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विधवा पेंशन के लिए विधवाओँ इस तरह पैसे लूट रहे अफसर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Updated Tue, 27 Nov 2018 04:58 PM IST
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मथुरा में विधवा महिलाओं को पारिवारिक लाभ योजना के 30 हजार रुपये के लिए सरकारी कार्यालयों के 300 चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति इस कदर खराब है कि दलालों को पैसे देने के बाद भी गरीब विधवाएं योजना के लाभार्थियों लिस्ट में शामिल नहीं हो पा रही हैं।
राज्य सरकार पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत उन गरीब विधवाओं को 30 हजार रुपये प्रदान कर रही है, जिनके पति की मृत्यु एक साल के दरम्यान हुई है। इस योजना में महिलाओं को पति का मृत्यु प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र देना होता है।
आवेदन की प्रक्रिया ऑन लाइन है। आवेदक से जुड़े तथ्यों की जांच पड़ताल भी ऑन लाइन प्रक्रिया के तहत निर्धारित की गई है। लेकिन, जनपद में राज्य सरकार की यह योजना दलालों के चंगुल में फंस गई है। ऑन लाइन प्रक्रिया के तहत ऐसे अनेक आवेदक मौजूद हैं, जिन्हें आवेदन किए एक वर्ष से ऊपर हो गया है, लेकिन यह आवेदन अभी भी ऑन लाइन जांच पड़ताल में उलझे हुए हैं।
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तहसील स्तर पर इसके सत्यापन के लिए 5 हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं, इस मामले में सबसे खराब स्थिति छाता और महावन तहसील की है। जबकि राजीव भवन में डोलने वाले दलाल 2 हजार रुपये में 30 हजार रुपये पेंशन दिलाने की गारंटी ले रहे हैं।
यहां के मूल निवासी मूलचंद की पत्नी रामदुलारी ने बताया कि डेढ़ साल से पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत मिलने वाली मदद के लिए वो काफी दफ्तरों के चक्कर लगा चुकी हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। कभी कलेक्ट्रेट तो कभी तहसील में गई। अब तहसील से मंजूरी मिल गई है लेकिन समाज कल्याण विभाग में फाइल लटक रही है।
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राज्य सरकार पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत उन गरीब विधवाओं को 30 हजार रुपये प्रदान कर रही है, जिनके पति की मृत्यु एक साल के दरम्यान हुई है। इस योजना में महिलाओं को पति का मृत्यु प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र देना होता है।
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आवेदन की प्रक्रिया ऑन लाइन है। आवेदक से जुड़े तथ्यों की जांच पड़ताल भी ऑन लाइन प्रक्रिया के तहत निर्धारित की गई है। लेकिन, जनपद में राज्य सरकार की यह योजना दलालों के चंगुल में फंस गई है। ऑन लाइन प्रक्रिया के तहत ऐसे अनेक आवेदक मौजूद हैं, जिन्हें आवेदन किए एक वर्ष से ऊपर हो गया है, लेकिन यह आवेदन अभी भी ऑन लाइन जांच पड़ताल में उलझे हुए हैं।
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तहसील स्तर पर इसके सत्यापन के लिए 5 हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं, इस मामले में सबसे खराब स्थिति छाता और महावन तहसील की है। जबकि राजीव भवन में डोलने वाले दलाल 2 हजार रुपये में 30 हजार रुपये पेंशन दिलाने की गारंटी ले रहे हैं।
यहां के मूल निवासी मूलचंद की पत्नी रामदुलारी ने बताया कि डेढ़ साल से पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत मिलने वाली मदद के लिए वो काफी दफ्तरों के चक्कर लगा चुकी हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। कभी कलेक्ट्रेट तो कभी तहसील में गई। अब तहसील से मंजूरी मिल गई है लेकिन समाज कल्याण विभाग में फाइल लटक रही है।