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बम विस्फोट समझ गांव में मच गई थी भगदड़
ब्यूरो अमर उजाला, बाह
Updated Thu, 15 Oct 2015 02:16 AM IST
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पटाखे बनाते समय हुए विस्फोट में हफीज की मौत के बाद मई गांव में अफरातफरी मच गई। लोग बम विस्फोट समझकर दहशत में आ गए। बच्चों की सुरक्षा को लेकर दौडे़ अभिभावकों ने आननफानन में स्कूल ही बंद करा दिए।
धमाके की आवाज सुन मई के पड़ोसी गांव खांद, कलींजर, स्याइच, बटेश्वर तक लोग डर गए। अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित अभिभावक गांव के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल जा पहुंचे। कुछ समझ में नहीं आया तो स्कूल बंद कराकर बच्चों को घर ले गए। जिस बस्ती में धमाका हुआ वहां के लोग भी अपने घरों को छोड़कर भाग गए। मामले की जानकारी होने पर ही लोग घर लौटे। वहीं, परिवारीजन और पड़ोसी ग्रामीण हफीज के शव को ठिकाने लगाने के बाद अपने घरों में ताला लगाकर भाग गए। पुलिस गांव पहुंची बस्ती में कोई नहीं मिला। हफीज की मौत के मातम में शामिल होने आए उनके रिश्तेदार भी दूसरी बस्ती में बैठकर लौट गए। रिश्तेदारों ने बताया कि उन्हें बीमारी से मौत की जानकारी मिली है।
तीन साल पहले विस्फोट में पिता और दोनों पुत्र हुए थे घायल
बाह। तीन साल पहले भी हबीब के घर विस्फोट हुआ था। तब हबीब की अंगुलियां चली गई थी। हफीज और अब्दुल गफ्फार का एक-एक हाथ कट गया था। उस हादसे के बाद भी परिवार ने पटाखा बनाने का धंधा बंद नहीं किया। हालांकि उस समय हबीब के पास पटाखे बनाने का लाइसेंस था। हादसे के बाद लाइसेंस सरेंडर कर दिया था। लेकिन दोनों पुत्र बिना लाइसेंस के ही पटाखे बनाने का काम करते रहे। अब्दुल गफ्फार ने बताया कि हफीज एक दिन पहले ही बारूद लाया था। मिलावट होने के कारण उसे कूटते समय विस्फोट हुआ और उसकी जान जली गई। बारूद किस दुकान से लाया? दुकानदार बारूद बेचने के लिए अधिकृत था ? बाजार में खुलेआम बारूद कैसे बिक रहा है ? आदि सवालों को लेकर पुलिस छानबीन कर रही है।
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बारूद के ढेर पर और भी हैं बाह के कई गांव
बाह। जरार सब्जी मंडी में पटाखे की चिंगारी से 80 दुकानें जलने के बाद भी पुलिस प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। नतीजतन मई गांव में हादसा हो गया। बाह के कमालपुरा, पहाड़पुरा, ऐमनपुरा, पाठकपुरा, अशोक नगर, बिजौली, बासौनी, सुजानपुरा, चमरौआ, मई, बाह, पिनाहट आदि में पटाखे बेरोकटोक बनाए जाते हैं। इसके बाद जैतपुर, जरार, बटेश्वर, भदरौली, पिनाहट, बाह के बाजरों में बेचे जाते हैं। इन इलाकों में हादसे भी हुए। पिनाहट, कमालपुरा, पहाड़पुरा, बासौनी, बाह में एक-एक लाइसेंस धारक हैं। बाकी लोग अवैध रूप से पटाखे बना और बेच रहे हैं। इस सब से बेखबर अग्निशमन विभाग, पुलिस और प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
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धमाके की आवाज सुन मई के पड़ोसी गांव खांद, कलींजर, स्याइच, बटेश्वर तक लोग डर गए। अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित अभिभावक गांव के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल जा पहुंचे। कुछ समझ में नहीं आया तो स्कूल बंद कराकर बच्चों को घर ले गए। जिस बस्ती में धमाका हुआ वहां के लोग भी अपने घरों को छोड़कर भाग गए। मामले की जानकारी होने पर ही लोग घर लौटे। वहीं, परिवारीजन और पड़ोसी ग्रामीण हफीज के शव को ठिकाने लगाने के बाद अपने घरों में ताला लगाकर भाग गए। पुलिस गांव पहुंची बस्ती में कोई नहीं मिला। हफीज की मौत के मातम में शामिल होने आए उनके रिश्तेदार भी दूसरी बस्ती में बैठकर लौट गए। रिश्तेदारों ने बताया कि उन्हें बीमारी से मौत की जानकारी मिली है।
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तीन साल पहले विस्फोट में पिता और दोनों पुत्र हुए थे घायल
बाह। तीन साल पहले भी हबीब के घर विस्फोट हुआ था। तब हबीब की अंगुलियां चली गई थी। हफीज और अब्दुल गफ्फार का एक-एक हाथ कट गया था। उस हादसे के बाद भी परिवार ने पटाखा बनाने का धंधा बंद नहीं किया। हालांकि उस समय हबीब के पास पटाखे बनाने का लाइसेंस था। हादसे के बाद लाइसेंस सरेंडर कर दिया था। लेकिन दोनों पुत्र बिना लाइसेंस के ही पटाखे बनाने का काम करते रहे। अब्दुल गफ्फार ने बताया कि हफीज एक दिन पहले ही बारूद लाया था। मिलावट होने के कारण उसे कूटते समय विस्फोट हुआ और उसकी जान जली गई। बारूद किस दुकान से लाया? दुकानदार बारूद बेचने के लिए अधिकृत था ? बाजार में खुलेआम बारूद कैसे बिक रहा है ? आदि सवालों को लेकर पुलिस छानबीन कर रही है।
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बारूद के ढेर पर और भी हैं बाह के कई गांव
बाह। जरार सब्जी मंडी में पटाखे की चिंगारी से 80 दुकानें जलने के बाद भी पुलिस प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। नतीजतन मई गांव में हादसा हो गया। बाह के कमालपुरा, पहाड़पुरा, ऐमनपुरा, पाठकपुरा, अशोक नगर, बिजौली, बासौनी, सुजानपुरा, चमरौआ, मई, बाह, पिनाहट आदि में पटाखे बेरोकटोक बनाए जाते हैं। इसके बाद जैतपुर, जरार, बटेश्वर, भदरौली, पिनाहट, बाह के बाजरों में बेचे जाते हैं। इन इलाकों में हादसे भी हुए। पिनाहट, कमालपुरा, पहाड़पुरा, बासौनी, बाह में एक-एक लाइसेंस धारक हैं। बाकी लोग अवैध रूप से पटाखे बना और बेच रहे हैं। इस सब से बेखबर अग्निशमन विभाग, पुलिस और प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।