फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   court

कोर्ट रजिस्टर से अब तय होगी जवाबदेही

Thu, 27 Aug 2020 12:00 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 12:00 AM IST
विज्ञापन
court
मैनपुरी। जनपद न्यायालयों में कई सरकारी विभागों से जुड़े मामले विचाराधीन हैं। सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा समय-समय पर आख्या प्रस्तुत करने के लिए सरकारी विभागों को नोटिस और आदेश जारी किए जाते हैं। बावजूद इसके अधिकारी कोर्ट के नोटिस और आदेश को गंभीरता से नहीं लेते हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है। मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने हर सरकारी विभाग में अलग से कोर्ट रजिस्टर बनाने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन

कोर्ट के आदेश पर रजिस्टर में कोर्ट के आदेश पर की गई कार्रवाई, प्रगति और परिणाम का स्पष्ट रूप से ब्योरा दर्ज किया जाएगा। कार्रवाई का विवरण संबंधित कोर्ट में भेजा जाएगा। विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कोर्ट रजिस्टर की समीक्षा की जाएगी। इससे अफसरों की जवाबदेही तय होगी। अभी तक कोर्ट के कई नोटिस और आदेशों का सरकारी दफ्तरों ने तय सीमा में जवाब नहीं दिया है।
विज्ञापन

कार्यालयाध्यक्ष होंगे जिम्मेदार
कोर्ट रजिस्टर के अपडेट नहीं होने पर कार्यालयाध्यक्ष के साथ ही संबंधित कर्मचारी की जवाबदेही तय होगी। आदेश का समय सीमा में पालन नहीं होने पर कोर्ट द्वारा कार्रवाई होगी। कोर्ट रजिस्टर में स्पष्ट और निर्धारित बिंदुओं में ही विवरण दर्ज होगा। समीक्षा के बाद जवाबदेही तय करके कार्रवाई कराई जाएगी।कोर्ट के आदेश की स्थिति
विज्ञापन
विज्ञापन

समन तामील कराने का बढ़ेगा काम
पुलिस विभाग में कोर्ट रजिस्टर बनाए जाने के बाद पुलिस पर काम का बोझ बढ़ेगा। कोर्ट से जारी होने वाले सम्मन तामील कराकर विवरण दर्ज कराने की जिम्मेदारी बढ़ेगी। सम्मन तामील कराने की प्रक्रिया में संबंधित पुलिसकर्मी की जवाबदेही तय की जाएगी।

----
-पुलिस विभाग को इस वर्ष 14 अगस्त तक जिला न्यायालय से 567 नोटिस एवं आदेश जारी किए गए। 288 मामलों में तय समय सीमा तक जवाब नहीं दिया गया।
-राजस्व विभाग को इस वर्ष 316 नोटिस/आदेश जारी किए गए। 117 नोटिस और आदेशों का समय सीमा के भीतर जवाब नहीं दिया गया।
-विद्युत विभाग को इस वर्ष 203 नोटिस/आदेश जारी किए गए। 93 मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब नहीं दिया गया।
-विकास विभाग को इस वर्ष 113 नोटिस और आदेश दिए गए, लेकिन 57 मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर अफसरों ने जवाब दाखिल नहीं किया।
-प्रशासन को इस वर्ष 206 नोटिस एवं आदेश कोर्ट की ओर से भेजे गए। 74 मामलों में प्रशासन ने तय समय सीमा में जवाब नहीं दिया।
कोर्ट रजिस्टर कर्मचारियों की मनमानी पर अंकुश लगाएगा। कोर्ट रजिस्टर में आदेश, प्रगति, परिणाम अंकित होने से अदालतों पर काम का दबाव भी कम होगा। कोर्ट रजिस्टर से जवाबदेही तय करने में आसानी होगी।
अमित मिश्रा, सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed