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‘शहर के हर बच्चे का बचपन लौटा’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Mar 2016 01:33 AM IST
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दिव्य
- फोटो : अमर उजाला आगरा
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‘सिर्फ मेरा लाल ही नहीं लौटा है, शहर के हर बच्चे का बचपन लौट आया है, आज बच्चे पार्क में जाएंगे, खेलेंगे, उनके मन से डर निकला है, हर मां-बाप का कान्फिडेंस लौट आया है...।’ यह कहते-कहते दिव्य की मां मोना उर्फ नेहा की आंखों में खुशी के आंसू छलकने लगते हैं। खुद को संभालती हैं, एसएसपी की ओर देखकर कहती हैं, ‘आगरा पुलिस ने चमत्कार किया है। इस जन्म में पुलिस का कर्ज नहीं चुका पाऊंगी। हम पर क्या बीती, हम ही जानते हैं। जो खुशी मिली है, उसे भी बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। पुलिस को जितना भी सराहें, कम है।’
यह दृश्य है पुलिस लाइन में एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह द्वारा बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस का। एसएसपी के बाद जैसे ही कैमरे मोना की ओर घूमे, उन्होंने अपने मन की बात रखी। बोलीं, ‘दिव्य के अपहरण से पूरा शहर बेचैन था। अजीब सा खौफ फैला था। हर मां-बाप डर रहे थे। शहर ही क्या पूरे देश में इस घटना से डर महसूस किया गया।’
मोना ने कहा ‘मैं तो मां हूं। मैंने मां का फर्ज निभाया। बच्चे को आजादी दी, वह खेलना चाहता, उसे खेलने देती। वह साइकिल चलाने के लिए कहता, तो कभी रोका नहीं, इसमें क्या गलत है? मुझे क्या मालूम था कि घर के अंदर से ही उसे कोई उठाकर ले जाएगा।’ उन्होंने बताया कि उनके पास विदेशों तक से रिश्तेदारों के फोन आए। कहा, ‘पूरा शहर दुआएं कर रहा था। हर स्कूल में प्रार्थना की जा रही थी। सबने मेरे बच्चे को अपना बच्चा समझा, सबकी दुआएं कुबूल हुईं।’ बता दें, 13 मार्च को जैसे ही मोना को पता चला कि बदमाश दिव्य का अपहरण करके ले गए हैं, वे कार से निकल पड़ी थीं। उन्होंने डेढ़ घंटे तक बदमाशों की तलाश की थी।
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‘थैंक यू आगरा पुलिस, थैंक यू मीडिया’
प्रेस कांफ्रेंस के बाद दिव्य ने मीडिया से थोड़ी देर बात की। हाथ जोड़कर कहा, ‘मैं ठीक हूं, थैंक यू आगरा पुलिस, थैंक यू मीडिया।’ कैमरों के सामने वह हलका सा मुस्कुराया। हाथ हिलाया। और जाते हुए सभी को ‘बाय’ कहा।
‘पुलिस प्रशासन और पूरे शहर का आभार’
दिव्य के पिता प्रतीक वार्ष्णेय चार दिनों से सोए नहीं हैं। आंखें सूज गई हैं। थकान से बदन चूर है। लेकिन तमाम तकलीफें पल भर में छूमंतर हो गईं। जैसे ही पता चला कि जिगर का टुकड़ा मिल गया है, खुशी से झूम उठे। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने हमारे लिए रात-दिन एक कर दिए। पूरे शहर ने साथ दिया, दिव्य के लिए प्रार्थना की। सभी के प्रति आभार।’
दादी ने कहा, नरक बन गई थी हमारी जिंदगी
दिव्य का अपहरण उसकी दादी शशि वार्ष्णेय की आंखों के सामने से हुआ था। तब से उसके मिलने तक उनकी आंखों से आंसू नहीं थमे। वह जैसे ही घर पहुंचा, आंखों से आंसू फिर बह निकले, लेकिन ये खुशियों के थे। उन्होंने कहा, ‘चार दिन में हमने जीते जी नरक देख लिया। सांस ले रहे थे, पर जिंदा लाश बने हुए थे। दिव्य के आने से जान में जान पड़ी है।’
दादा बोले, ‘अखिलेश जिंदाबाद’
दिव्य के दादा लव वार्ष्णेय ने पोते को देखते ही कलेजे से लगा लिया। कभी सिर पर हाथ फिराते, तो कभी गालों को चूमते। बोले, ‘हमारी जिंदगी लौट आई है, आगरा पुलिस का कितना धन्यवाद करें, मुख्यमंत्री को बधाई है, अखिलेश यादव जिंदाबाद।’
आज ही मना लिया बर्थ डे
आगरा। दिव्य का सातवां बर्थ डे 26 मार्च को है। उसकी मम्मी मोना का जन्म दिवस 21 मार्च को। पूरे परिवार में मार्च का महीना खुशियों से भरा रहता है। सात दिन में दो बर्थ डे जो मनाए जाते हैं। दिव्य के मिलने पर पूछा गया कि उसका बर्थ डे कैसे मनाएंगे तो उसके मम्मी-पापा ने जवाब दिया, ‘हमने उसका जन्म दिवस आज ही मना लिया है। हमारे लिए इससे शुभ दिन कोई और नहीं हो सकता।’
वार्ष्णेय हाउस की सुरक्षा बढ़ेगी
दिव्य के अपहरण ने उसके परिवार की आंखें खोल दी हैं। पारिवारिक सूत्रों की मानें तो विचार चल रहा है कि घर के खाली हिस्से में किराएदार रखे जाएं या नहीं। दूसरा, मेन गेट पर चौकीदार तैनात किए जा सकते हैं। तीसरा, चारदीवारी को और ऊंचा कराया जाएगा। अगर किराएदार रहने दिए गए तो उनके लिए रास्ता अलग से दिया जाएगा। पूरे घर को जल्द ही सीसीटीवी से लैस किया जा सकता है। दिव्य के नाना ने इसका खाका भी खींच लिया है।
दिव्य के लौटने से होली पर ही हमारी दीवाली हो गई। ऐसी खुशी जीवन में कभी पहले नहीं मिली।
- नेहा वार्ष्णेय (दिव्य की बुआ)
दुआएं काम आईं। दिव्य मिल गया। पुलिस को लोग कोसते जरूर हैं, जरूरत पड़ने पर वही काम आती है।
- प्रबल गर्ग (ममेरे भाई)
जैसे हमारा दिव्य मिला, प्रार्थना करते हैं वैसे ही लापता सभी बच्चे मिल जाएं। हमारी पुलिस से गुजारिश है।
- प्रफुल्ल गर्ग (ममेरे भाई)
मैं सो नहीं पा रही थी। आंख बंद करती सपनों में दिव्य नजर आता। भगवान ने सुन ली, लाल लौट आया।
- डा. विनीता (ताई)
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यह दृश्य है पुलिस लाइन में एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह द्वारा बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस का। एसएसपी के बाद जैसे ही कैमरे मोना की ओर घूमे, उन्होंने अपने मन की बात रखी। बोलीं, ‘दिव्य के अपहरण से पूरा शहर बेचैन था। अजीब सा खौफ फैला था। हर मां-बाप डर रहे थे। शहर ही क्या पूरे देश में इस घटना से डर महसूस किया गया।’
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मोना ने कहा ‘मैं तो मां हूं। मैंने मां का फर्ज निभाया। बच्चे को आजादी दी, वह खेलना चाहता, उसे खेलने देती। वह साइकिल चलाने के लिए कहता, तो कभी रोका नहीं, इसमें क्या गलत है? मुझे क्या मालूम था कि घर के अंदर से ही उसे कोई उठाकर ले जाएगा।’ उन्होंने बताया कि उनके पास विदेशों तक से रिश्तेदारों के फोन आए। कहा, ‘पूरा शहर दुआएं कर रहा था। हर स्कूल में प्रार्थना की जा रही थी। सबने मेरे बच्चे को अपना बच्चा समझा, सबकी दुआएं कुबूल हुईं।’ बता दें, 13 मार्च को जैसे ही मोना को पता चला कि बदमाश दिव्य का अपहरण करके ले गए हैं, वे कार से निकल पड़ी थीं। उन्होंने डेढ़ घंटे तक बदमाशों की तलाश की थी।
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‘थैंक यू आगरा पुलिस, थैंक यू मीडिया’
प्रेस कांफ्रेंस के बाद दिव्य ने मीडिया से थोड़ी देर बात की। हाथ जोड़कर कहा, ‘मैं ठीक हूं, थैंक यू आगरा पुलिस, थैंक यू मीडिया।’ कैमरों के सामने वह हलका सा मुस्कुराया। हाथ हिलाया। और जाते हुए सभी को ‘बाय’ कहा।
‘पुलिस प्रशासन और पूरे शहर का आभार’
दिव्य के पिता प्रतीक वार्ष्णेय चार दिनों से सोए नहीं हैं। आंखें सूज गई हैं। थकान से बदन चूर है। लेकिन तमाम तकलीफें पल भर में छूमंतर हो गईं। जैसे ही पता चला कि जिगर का टुकड़ा मिल गया है, खुशी से झूम उठे। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने हमारे लिए रात-दिन एक कर दिए। पूरे शहर ने साथ दिया, दिव्य के लिए प्रार्थना की। सभी के प्रति आभार।’
दादी ने कहा, नरक बन गई थी हमारी जिंदगी
दिव्य का अपहरण उसकी दादी शशि वार्ष्णेय की आंखों के सामने से हुआ था। तब से उसके मिलने तक उनकी आंखों से आंसू नहीं थमे। वह जैसे ही घर पहुंचा, आंखों से आंसू फिर बह निकले, लेकिन ये खुशियों के थे। उन्होंने कहा, ‘चार दिन में हमने जीते जी नरक देख लिया। सांस ले रहे थे, पर जिंदा लाश बने हुए थे। दिव्य के आने से जान में जान पड़ी है।’
दादा बोले, ‘अखिलेश जिंदाबाद’
दिव्य के दादा लव वार्ष्णेय ने पोते को देखते ही कलेजे से लगा लिया। कभी सिर पर हाथ फिराते, तो कभी गालों को चूमते। बोले, ‘हमारी जिंदगी लौट आई है, आगरा पुलिस का कितना धन्यवाद करें, मुख्यमंत्री को बधाई है, अखिलेश यादव जिंदाबाद।’
आज ही मना लिया बर्थ डे
आगरा। दिव्य का सातवां बर्थ डे 26 मार्च को है। उसकी मम्मी मोना का जन्म दिवस 21 मार्च को। पूरे परिवार में मार्च का महीना खुशियों से भरा रहता है। सात दिन में दो बर्थ डे जो मनाए जाते हैं। दिव्य के मिलने पर पूछा गया कि उसका बर्थ डे कैसे मनाएंगे तो उसके मम्मी-पापा ने जवाब दिया, ‘हमने उसका जन्म दिवस आज ही मना लिया है। हमारे लिए इससे शुभ दिन कोई और नहीं हो सकता।’
वार्ष्णेय हाउस की सुरक्षा बढ़ेगी
दिव्य के अपहरण ने उसके परिवार की आंखें खोल दी हैं। पारिवारिक सूत्रों की मानें तो विचार चल रहा है कि घर के खाली हिस्से में किराएदार रखे जाएं या नहीं। दूसरा, मेन गेट पर चौकीदार तैनात किए जा सकते हैं। तीसरा, चारदीवारी को और ऊंचा कराया जाएगा। अगर किराएदार रहने दिए गए तो उनके लिए रास्ता अलग से दिया जाएगा। पूरे घर को जल्द ही सीसीटीवी से लैस किया जा सकता है। दिव्य के नाना ने इसका खाका भी खींच लिया है।
दिव्य के लौटने से होली पर ही हमारी दीवाली हो गई। ऐसी खुशी जीवन में कभी पहले नहीं मिली।
- नेहा वार्ष्णेय (दिव्य की बुआ)
दुआएं काम आईं। दिव्य मिल गया। पुलिस को लोग कोसते जरूर हैं, जरूरत पड़ने पर वही काम आती है।
- प्रबल गर्ग (ममेरे भाई)
जैसे हमारा दिव्य मिला, प्रार्थना करते हैं वैसे ही लापता सभी बच्चे मिल जाएं। हमारी पुलिस से गुजारिश है।
- प्रफुल्ल गर्ग (ममेरे भाई)
मैं सो नहीं पा रही थी। आंख बंद करती सपनों में दिव्य नजर आता। भगवान ने सुन ली, लाल लौट आया।
- डा. विनीता (ताई)