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शोध छात्रा हत्याकांड: जांच में लापरवाही से लंबी हो गई इंसाफ की लड़ाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 14 Dec 2018 05:39 AM IST
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आगरा में शोध छात्रा की हत्या में इंसाफ की लड़ाई लंबी हो गई है। इसकी वजह जांच का ठीक ढंग से न हो पाना रही है। सीबीआई ने सहआरोपी यशवीर सिंह संधू के खिलाफ सुबूत जुटाने में ढिलाई बरती।
नतीजा यह हुआ कि दो की जगह एक ही आरोपी रह गया, जबकि पुलिस की चार्जशीट में दो आरोपी थे। इस कारण अब कोर्ट में सुनवाई चल रही है कि मुकदमे में सामूहिक दुष्कर्म की धारा लगाई जाएगी या नहीं।
हत्याकांड 15 मार्च 2013 को हुआ था। पहले पुलिस ने जांच की। चार्जशीट दो लोगों के खिलाफ दाखिल की गई। उदयस्वरूप मुख्य आरोपी और यशवीर सिंह संधू सह आरोपी। धाराएं हत्या और दुष्कर्म के प्रयास की लगीं। दोनों आरोपियों को जेल भेजा गया था।
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नतीजा यह हुआ कि दो की जगह एक ही आरोपी रह गया, जबकि पुलिस की चार्जशीट में दो आरोपी थे। इस कारण अब कोर्ट में सुनवाई चल रही है कि मुकदमे में सामूहिक दुष्कर्म की धारा लगाई जाएगी या नहीं।
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हत्याकांड 15 मार्च 2013 को हुआ था। पहले पुलिस ने जांच की। चार्जशीट दो लोगों के खिलाफ दाखिल की गई। उदयस्वरूप मुख्य आरोपी और यशवीर सिंह संधू सह आरोपी। धाराएं हत्या और दुष्कर्म के प्रयास की लगीं। दोनों आरोपियों को जेल भेजा गया था।
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सीबीआई ने भी की जांच
बाद में केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। तीन साल लंबी जांच के बाद सीबीआई ने चार्जशीट सिर्फ उदय स्वरूप के खिलाफ दाखिल की। यह हत्या और दुष्कर्म की धारा में थी। इसमें यशवीर सिंह संधू को क्लीन चिट दे दी गई।
कोर्ट में इसी पर बहस चली कि एक चार्जशीट में यशवीर सिंह संधू आरोपी है और दूसरी में नहीं। अब बहस इस मोड़ पर है कि केस में सामूहिक दुष्कर्म की धारा लगाई जाए या नहीं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह धारा लगाई जानी चाहिए। इस मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होनी है।
अगर पुलिस और सीबीआई की चार्जशीट में अंतर न होता तो इंसाफ की लड़ाई शायद काफी आगे पहुंच चुकी होती। दो जांच एजेंसियों की चूक से मामला उलझ गया। इसी कारण से इंसाफ की लड़ाई लंबी हो गई है।
कोर्ट में इसी पर बहस चली कि एक चार्जशीट में यशवीर सिंह संधू आरोपी है और दूसरी में नहीं। अब बहस इस मोड़ पर है कि केस में सामूहिक दुष्कर्म की धारा लगाई जाए या नहीं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह धारा लगाई जानी चाहिए। इस मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होनी है।
अगर पुलिस और सीबीआई की चार्जशीट में अंतर न होता तो इंसाफ की लड़ाई शायद काफी आगे पहुंच चुकी होती। दो जांच एजेंसियों की चूक से मामला उलझ गया। इसी कारण से इंसाफ की लड़ाई लंबी हो गई है।