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53 विवेचकों, 64 गवाहों को अंतिम नोटिस जारी

Mon, 07 Sep 2020 11:00 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 11:00 PM IST
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मैनपुरी। गंभीर प्रवृति के महिला अपराधों पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। तीन साल से लंबित मुकदमों में गवाही में देरी के चलते 53 विवेचकों और 64 गवाहों को गवाही देने के लिए कोर्ट से अंतिम नोटिस जारी किए गए हैं। तय तारीख पर हाजिर नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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गंभीर प्रवृति के महिला अपराधों के शीघ्र निस्तारण करने के हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं। इनमें दुष्कर्म, हत्या, दहेज हत्या, घरेलू हिंसा जैसे मुकदमे शामिल हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अदालतों में तीन साल से लंबित चल रहे गंभीर प्रवृति के महिला अपराध के मुकदमों को चिह्नित करके उनके शीघ्र निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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गवाही नहीं होने के कारण लंबित चल रहे मुकदमों में गवाही देने वाले विवेचकों सहित गवाहों को नोटिस जारी किए गए हैं। कोर्ट द्वारा इन मुकदमों में 117 गवाहों को अंतिम नोटिस जारी किए गए हैं। इन मुकदमों में 53 विवेचकों और 64 गवाहों को अदालत में गवाही देने के लिए अंतिम नोटिस जारी किए गए है। तय तारीख पर अदालत में गवाही के लिए नहीं आने पर वेतन रोकने सहित सर्विसबुक में प्रतिकूल प्रविष्टि भी दिए जाने की चेतावनी दी गई है।
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तबादले के बाद गवाही में करते देरी
अधिकांश मुकदमों में पुलिसकर्मी भी गवाह होते हैं। तैनाती के दौरान केस डायरी में उनकी गवाही लिखी जाती है। जिले से तबादला होने के बाद गवाही के लिए तय तारीख पर नहीं आने से गवाही के साथ ही मुकदमे के निस्तारण में देरी होती है। पीड़ित को अदालत के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
केस-एक
थाना कुर्रा क्षेत्र में वर्ष 2017 में एक युवती के साथ दुष्कर्म किया गया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। अब विवेेचक की गवाही नहीं हो पाने से मुकदमा अपर जिला जज की कोर्ट में लंबित है। विवेचक को अंतिम नोटिस जारी किया गया है।
केस-दो
थाना बरनाहल क्षेत्र में वर्ष 2017 में एक महिला के साथ दुष्कर्म हुआ। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। मुकदमा एफटीसी कोर्ट में चल रहा है। विवेचक की गवाही नहीं होने से लंबित मुकदमे में विवेचक को अंतिम नोटिस भेजा गया है।

पुलिस के गवाहों केे साथ भी आम गवाहों की तरह कार्रवाई होनी चाहिए। गवाही के लिए नहीं आने वाले सरकारी गवाहों के भी वारंट जारी करने के साथ ही वेतन रोकने, सर्विस बुक में प्रतिकूल प्रविष्टि देने की कार्रवाई होनी चाहिए।
रामसेवक, पूर्व स्पेशल मजिस्ट्रेट
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