को अब पांच साल बीत चुके हैं। इसके बावजूद हत्याकांड का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस फाइनल रिपोर्ट तक लगा चुकी है। हाल यह है कि बदमाश भी चिह्नित नहीं हो सके हैं।
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घटना वाले दिन कारोबारी अवनीश ग्रोवर और उनकी पत्नी ऊषा रानी घर में अकेले थे। उनका बेटा गिरीश पत्नी और बच्चों के साथ बहन के पास दिल्ली गया था। 15 नवंबर 2015 को अवनीश ग्रोवर और उनकी पत्नी के शव घर में गेट के पास मिले थे। कुदाल से पति-पत्नी के सिर पर प्रहार किया गया था। दोनों के मुंह और पैर टेप से बांधे थे। कोठी में लूटपाट भी की गई थी।
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तत्कालीन डीजीपी ने घटना को संज्ञान लिया था। घटना के खुलासे के लिए व्यापारियों ने कई दिन आंदोलन किया था। बाद में जूता कारोबारी का सिम बरामद हुआ था। टेप किसी जूता एक्सपोर्ट यूनिट का था। टेप कहां से आया, यह आज तक पता नहीं चल सका। पुलिस ने हत्या के पीछे लूटपाट नहीं मानी थी।
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आठ विवेचक और पांच एसएसपी 
हत्याकांड में आठ विवेचक बदले, जबकि पांच एसएसपी जांच करा चुके हैं। जिस समय हत्याकांड हुआ, उस समय एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह थे। उनके बाद एसएसपी दिनेश चंद्र दुबे, अमित पाठक, जोगेंद्र कुमार और अब बबलू कुमार एसएसपी हैं। वहीं विवेचक के रूप में थाना हरीपर्वत के प्रभारी शैलेष सिंह, हरिमोहन सिंह, राजा सिंह, धर्मेंद्र चौहान, जयकरण सिंह, महेश चंद्र गौतम और प्रवीन कुमार मान के साथ अजय कौशल रह चुके हैं।

हर बार जांच हुई। मगर, नतीजा सिफर ही निकला।  पहली बार फरवरी 2017 में केस में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई थी। हर बार जांच के बाद पूर्व में लगाई गई फाइनल रिपोर्ट का समर्थन करते हुए फाइल आगे बढ़ा दी गई है। यही वजह है कि आज तक पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। 

इन सवालों के नहीं मिले जवाब 
. हत्या के पीछे आखिर वजह क्या थी? 
. हत्या किसने की? बदमाश या जानकार? 
. फिंगर प्रिंट का मिलान क्यों नहीं हो सका? 
. खानाबदोशों पर शक जताया था? उनके बारे में कोई जानकारी नहीं हो सकी? 
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