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एक्सक्लूसिव: कोरोना संक्रमित मरीजों की जान में कारगर हुई प्लाज्मा थेरेपी, 74 को मिला लाभ
Wed, 09 Dec 2020 12:29 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 09 Dec 2020 12:29 PM IST
सार
- एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी तक 120 मरीजों को दी गई थेरेपी
- 23 ने दम तोड़ा, अभी 23 मरीजों पर चल रही है थेरेपी
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एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्लाज्मा थेरेपी से अभी तक 74 मरीज पूरी तरह से ठीक होकर घर जा चुके हैं। 23 की मौत हुई, बाकी के इतने ही मरीजों का इलाज चल रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक से 120 संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा दिया गया। सबसे ज्यादा प्लाज्मा थेरेपी 50 से 60 साल की उम्र के मरीजों को दी गई।
संक्रमितों का इलाज करने वाले डॉ. अजीत चाहर ने बताया कि मरीज ऑक्सीजन पर थे, थेरेपी देने के बाद मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगा, उन्हें सांस लेने की परेशानी नहीं हुई। ऑक्सीजन देने की जरूरत भी नहीं रही। खासकर उम्रदराज मरीजों में भी प्लाज्मा के बेहतर परिणाम सामने आए, उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करने की जरूरत नहीं पड़ी।
14 दिन बाद बनती हैं एंटीबॉडीज
एसएन की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि कारोना वायरस से ठीक होने के बाद 14 दिन बाद एंटीबॉडीज बनने लगती हैं। इनकी जांच करने के बाद चार महीने के अंतराल में प्लाज्मा दान किया जा सकता है, इसको मरीज को लगाने से एंटीबॉडीज वायरस के प्रभाव को कम करने लगते हैं।
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केस स्टडी एक
फिरोजाबाद की 54 साल की किरन अरोड़ा संक्रमित होने पर सांस लेने में परेशानी हो रही थी। ऑक्सीजन स्तर भी कम मिला। ऐसे में इनको दो बार प्लाज्मा दिया गया, इसके बाद ऑक्सीजन स्तर तेजी से बढ़ने लगा।
केस स्टडी दो
एत्मादपुर निवासी शालिनी गर्भवती थी और कोरोना वायरस से संक्रमित हो गईं। इनकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी दी गई। इनमें सुधार हुआ। संक्रमण ठीक होने के बाद प्रसव हुआ।
ठीक होने की दर में एसएन तीसरे स्थान पर
आगरा में कोरोना वायरस के मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी से ठीक होने की दर 62 फीसदी है। ऐेसे में आगरा तीसरे स्थान पर है। सबसे ज्यादा ठीक होने की दर नोएडा में हैं, जिसकी 86 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर लखनऊ का केजीएमयू है, जिसकी दर 70 फीसदी है।
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संक्रमितों का इलाज करने वाले डॉ. अजीत चाहर ने बताया कि मरीज ऑक्सीजन पर थे, थेरेपी देने के बाद मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगा, उन्हें सांस लेने की परेशानी नहीं हुई। ऑक्सीजन देने की जरूरत भी नहीं रही। खासकर उम्रदराज मरीजों में भी प्लाज्मा के बेहतर परिणाम सामने आए, उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करने की जरूरत नहीं पड़ी।
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14 दिन बाद बनती हैं एंटीबॉडीज
एसएन की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि कारोना वायरस से ठीक होने के बाद 14 दिन बाद एंटीबॉडीज बनने लगती हैं। इनकी जांच करने के बाद चार महीने के अंतराल में प्लाज्मा दान किया जा सकता है, इसको मरीज को लगाने से एंटीबॉडीज वायरस के प्रभाव को कम करने लगते हैं।
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केस स्टडी एक
फिरोजाबाद की 54 साल की किरन अरोड़ा संक्रमित होने पर सांस लेने में परेशानी हो रही थी। ऑक्सीजन स्तर भी कम मिला। ऐसे में इनको दो बार प्लाज्मा दिया गया, इसके बाद ऑक्सीजन स्तर तेजी से बढ़ने लगा।
केस स्टडी दो
एत्मादपुर निवासी शालिनी गर्भवती थी और कोरोना वायरस से संक्रमित हो गईं। इनकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी दी गई। इनमें सुधार हुआ। संक्रमण ठीक होने के बाद प्रसव हुआ।
ठीक होने की दर में एसएन तीसरे स्थान पर
आगरा में कोरोना वायरस के मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी से ठीक होने की दर 62 फीसदी है। ऐेसे में आगरा तीसरे स्थान पर है। सबसे ज्यादा ठीक होने की दर नोएडा में हैं, जिसकी 86 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर लखनऊ का केजीएमयू है, जिसकी दर 70 फीसदी है।