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डीआईजी के आदेश से पुलिस में हड़कंप
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Wed, 23 Sep 2015 02:05 AM IST
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दो दिन पहले एसएसपी पद से हटाए गए आईपीएस राजेश डी. मोड़क के 10 महीने के कार्यकाल की विभागीय जांच से जुड़ी 653 फाइलों की जांच के आदेश से महकमे में हड़कंप मच गया है। सबसे ज्यादा टेंशन उन पुलिसवालों को है, जो दोषी पाए जाने के बाद भी सिर्फ चेतावनी पाकर सस्ते में छूट गए थे। इन पर अब गाज गिर सकती है। कई मामलों में विभागीय जांच फिर से कराए जाने की तैयारी है।
डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने आदेश दिया है कि मोड़क के कार्यकाल में हुई विभागीय जांच के तमाम मामलों की समीक्षा की जाए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जरूरत पड़ने पर मोड़क से स्पष्टीकरण बाद में लिया जाएगा। पहले कार्रवाई उन पर होगी जो तत्कालीन एसएसपी की मेहरबानी से सजा पाने से बच गए थे। इन पर अब गाज गिर सकती है।
बता दें 10 महीनों में 653 मामलों की जांच कराई गई थी। इनमें से दंड सिर्फ 88 में ही दिया गया था। डीआईजी ऑफिस के सूत्रों ने बताया कि इन मामलों में अब विभागीय जांच फिर से कराकर दंड दिया जा सकता है। इनकी जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारियों से कराए जाने की तैयारी है। इनमें ऐसे भी पुलिसकर्मी शामिल बताए गए हैं जो निलंबित किए जाने के बाद मजे से ड्यूटी करते रहे। इन्हें उस समय पकड़ा भी गया था लेकिन बगैर दंड दिए सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिए गए थे।
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डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने आदेश दिया है कि मोड़क के कार्यकाल में हुई विभागीय जांच के तमाम मामलों की समीक्षा की जाए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जरूरत पड़ने पर मोड़क से स्पष्टीकरण बाद में लिया जाएगा। पहले कार्रवाई उन पर होगी जो तत्कालीन एसएसपी की मेहरबानी से सजा पाने से बच गए थे। इन पर अब गाज गिर सकती है।
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बता दें 10 महीनों में 653 मामलों की जांच कराई गई थी। इनमें से दंड सिर्फ 88 में ही दिया गया था। डीआईजी ऑफिस के सूत्रों ने बताया कि इन मामलों में अब विभागीय जांच फिर से कराकर दंड दिया जा सकता है। इनकी जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारियों से कराए जाने की तैयारी है। इनमें ऐसे भी पुलिसकर्मी शामिल बताए गए हैं जो निलंबित किए जाने के बाद मजे से ड्यूटी करते रहे। इन्हें उस समय पकड़ा भी गया था लेकिन बगैर दंड दिए सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिए गए थे।
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