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शिक्षामित्र सड़क पर उतरे, पुल पर लगाया जाम
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:05 AM IST
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मैनपुरी। सहायक अध्यापक पद पर बनाए रखने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने गुरुवार को फिर से हुंकार भरी। धरना-प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ईशन नदी पुल पर करीब आधे एक घंटे तक सड़क जाम रखा। शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री के नाम डीएम को ज्ञापन भी सौंपा। धूप में प्रदर्शन के दौरान एक शिक्षामित्र तो गिरकर बेहोश हो भी गई थी।
आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित तिकोनियां पार्क में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए शिक्षामित्रों ने ईशन नदी के पुल पर पहुंचकर सड़क को जाम कर दिया। इस दौरान कई शिक्षामित्र तो सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सड़क पर लोटने लगे थे। शिक्षामित्र हेमवीर सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से ही सरकार शिक्षामित्रों पर चुप्पी साधे है।
सरकार को नया आध्यादेश लाना चाहिए। इससे सभी शिक्षामित्र सहायक अध्यापक के पद पर बने रहें। नया आध्यादेश लाने तक सहायक अध्यापकों के बराबर कार्य व वेतन दिया जाए। इस मौके पर शुभम शक्ति भदौरिया, सनत पांडेय, विनीत प्रताप, अनुराग मिश्रा, नरेंद्र, संध्या चौहान, संजू चौहान आदि मौजूद रहे।
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वहीं एक शिक्षामित्र के परिजनों ने तो डीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि शिक्षामित्रों को उनका हक मिलना चाहिए। उन्होंने कई वर्षो तक विद्यालय में काम किया है। शिक्षामित्रों को जल्द ही उनके पद पर वापस किया जाए।
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आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित तिकोनियां पार्क में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए शिक्षामित्रों ने ईशन नदी के पुल पर पहुंचकर सड़क को जाम कर दिया। इस दौरान कई शिक्षामित्र तो सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सड़क पर लोटने लगे थे। शिक्षामित्र हेमवीर सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से ही सरकार शिक्षामित्रों पर चुप्पी साधे है।
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सरकार को नया आध्यादेश लाना चाहिए। इससे सभी शिक्षामित्र सहायक अध्यापक के पद पर बने रहें। नया आध्यादेश लाने तक सहायक अध्यापकों के बराबर कार्य व वेतन दिया जाए। इस मौके पर शुभम शक्ति भदौरिया, सनत पांडेय, विनीत प्रताप, अनुराग मिश्रा, नरेंद्र, संध्या चौहान, संजू चौहान आदि मौजूद रहे।
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वहीं एक शिक्षामित्र के परिजनों ने तो डीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि शिक्षामित्रों को उनका हक मिलना चाहिए। उन्होंने कई वर्षो तक विद्यालय में काम किया है। शिक्षामित्रों को जल्द ही उनके पद पर वापस किया जाए।