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फर्जीवाड़ा : दबंगों ने एससी की जमीन हड़पी
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एटा। तहसील सदर में फर्जीवाड़ा सामने आया है यहां पर हस्त लिखित खसरे में एससी वर्ग के व्यक्ति की जमीन को चढ़ाकर ओबीसी के लोगों ने फर्जी तरीके से अपने नाम करवा लिया। जमीन मालिक को जब फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो उसने सारे दस्तावेजों का परीक्षण कराया। इसमें सामने आया कि खसरे में हाथ से लिखकर कंप्यूटर खतौनी पर नाम चढ़वाया गया। अब मामला संज्ञान में आते ही लेखपाल से लेकर उच्चाधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
तहसील सदर की ग्राम पंचायत चमकरी निवासी धन्न कुमार व सुयोधन पुत्र नेकसे लाल हैं। धन्न कुमार का आरोप है कि थान सिंह बघेल पुत्र आशाराम निवासी द्वारिकापुरी, नरेश चंद्र पुत्र बारीलाल निवासी नगला बंदी ने लेखपाल से मिलकर खसरे में हाथ से वर्ष 2002 में जमीन को चढ़वा लिया था। इतना ही नहीं लेखपाल ने जमीन कंप्यूटर खतौनी पर भी चढ़वा दी। पीड़ितों ने जब जमीन की खतौनी निकलवाई तो उनके नाम गायब थे, यह देख वह परेशान रहने लगे और तहसील से सारे दस्तावेजों को एकत्रित किया। कागजी खेल होने की भनक लगी तो उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। पीड़ित का कहना है कि खतौनी में जमीन तभी चढ़ाई जा सकती है जब बैनामा के बाद दाखिल खारिज हुई है। इतना ही नहीं जब जमीन एससी वर्ग के नाम में थी उस समय एससी जमीन ओबीसी व सामान्य वर्ग के नाम बैनामा भी नहीं हो रहे थे। इसके बावजूद भी जमीन को तहसील कर्मियों की मिली भगत से दबंगों ने अपने नाम करवा ली।
फर्जी तरीके से एससी वर्ग के लोगों की जमीन हड़पने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस तरह का कोई प्रकरण है तो उसकी जांच कराई जाएगी और कोई भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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नंदलाल सिंह, एसडीएम सदर
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तहसील सदर की ग्राम पंचायत चमकरी निवासी धन्न कुमार व सुयोधन पुत्र नेकसे लाल हैं। धन्न कुमार का आरोप है कि थान सिंह बघेल पुत्र आशाराम निवासी द्वारिकापुरी, नरेश चंद्र पुत्र बारीलाल निवासी नगला बंदी ने लेखपाल से मिलकर खसरे में हाथ से वर्ष 2002 में जमीन को चढ़वा लिया था। इतना ही नहीं लेखपाल ने जमीन कंप्यूटर खतौनी पर भी चढ़वा दी। पीड़ितों ने जब जमीन की खतौनी निकलवाई तो उनके नाम गायब थे, यह देख वह परेशान रहने लगे और तहसील से सारे दस्तावेजों को एकत्रित किया। कागजी खेल होने की भनक लगी तो उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। पीड़ित का कहना है कि खतौनी में जमीन तभी चढ़ाई जा सकती है जब बैनामा के बाद दाखिल खारिज हुई है। इतना ही नहीं जब जमीन एससी वर्ग के नाम में थी उस समय एससी जमीन ओबीसी व सामान्य वर्ग के नाम बैनामा भी नहीं हो रहे थे। इसके बावजूद भी जमीन को तहसील कर्मियों की मिली भगत से दबंगों ने अपने नाम करवा ली।
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फर्जी तरीके से एससी वर्ग के लोगों की जमीन हड़पने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस तरह का कोई प्रकरण है तो उसकी जांच कराई जाएगी और कोई भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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नंदलाल सिंह, एसडीएम सदर