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सुधीर हत्याकांड में चार को आजीवन कारावास
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मैनपुरी। जिला जज विजेंद्र सिंह ने भोगांव में 17 साल पहले रंजिश के चलते हुई युवक की हत्या के मामले में तीन भाइयों सहित चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन्होंने सभी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाने केे बाद चारों को जेल भेजा गया है।
थाना भोगांव केे शहजादेपुर निवासी सुधीर कुमार की 25 नवंबर 2002 को रंजिश के चलते गांव में ही गोलियों मारकर हत्या कर दी गई थी। सुधीर के भाई सुनील ने गांव के ही तीन सगे भाई श्यामवीर, रामवीर, विश्राम सिंह और एक अन्य रावेंद्र सिंह कठेरिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। मुकदमे की सुनवाई जिला जज विजेंद्र सिंह की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी, विवेचक, चिकित्सक सहित गवाहों ने गवाही दी। गवाही के आधार पर चारों को सुधीर की हत्या का दोषी पाया गया। डीजीसी वीरेंद्र कुमार मिश्रा, एडीजीसी अशाक कुमार पंकज ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की दलील दी।
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हत्यारोपी रामवीर, श्यामवीर, विश्राम सिंह, रावेंद्र सिंह की जेल जाने के बाद जमानत मंजूर हो गई। मुकदमे में गवाही होने के बाद आरोपी बहस नहीं करा रहे थे। जिला जज विजेंद्र सिंह ने 26 जून को बहस नहीं कराने पर जमानत खारिज करके उनको जेल भेज दिया था। मंगलवार को आरोपी सजा सुनने के लिए जेल से ही अदालत आए थे।
सुधीर का अपने चाचा रावेंद्र सिंह से जमीन का विवाद चल रहा था। सुधीर की जमीन पर रावेंद्र कब्जा करना चाहते थे। रामवीर और उसके भाई इस मामले में रावेंद्र की मदद करते थे। जमीन पर कब्जे की रंजिश के चलते रावेंद्र ने अपने साथियों की मदद से सुधीर की दरवाजे के बाहर ही गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी।
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थाना भोगांव केे शहजादेपुर निवासी सुधीर कुमार की 25 नवंबर 2002 को रंजिश के चलते गांव में ही गोलियों मारकर हत्या कर दी गई थी। सुधीर के भाई सुनील ने गांव के ही तीन सगे भाई श्यामवीर, रामवीर, विश्राम सिंह और एक अन्य रावेंद्र सिंह कठेरिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। मुकदमे की सुनवाई जिला जज विजेंद्र सिंह की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी, विवेचक, चिकित्सक सहित गवाहों ने गवाही दी। गवाही के आधार पर चारों को सुधीर की हत्या का दोषी पाया गया। डीजीसी वीरेंद्र कुमार मिश्रा, एडीजीसी अशाक कुमार पंकज ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की दलील दी।
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हत्यारोपी रामवीर, श्यामवीर, विश्राम सिंह, रावेंद्र सिंह की जेल जाने के बाद जमानत मंजूर हो गई। मुकदमे में गवाही होने के बाद आरोपी बहस नहीं करा रहे थे। जिला जज विजेंद्र सिंह ने 26 जून को बहस नहीं कराने पर जमानत खारिज करके उनको जेल भेज दिया था। मंगलवार को आरोपी सजा सुनने के लिए जेल से ही अदालत आए थे।
सुधीर का अपने चाचा रावेंद्र सिंह से जमीन का विवाद चल रहा था। सुधीर की जमीन पर रावेंद्र कब्जा करना चाहते थे। रामवीर और उसके भाई इस मामले में रावेंद्र की मदद करते थे। जमीन पर कब्जे की रंजिश के चलते रावेंद्र ने अपने साथियों की मदद से सुधीर की दरवाजे के बाहर ही गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी।