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चौहरे हत्याकांड के दोषी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
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फिरोजाबाद। थाना रामगढ़ क्षेत्र में 12 वर्ष पूर्व हुए चौहरेे हत्याकांड के आरोपी हरिओम उर्फ हीरो को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उसे पूर्व में सुनाई गई फांसी की सजा से बरी करते हुए जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं।
मामला थाना रामगढ़ क्षेत्र का है। बड़ा मिर्जा का नगला निवासी निर्दोष देवी (40), पूनम (18), आशीष (12) एवं अंशुल (दस) की 27 अक्तूबर 2008 को हत्या कर दी गई थी। जबकि घर में पांच वर्ष का बालक उज्ज्वल बच गया था। इस घटना की जानकारी उस समय हुई थी, जब दूधिया घर में दूध देने आया था। इस मामले में छह लोगों के खिलाफ थाना रामगढ़ में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले में अपर जिला जज उमाशंकर शर्मा ने 2015 में हरिओम उर्फ हीरो को फांसी जबकि शेष आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद हरिओम उर्फ हीरो ने हाईकोर्ट में अपील की लेकिन हाईकोर्ट ने भी सजा को यथावत रखा था। दोषी ने फिरोजाबाद जिला कारागार के माध्यम से जेल अधीक्षक मोहम्मद अकरम खान से पैरवी के लिए अधिवक्ता देने की अर्जी लगाई थी।
जेल अधीक्षक ने जेल अधिवक्ता लियाकत अली एडवोकेट के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई करते हुए हरिओम उर्फ हीरो को आरोपों से बरी करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कहा है कि यदि अन्य किसी मामले में हरिओम उर्फ हीरो आरोपित नहीं है तो उसे जेल से रिहा किया जाए। जेल अधीक्षक मोहम्मद अकरम खान ने बताया कि हरिओम उर्फ हीरो आगरा सेंट्रल जेल में बंद है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का इस तरह का फैसला संज्ञान में आया है। सुप्रीम कोर्ट के लिए अपील करने वाले जेल के अधिवक्ता लियाकत अली एडवोकेट ने बताया कि हरिओम को फांसी की सजा से बरी किया गया है।
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मामला थाना रामगढ़ क्षेत्र का है। बड़ा मिर्जा का नगला निवासी निर्दोष देवी (40), पूनम (18), आशीष (12) एवं अंशुल (दस) की 27 अक्तूबर 2008 को हत्या कर दी गई थी। जबकि घर में पांच वर्ष का बालक उज्ज्वल बच गया था। इस घटना की जानकारी उस समय हुई थी, जब दूधिया घर में दूध देने आया था। इस मामले में छह लोगों के खिलाफ थाना रामगढ़ में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले में अपर जिला जज उमाशंकर शर्मा ने 2015 में हरिओम उर्फ हीरो को फांसी जबकि शेष आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद हरिओम उर्फ हीरो ने हाईकोर्ट में अपील की लेकिन हाईकोर्ट ने भी सजा को यथावत रखा था। दोषी ने फिरोजाबाद जिला कारागार के माध्यम से जेल अधीक्षक मोहम्मद अकरम खान से पैरवी के लिए अधिवक्ता देने की अर्जी लगाई थी।
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जेल अधीक्षक ने जेल अधिवक्ता लियाकत अली एडवोकेट के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई करते हुए हरिओम उर्फ हीरो को आरोपों से बरी करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कहा है कि यदि अन्य किसी मामले में हरिओम उर्फ हीरो आरोपित नहीं है तो उसे जेल से रिहा किया जाए। जेल अधीक्षक मोहम्मद अकरम खान ने बताया कि हरिओम उर्फ हीरो आगरा सेंट्रल जेल में बंद है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का इस तरह का फैसला संज्ञान में आया है। सुप्रीम कोर्ट के लिए अपील करने वाले जेल के अधिवक्ता लियाकत अली एडवोकेट ने बताया कि हरिओम को फांसी की सजा से बरी किया गया है।
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